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प्रवीण नारायण चौधरी

झिझिया के पूछे नहि दांडिया के भरमार – मिथिला मे परदेशिया नाच के बोखार

मिथिला मे परदेशिया नाच के बयार लेल जिम्मेदार केकरा कहल जाय? क. सम्भ्रान्त समाजक गुम होयब आ समाजक विकृति प्रति कतहु कोनो प्रतिकार वा सामाजिक प्रतिकार तक नहि करब ख. मिथिलाक समरस समाजरूपी शुद्ध दूध मे जातिवादिताक खटाई सँ फाटल दूध वला नौबत, फट्टन पर्यन्त काज नहि लागयवला स्थिति ग. बाजारवाद के वीभत्स रूप मे झिझिया के पूछे नहि दांडिया के भरमार – मिथिला मे परदेशिया नाच के बोखार

रामचरितमानस मोतीः रावण द्वारा कुम्भकर्ण केँ जगेनाय, कुम्भकर्ण द्वारा रावण केँ उपदेश आर विभीषण-कुम्भकर्ण संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती रावण द्वारा कुम्भकर्ण केँ जगेनाय, कुम्भकर्ण द्वारा रावण केँ उपदेश आर विभीषण-कुम्भकर्ण संवाद लक्ष्मणजी केँ होश आबि गेलनि, आ एम्हर…. १. ई समाचार जखन रावण सुनलक त ओ बहुते विषाद करैत बेर-बेर माथ नोचलक, बहुत व्याकुल भ’ कुंभकर्ण लग गेल आ बहुतो तरहक उपाय कयकेँ ओ कुंभकर्ण केँ रामचरितमानस मोतीः रावण द्वारा कुम्भकर्ण केँ जगेनाय, कुम्भकर्ण द्वारा रावण केँ उपदेश आर विभीषण-कुम्भकर्ण संवाद

३०० वर्ष सँ बेसी के इतिहास आ ‘सत्य’ के जीत के अद्भुत प्रमाण – कुर्सों-नदियामी दुर्गास्थान

अमित मिश्रा, मछैता, दरभंगा। १५ अक्टूबर २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! ठेंगहा पकड़ी महिनाम पीडब्ल्यूडी सड़कक किनार कुर्सों-नदियामी गाम मे अवस्थित दुर्गा मंदिर एहि इलाका मे बहुते प्रसिद्ध आ विख्यात अछि। दुर्गा मन्दिर श्रद्धालु लोकनिक आस्थाक मुख्य केन्द्र थिक। भव्य मन्दिर, अलौकिक कारी पाथर सँ बनल माता दुर्गा भवानी, लक्ष्मीनारायण भगवान् केर संग विभिन्न देवी-देवता सभक ३०० वर्ष सँ बेसी के इतिहास आ ‘सत्य’ के जीत के अद्भुत प्रमाण – कुर्सों-नदियामी दुर्गास्थान

रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक प्रलापलीला, हनुमान्‌जीक लौटब, लक्ष्मणजी केँ होश आयब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री रामजीक प्रलापलीला, हनुमान्‌जीक लौटब, लक्ष्मणजी केँ होश आयब दृश्य ई छैक जे मेघनाद द्वारा शक्तिबाण केर प्रहार सँ लक्ष्मणजी मूर्छित छथि, जाम्बवन्तजीक कहल मुताबिक हनुमान्‌जी द्वारा सुषेण वैद्य केँ आनल गेल, सुषेण वैद्य जे औषधि कहलखिन से अनबाक लेल हनुमान्‌जी गेलथि आ रास्ता मे बाधा उत्पन्न कयनिहार रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक प्रलापलीला, हनुमान्‌जीक लौटब, लक्ष्मणजी केँ होश आयब

रामचरितमानस मोतीः भरतजीक बाण सँ हनुमान्‌ केर मूर्च्छित होयब, भरत-हनुमान्‌ संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरतजीक बाण सँ हनुमान्‌ केर मूर्च्छित होयब, भरत-हनुमान्‌ संवाद पैछला अध्याय मे कालनेमिक वध उपरान्त हनुमान्‌जी द्वारा सुषेण वैद्यक बतायल पर्वत पर औषधिक पहिचान नहि कय सकबाक कारण समूचा पर्वते उठाकय लंका लेल चलि देलनि आ आकाशमार्ग सँ उड़ैत अयोध्या उपरक आकाश मे पहुँचैत छथि – तखनः १. रामचरितमानस मोतीः भरतजीक बाण सँ हनुमान्‌ केर मूर्च्छित होयब, भरत-हनुमान्‌ संवाद

