कि मिथिला समाज मे आपसी सौहार्द्र अन्त भऽ रहल अछि?
“शिक्षा मे मिथिलाक यैह हाल – अपने लोक अपन लोकक उन्नति सँ जरैत” – सुभाष बिरपूरिया कहैत छथि आर सच्चाई यैह छैक अपन मिथिलाक। लोक कहियो पाछू छूटल केँ डेन पकड़ि एकपेरिया देने टपा दैत छल, अर्थात् आगू बढा दैत छल। गामक अभिभावक लोकनि लगभग सब दरबज्जा भोर आ साँझ जाएत छलाह, ई देखैत … कि मिथिला समाज मे आपसी सौहार्द्र अन्त भऽ रहल अछि?









