मैथिली गीता आ भाष्य
– अनुवादकः प्रवीण नारायण चौधरी
अत्यन्त सहज आ बोधगम्य मैथिली भाषा-शैली मे “मैथिली गीता आ भाष्य” प्रस्तुत कयल गेल अछि । मूल कृति अंग्रेजी मे स्वामी स्वरूपानन्द द्वारा कयल गेल अछि । अद्वैत् आश्रम केर प्रथम अध्यक्ष स्वामी स्वरूपानन्द जी केँ स्वामी विवेकानन्दक प्रथम उत्तराधिकारी मानिकय अद्वैत आश्रमक अध्यक्ष बनायल गेल छलन्हि । स्वामी विवेकानन्द रामकृष्ण परमहंस सँ प्रभावित भ’ शास्त्रक अध्ययन ओ विवेचना सँ पूरे संसार केँ परिचित करेबाक पैघ जिम्मेदारी उठौने रहथि । हुनकर मानब छलन्हि जे कोनो सिद्धान्त केँ आँखि मुनिकय विश्वास करबाक आवश्यकता नहि छैक, बरु एहि पर निरन्तर अध्ययन-शोध आ विमर्श करैत लोक अपन अनुभूति मे अदृश्य परमात्मा व हुनक शक्ति केँ स्वयं बुझबाक यत्न करथि । एहि सिद्धान्तक अनुयायी विद्वान् लेखक स्वामी स्वरूपानन्द जीक ई कृति १९९९ ई. मे काशी यात्राक क्रम मे ‘मुगलसराय स्टेशन’ (आब पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन) पर हम बुक स्टाल सँ कीनने रही आ एहि गीताक अध्ययनक बहुत पैघ लाभ स्वयं भेटल हमरा । हम कतेको प्रकारक चमत्कारक दर्शन सेहो गीताक स्वाध्याय – एहि पोथीक अध्ययनक क्रम मे प्राप्त कयलहुँ । एकटा समय छल जखन कोनो तरहक मानसिक दुविधा किंवा परेशानी मे योगेश्वर श्री कृष्ण केँ ‘ॐ श्री परमात्मने नमः’ कहि प्रणाम करैत आँखि मुंदिकय जे पन्ना पलटाबी, ओतहि अनुकूल समाधान भेटि गेल करैत छल । गीताक महत्ता हम अपन शब्द मे बेसी कि गाउ, अहाँ सब एकर माहात्म्य स्वयं पढ़ब-गुनब त अपने आप बुझय मे आबि जायत । आस्था राखि हमरे जेकाँ स्वाध्याय करब त माहात्म्य मे कहल एक-एक बात केर स्वयं अनुभव करय लागब । सभक कल्याणक निमित्त मैथिली मे ई कार्य करैत अपन छोटकी बेटी देवांशीक प्रेरणा देबाक कारण ओकरा प्रथमतः लेकिन भावना आ अम्बिकाक संग हमर पुत्र प्रियशील केँ संयुक्त रूप सँ ई समर्पित कय रहल छी । सादर प्रणाम !!
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*सम्पूर्ण गीता – मूल अंग्रेजी अनुवाद – स्वामी स्वरूपानन्द
१. पहिल अध्यायः अर्जुनक शोक-चिन्ता – The Grief of Arjuna
२. दोसर अध्यायः ज्ञानक मार्ग – The Way of Knowledge
३. तेसर अध्यायः कर्मक मार्ग – The Way of Karma
४. चारिम अध्यायः ज्ञान मे कर्म सँ संन्यासक मार्ग – The Way of Renunciation of Action in Knowledge
५. पाँचम अध्यायः संन्यासक मार्ग – The Way of Renunciation
६. छठम अध्यायः योगक (ध्यानक) मार्ग – The Way of Meditation
७. सातम अध्यायः अनुभूतिक संग ज्ञानक मार्ग – The Way of Knowledge with Realisation
८. आठम अध्यायः अक्षर-ब्रह्मक मार्ग – The Way To the Imperishable Brahman
१०. दसम अध्यायः दिव्य महिमाक झलक – The Glimpses of the Divine Glory
११. एगारहम अध्यायः ब्रह्माण्डीय रूपक दृष्टि – The Vision of the Universal Form
१२. बारहम अध्यायः भक्तिक मार्ग – The Way of Devotion
१३. तेरहम अध्यायः क्षेत्र आ क्षेत्रज्ञक भेद – The Discrimination of the Kshetra and the Ksherajna
१४. चौदहम अध्यायः तीन गुणक भेद – The Discrimination of the Three Gunas
१५. पन्द्रहम अध्यायः परमपिता परमात्माक मार्ग – The Way to the Supreme Spirit
१७. सत्रहम अध्यायः त्रिगुणात्मक श्रद्धाक बारे जिज्ञासा – The Enquiry into the Threefold Sraddha
१८. अठारहम अध्यायः संन्यास मे मुक्तिक मार्ग – The Way of Liberation in Renunciation
*अनिवार्य पठनीयः गीताक माहात्म्य – The Greatness of Gita (A must read chapter)
सम्पूर्ण पाठक लोकनि मे हमर प्रणाम आ शुभकामना !!
हरिः हरः!!
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