रामचरितमानस मोतीः हनुमानजीक सुषेण वैद्य केँ आनब आ संजीवनी बुटी लेल जायब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती हनुमानजीक सुषेण वैद्य केँ आनब आ संजीवनी बुटी लेल जायब कालनेमि-रावण संवाद, मकरी उद्धार, कालनेमि उद्धार पिछला अध्याय मे लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध आ लक्ष्मणजी पर शक्तिबाण प्रहार सँ हुनका मुर्छा मे देखि श्री रामजी सहित समस्त लोक चिन्तित छथि। तेकर बाद – १. जाम्बवान्‌ कहलखिन – लंका मे सुषेण रामचरितमानस मोतीः हनुमानजीक सुषेण वैद्य केँ आनब आ संजीवनी बुटी लेल जायब

रामचरितमानस मोतीः लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध आ शक्तिबाण लगला सँ लक्ष्मणजीक मूर्च्छित होयब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, लक्ष्मणजी केँ शक्तिबाण लागब प्रसंग छल माल्यवान् (रावणक नाना) द्वारा रावण केँ बुझेनाय जे श्री रामजी संग वैरभाव केर त्याग कय हुनका जानकीजी वापस करू आर सर्वसमर्थ भगवानक भजन करू, एहि पर रावणक तामस आ माल्यवान् केँ दरबार सँ बाहर निकलि जेबाक आ दोबारा मुंह तक रामचरितमानस मोतीः लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध आ शक्तिबाण लगला सँ लक्ष्मणजीक मूर्च्छित होयब

समाज मे बदलाव सँ पहिने स्वयं मे बदलाव आवश्यक

स्वयंसंकल्प आ स्वयंसेवा   यदि हम चाहि टा लेबय, परिवर्तन आबिये टा जेतय! यदि दुविधे फँसल रहबय, समय ब्यर्थे टा बिति जेतय!!   स्वयंसंकल्प आ स्वयंसेवा सँ समाज बदलैत छैक। हम स्वयं कि सब सिद्धान्त बनेने छी, हमरा स्वयं मे समाज प्रति सेवाक केहेन भावना अछि, एहि तरहें परिवर्तन स्वयं सँ समाज व समुदाय धरि समाज मे बदलाव सँ पहिने स्वयं मे बदलाव आवश्यक

रामचरितमानस मोतीः रावण केँ माल्यवान द्वारा बुझेबाक प्रयत्न

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती माल्यवान का रावण को समझाना १. युद्धारम्भक दृश्यक वर्णन पिछला अध्याय मे भेल छल। किछु मारल गेल, किछु घायल भेल, किछु भागिकय गढ़ पर चढ़ि गेल। अपन बल सँ शत्रु केँ विचलित कयकेँ रीछ आ बानर वीर सब गरजि रहल अछि। राति भेल देखि बानर सभक चारू सेनाक रामचरितमानस मोतीः रावण केँ माल्यवान द्वारा बुझेबाक प्रयत्न

मैथिली सिनेमाक इतिहास – ऐतिहासिक पोथी केँ भेटत ‘साइनसिने अवार्ड’

८ अक्टूबर २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! सृजनपथ पर अग्रसर स्रष्टा किसलय कृष्णक नवसृजन ‘मैथिली सिनेमाक इतिहास’ केँ भेटत प्रसिद्ध साइनसिने अवार्ड ई सूचना सृजनकर्म मे निरन्तरता बनेनिहार सब स्रष्टा केँ त प्रसन्नता देबे करत, एकर सकारात्मक आ सार्थक सन्देश समस्त मैथिलीभाषी व मिथिलावासी केँ विशेष रूप सँ आह्लादित करत से हमरा विश्वास अछि। अपन कर्तव्यपथ मैथिली सिनेमाक इतिहास – ऐतिहासिक पोथी केँ भेटत ‘साइनसिने अवार्ड’