रामचरितमानस मोतीः विश्वामित्रक राजा दशरथ सँ राम-लक्ष्मण केँ माँगब आ ताड़का वध
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती विश्वामित्रक राजा दशरथ सँ राम-लक्ष्मण केँ माँगब आ ताड़का वध जे व्यापक, अकल (निरवयव), इच्छारहित, अजन्मा और निर्गुण छथि आ जिनकर न नाम छन्हि न रूप, वैह भगवान भक्त वास्ते नाना प्रकारक अनुपम (अलौकिक) चरित्र करैत छथि। ई सब चरित्र हम गाबिकय (बखान करैत) कहलहुँ अछि। आब आगूक … रामचरितमानस मोतीः विश्वामित्रक राजा दशरथ सँ राम-लक्ष्मण केँ माँगब आ ताड़का वध






