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प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिला सँ लोकपलायन आइयो ओहि गति सँ जारी अछि

सुभाषचंद्र झा, सहरसा। अक्टुबर १, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! एक तरफ राज्य सरकार व मंत्री – विधायक सबहक पैघ-पैघ दावा आ दोसर तरफ रोजगारक अकाल – एहि बीच मे फँसल अछि मिथिलाक गरीबी रेखा सँ निचाँक अधिसंख्य जनता। जकरा अपन माय, बाप, पत्नी व बाल बच्चा केँ छोड़ि रोजी रोटी के लेल परदेश जाय पड़ै छै मिथिला सँ लोकपलायन आइयो ओहि गति सँ जारी अछि

साँझक चौपाड़ि परः दोहा-कतार मे मैथिली साहित्यिक गोष्ठी

बिन्देश्वर ठाकुर, दोहा। अक्टुबर १, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! “मातृभाषाक जगेर्णा हमरा सबहक प्रेरणा” मूल नाराक संग विगत १४ मास सँ निरन्तर रुपमे आयोजना होइत आबि रहल कतार देशक राजधानी दोहामे मैथिली काव्य-सन्ध्या अन्तर्गतक कार्यक्रम “साँझक चौपाड़ि पर” केर चौदहम मासक बैसार काल्हि ३० सितम्बर २०१६ शुक्र दिन दोहाक मुन्ताजा पार्क मे सफलतापूर्वक सम्पन्न भेल । युवा साँझक चौपाड़ि परः दोहा-कतार मे मैथिली साहित्यिक गोष्ठी

मिथिला मखान फिल्म केर मुम्बई मे प्रदर्शनः एक रिपोर्ट

धर्मेन्द्र कुमार झा, मुम्बई। अक्टुबर १, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! शुभ नवरात्रि! दिनांक 30.09.2016 संध्या 4:30 सँ अँधेरी पश्चिम सिनेपोलिस में जागरण फिल्म फेस्टिवल में “मिथिला मखान” राष्ट्रय पुरष्कार प्राप्त सिनेमा केर प्रदर्शन लेल समस्त मैथिल आ मिथिला प्रेमी केँ भाई नितिन चंद्रा केर तरफ सँ हकार भेटल छल। दहेज़ मुक्त मिथिला के तरफ स राष्ट्रिय मिथिला मखान फिल्म केर मुम्बई मे प्रदर्शनः एक रिपोर्ट

नवरात्रा आ आध्यात्मिक चिन्तनः त्रिविध कर्म (कर्म सिद्धान्त)

आलेखः त्रिविध कर्म – अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी (मूल आलेखः जयदयाल गोयन्दका) कर्म तीन प्रकारक होएछ – प्रारब्ध, संचित आ क्रियमाण! कैल गेल शुभ-अशुभ और मिश्रित कर्म मे सँ फल देबाक लेल सम्मुख आयल कर्म केर नाम ‘प्रारब्ध’ थीक, जे सुख-दुःखकेर निमित्त भूतजाति, आयु और भोग देल करैत अछि। ‘संचित’ ओहि कर्म केर नाम अछि, नवरात्रा आ आध्यात्मिक चिन्तनः त्रिविध कर्म (कर्म सिद्धान्त)

विद्यापतिधाम लछमिनियां केँ भेटल पर्यटन स्थलक दर्जा

समाचारः साभार कोसी टाइम्स कुणाल किशोर, सहरसा। सितम्बर ३०, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! विद्यापतिधाम लक्षमिनियां केँ पर्यटन विभाग द्वारा मान्यता दैत पर्यटन सूची सँ जोड़ल गेल अछि । धाम केर संस्थापक भोगेन्द्र शर्मा कहलैन जे पर्यटन मंत्री द्वारा पत्र दैत एकर सूचना देल गेल अछि । एहि खबैर सँ पूरा इलाकाक लोक मे प्रसन्नता आ उल्लास देखा विद्यापतिधाम लछमिनियां केँ भेटल पर्यटन स्थलक दर्जा

