ई सब कि भऽ रहलैक अछिः मिथिलाक कि सब बचत, कि सब मरत
मिथिलांचल: मिथिला में मैथिलीक दुर्दशा जेना कारी अक्षर भैस बराबर – राम बाबु सिंह, मधेपुर (कलुआही) – हालः दिल्ली सँ धन्य छथि मैथिल धन्य छथि मिथिलांचल में रहनिहार वा रहनिहारि आ हिनकर सभक आत्म दर्शन आत्म चिंतन आत्म मन्थन ? स्वपोषित आ स्वघोषित कार्यक्रम के संग अपन टाँग उपर राखय आ चमकाबक लेल अविरल काज … ई सब कि भऽ रहलैक अछिः मिथिलाक कि सब बचत, कि सब मरत









