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प्रवीण नारायण चौधरी

अपार सफलता संग संपन्न भेल दुइ-दिवसीय ‘चनमा’ आयोजन काठमांडू मे

विराटनगर, २८ मई, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! नेपालक पहिल राष्ट्रपति डा. रामबरण यादव द्वारा उद्घाटन – प्रथम दिवस मे वाचन व सांस्कृतिक कार्यक्रम नेपालक राजधानी काठमांडू मे ‘चनमा’ आयोजन मिथिलाक जीवन ओ सृजन सँ जुड़ल विभिन्न सत्रक माध्यम सँ वक्ता लोकनिक वक्तव्यक संग सांस्कृतिक आयोजन करैत काल्हि संध्याकाल ८ बजे कमलपोखरी – अग्रवाल भवन मे सम्पन्न अपार सफलता संग संपन्न भेल दुइ-दिवसीय ‘चनमा’ आयोजन काठमांडू मे

मनन करय योग्यः सिद्धिक आधार श्रद्धा

आध्यात्मिक कथा (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) बहुत पहिनेक बात थिक। सिंहकेतु नामक एक पंचालदेशीय राजकुमार अपन सब सेवक संग लय केँ एक दिन वन मे शिकार खेलाय लेल गेलाह। हुनकहि सेवक मध्य एक शबर केँ शिकारक खोज करैत समय एम्हर-ओम्हर घूमैत एकटा टूटल-फूटल शिवालय देखाय पड़लैक। तेकर चबूतरा पर एकटा शिवलिंग पड़ल छलैक, जे टूटिकय मनन करय योग्यः सिद्धिक आधार श्रद्धा

कुरहैर सँ हलुवा बनेबाक खिस्सा…..

कथाः कुरहैर सँ हलुवा बनेबाक खिस्सा – प्रवीण नारायण चौधरी   काल्हिक अतिथि सत्कारक महत्ववला कथा “लिखल नहियो रहैत छैक तैयो भेटैत छैक” पढिकय सैकड़ों पाठक लोकनिक प्रोत्साहन वला कतेको शब्द भेटल, सभक प्रति हार्दिक आभार।   आइ भोरे-भोर पत्नी पूछैत छथि जे आइ घर मे कय गोटा पाहुन आबि रहला अछि… हम कहलियन्हि जे कुरहैर सँ हलुवा बनेबाक खिस्सा…..

नेपालक मिथिला मे खुजल एक आरो हवाईअड्डा, उड़ान लेल तैयार, परीक्षण सफल

समाचारः साभार कान्तिपुर, संचारकर्मी अवधेश झा केर रिपोर्ट (मैथिली अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) राजविराज विमानस्थल उडान भरय लेल तैयार पक्की धावनमार्ग, एप्रोन आर टैक्सी–वे पीचिंग भेलाक बाद बैसाख २० मे परीक्षण उड़ानक तैयारी बैसाख ९, २०७५ अवधेशकुमार झा राजविराज — लंबा अवधि उपरान्त राजविराज विमानस्थलक निर्माण कार्य पूरा भऽ गेल अछि । पक्की धावनमार्ग, टावर मरम्मत, एप्रोन नेपालक मिथिला मे खुजल एक आरो हवाईअड्डा, उड़ान लेल तैयार, परीक्षण सफल

मिथिलाक कर्मठ सपुत – मैथिली दर्पण केर प्रकाशक दीपक झा संग साक्षात्कार

साक्षात्कारः दीपक झा, प्रकाशक, मैथिली दर्पण, मुम्बई मिथिला सब दिन ऋषि-मुनिक धरती रहल। एतय जे कियो राजा भेलाह ओ प्रजाप्रेमी, प्रजाक हित मे सदिखन कार्य करबाक कारण अपन देहोक सुधि-बुधि बिसरा जाएत रहलन्हि तैँ ‘विदेह’ कहेलाह। – ई आख्यान् भारतक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी अपन हालहि संपन्न प्राचीन मिथिलाक सांस्कृतिक राजधानी वर्तमान नेपालक प्रदेश २ केर मिथिलाक कर्मठ सपुत – मैथिली दर्पण केर प्रकाशक दीपक झा संग साक्षात्कार