भक्तिभावपूर्ण रचना पठाउः नवरात्रा विशेष

विशेषांकः दुर्गा पूजाक अवसर पर मैथिली कवि लोकनिक भक्तिभावपूर्ण रचनाक संकलन मिथिला केँ शक्तिपीठ बहुतो कारण सँ मानल जाएछ। स्वयं जगज्जननी जगदम्बा महालक्ष्मी ‘सीता’ केर रूप मे एतय अवतार लेलनि। ओ कोनो माताक गर्भ सँ नहि बल्कि स्वयं धरा – वसुधा – पृथ्वी – भूमि सँ राजा जनक द्वारा हर जोतलापर कुम्भ मे सुन्दर बालिकाक भक्तिभावपूर्ण रचना पठाउः नवरात्रा विशेष

जागरण फिल्म फेस्टिवल मे आइ मिथिला मखान केर प्रदर्शन

मुम्बई, सितम्बर ३०, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!!   राष्ट्रीय सम्मान सँ पुरस्कृत मैथिली सिनेमा ‘मिथिला मखान’ केर प्रदर्शन जागरण फिल्म फेस्टिवल मे मुम्बई केर अंधेरी वेस्ट स्थित सिनेपोलिस (पूर्व नामः फन रिपब्लिक) सिनेमा घर मे संध्या पौने ५ बजे सँ प्रदर्शन कैल जायत। ई जनतब निर्देशक नितिन नीरा चन्द्रा अपन फेसबुक मार्फत करौलनि अछि।   दहेज जागरण फिल्म फेस्टिवल मे आइ मिथिला मखान केर प्रदर्शन

पैछला ७० वर्षक घोर उपेक्षाक निदान ‘मिथिला राज्य निर्माण’

आलेखः पछिला 70 सालक क्षेत्रीय उपेक्षाक माँग – मिथिलाराज्य – रोहित यादव, दिल्ली आइ एकटा एहन सच्चाई अहाँ सभक सोझाँ राखि रहल छी जाहि सँ अहाँक भीतर केर बिहार प्रेम हँटि जायत। पछिला 70 साल सँ राज्य ओ केंद्र सरकार कुन कुन तरहक अदृश्य षड्यंत्र मिथिलाक प्रति कऽ रहल अछि से देखु। अहि ठाम अदृश्य षड्यंत्र पैछला ७० वर्षक घोर उपेक्षाक निदान ‘मिथिला राज्य निर्माण’

मिरानिसे राष्ट्रीय अधिवेशन ऐतिहासिक दरबार हॉल मे

दरभंगा, सितम्बर २९, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! लगभग ७ दसक सँ निरन्तरता मे रहल मिथिला राज्य आन्दोलन केँ गन्तव्य स्थान धरि पहुँचेबाक लेल संकल्पित मिथिला राज्य निर्माण सेना पहिल बेर एहि मुद्दा पर राष्ट्रीय अधिवेशनक संग ३० जिला भरिक लोक केँ एकत्रित करय जा रहल अछि, आर मिथिलाक धिया सिया केँ आध्यात्मिक तौर पर आन्दोलनक अगुआ मिरानिसे राष्ट्रीय अधिवेशन ऐतिहासिक दरबार हॉल मे

गाम मोन पड़ैयऽ

कविता – डा. धनाकर ठाकुर सुग्गा, मैना, गीदड़, गदहा, सपनौर सांप, खिखिर, चील, घोरन, चुट्टी पर लिखैत चलू जीवन भरि कहियो ने होयत बाबू कैलाश छुट्टी छोडि देलक जे समाज सामा पौतीके आबहुँ समय निकालू कैलाश दिय संभारि पोथीमे पोती के मैथिलीपुत्र कैलाश जागू लिय कलम बिना मोसि के अधुना कियो नहि बुझथि मर्म दादीक गाम मोन पड़ैयऽ