ई पाप छियैक या पुण्य – दुविधा सँ ऊबार केना भेटत
एक मनोनुभूति अपना सब बेसीकाल कोनो कर्म करय सँ पहिने पाप आ पुण्य केर पक्ष पर ध्यान दैत छियैक, किंवा दैत हेबय। हमर हाल एहि मादे बच्चे सँ द्वंद्वबन्धन मे फँसयवला होइत आयल अछि। ई शायद माँ-पिता आ परिजनक बेर-बेर टोकबाक कारण भेल, बच्चा मे बड बदमाशी करियैक…. आ बेर-बेर बात-कथा सुनैत-सुनैत ई हाल भ’ … ई पाप छियैक या पुण्य – दुविधा सँ ऊबार केना भेटत