नेपालक पहिल राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव करता ‘चनमा’ केर उद्घाटन

विराटनगर, २३ मई, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! काठमांडू मे प्रस्तावित कार्यक्रम ‘चनमा’ केर उद्घाटन नेपालक पहिल राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव करता – एहि बातक पुष्टि करैत चनमा आयोजन समितिक अध्यक्ष विभा झा अपन स्टेटस अपडेट कयलनि अछि। मिथिलाक अनुपम डेग केर आयोजकत्व तथा मयूर फोसेट्स प्रा. लि. केर प्रस्तुति मे नेपालक राजधानी काठमांडू मे २-दिवसीय ‘मिनी नेपालक पहिल राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव करता ‘चनमा’ केर उद्घाटन

विधक विधान तक बदैल देबाक सामर्थ्य होएत छैक ‘अतिथि सत्कार’ सँ अर्जित पुरुषार्थ मे

आध्यात्मिक कथा – प्रवीण नारायण चौधरी लिखल नहियो रहैत छैक तैयो भेटैत छैक….. जी! एक बेर नारदजी पृथ्वीलोक भ्रमण करय लेल एलाह। भैर दिन घुमघाम केलाक बाद, कहू न, अपनहि मिथिलाक एकटा सुन्दर गाम पहुँचि गेलाह।   इच्छा भेलन्हि जे भगवान् राम कहियो मिथिलाक पहुनाई केर चर्चा करथि से कनेक अपनो एक दिन पहुनाइ कइये विधक विधान तक बदैल देबाक सामर्थ्य होएत छैक ‘अतिथि सत्कार’ सँ अर्जित पुरुषार्थ मे

माछ सँ प्रेमक एक अनुपम कथा

प्रसंग चर्चा – मिथिलांग आ माछ – प्रवीण नारायण चौधरी शुभे हो शुभे – माछ सँ प्रेम अपन मिथिलाक विधान केँ यदाकदा अपनहि लोक बड़ा कठिनाह, बोरिंग आ अतिपरंपरावादी, पाखंडी आदि कहैत छैक – नामहि राखि देने छैक ‘मिथिलांग’। बेर-कुबेर कहैत भेटा जायत “बेसी मिथिलांग मे नहि पड़ू’। त कि थिकैक ई मिथिलांग? कतहु यात्रा माछ सँ प्रेमक एक अनुपम कथा

नेपाल मे आर्थिक वर्ष २०७५-७६ केर नीति तथा कार्यक्रमक घोषणा मे मिथिला-मधेस लेल कि?

विचार – कौशल गोपालवंशी २०७५/७६ केर नीति तथा कार्यक्रम केँ देखैत त हमरा एहेन लगैत अछि जे नेपाल मे कोनो तरहक राजनीतिक तथा भौगोलिक समस्ये नहि छैक, मात्र आर्थिक क्रान्तिक जरुरी छैक तेहेन लगैत अछि। आर, नेपालमे सब ठाम एक-समान विकास चाही रहल अछि, कियैक तँ कोनो पिछड़ल क्षेत्रक लेल कतहु विशेष आर्थिक पैकेज घोषणा करबाक नेपाल मे आर्थिक वर्ष २०७५-७६ केर नीति तथा कार्यक्रमक घोषणा मे मिथिला-मधेस लेल कि?

गायक सेवा सँ आत्मनिर्भरता, एक विलक्षण संस्मरण

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी गोसेवा आ पशुपालन – कृषि सँ आत्मनिर्भरतः मानव जीवनक सब सँ पैघ काज आइ कनेक एम्हर-ओम्हर मे व्यस्त भऽ गेल रही ताहि सँ समय पर किछु शब्द-संस्मरण-वार्ता आगू नहि आनि सकलहुँ….! तथापि, भोर जखन होएत छैक त ओ दिन केहेन होयत तेकर संकेत प्रकृति केर किछु पदचाप सँ कय दैत गायक सेवा सँ आत्मनिर्भरता, एक विलक्षण संस्मरण