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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः इंद्र केर श्री रामजीक वास्ते रथ पठायब, राम-रावण युद्ध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती इंद्र केर श्री रामजीक वास्ते रथ पठायब, राम-रावण युद्ध पैछला अध्याय मे राम-रावण युद्ध निरन्तरता मे आगू…. १. देवता लोकनि प्रभु श्री रामजी केँ पैदले (बिना सवारीक युद्ध करैत) देखलनि त हुनका सभक हृदय मे भारी क्षोभ (दुःख) भेलनि। फेर कि छल! इंद्र तुरन्त अपन रथ पठा देलथि। रामचरितमानस मोतीः इंद्र केर श्री रामजीक वास्ते रथ पठायब, राम-रावण युद्ध

रामचरितमानस मोतीः षष्ठ सोपान- रावण मूर्च्छा, रावण यज्ञ विध्वंस, राम-रावण युद्ध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती षष्ठ सोपान- रावण मूर्च्छा, रावण यज्ञ विध्वंस, राम-रावण युद्ध १. रावण द्वारा सन्धान कयल शक्तिबाण सँ लक्ष्मणजी मूर्च्छित भ’ गेल छथि। ई देखि पवनपुत्र हनुमान्‌जी कठोर वचन कहैत दौड़लाह। हनुमान्‌जी केँ अबिते रावण हुनका पर भयंकर मुक्काक प्रहार कयलक। हनुमान्‌जी ठेहुने बले बैसि गेलाह, पृथ्वी पर खसलाह धरि रामचरितमानस मोतीः षष्ठ सोपान- रावण मूर्च्छा, रावण यज्ञ विध्वंस, राम-रावण युद्ध

उग्रतारा महोत्सव मे नेपालक मिथिला सँ विद्वान् व्याख्याता लोकनिक सहभागिता

२१ अक्टूबर २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! प्रत्येक वर्ष होयबला उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव मे विद्वत् विमर्श कार्यक्रम अनिवार्य रूप सँ राखल जाइछ। एहि मे पूरे भारत सँ विद्वान् सब अबैत छथि आ विभिन्न महत्वपूर्ण विषय पर विचार रखैत छथि। एहि वर्ष नेपालक मिथिला सँ सेहो विद्वान् लोकनि केँ आमंत्रित कयल गेलन्हि। एहि मादे सहभागी विद्वान् परमेश्वर उग्रतारा महोत्सव मे नेपालक मिथिला सँ विद्वान् व्याख्याता लोकनिक सहभागिता

रामचरितमानस मोतीः लक्ष्मण-रावण युद्ध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती लक्ष्मण-रावण युद्ध १. अपन सेना केँ व्याकुल देखि डाँर्ह मे तरकस कसि आ हाथ मे धनुष लयकय श्री रघुनाथजीक चरण पर मस्तक नमाकय लक्ष्मणजी क्रोधित भ’ कय चलि पड़लाह। लक्ष्मणजी लग जाकय कहलखिन – अरे दुष्ट! बानर भालु केँ कियैक मारि रहल छँ? हमरा देख, हम तोहर काल रामचरितमानस मोतीः लक्ष्मण-रावण युद्ध

रामचरितमानस मोतीः युद्ध लेल रावणक प्रस्थान आ श्री रामजीक विजयरथ एवं बानर-राक्षस केर युद्ध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती युद्ध लेल रावणक प्रस्थान आ श्री रामजीक विजयरथ एवं बानर-राक्षस केर युद्ध पैछला अध्याय मे पुत्र मेघनादक वध आ शोक केर स्थितिक वर्णन छल आ अन्त मे रावण स्वयं युद्ध लेल प्रस्थान करबाक निर्णय कयलक, रथ सजौलक, हजारों अपशकुन भ’ रहल छैक लेकिन ताहि सब बातक ओकरा कोनो रामचरितमानस मोतीः युद्ध लेल रावणक प्रस्थान आ श्री रामजीक विजयरथ एवं बानर-राक्षस केर युद्ध

नवरात्रक सुअवसर मिथिलाक समस्त पत्नी लोकनि केँ समर्पित

सत्संग टा फल बाकी सबटा फूल   राति एकटा कथा पढ़लहुँ ‘कल्याण’ मे। भक्त जलारामजीक कथा। (अहाँ सब सेहो पढ़ि सकैत छीः https://maithilijindabaad.com/?p=21132) एहि कथा मे भक्तक भक्तिक बात पढ़बाक संग-संग किछु महत्वपूर्ण सिद्धान्तक बात सेहो पढ़य लेल भेटल। आध्यात्मिक तथ्य-तत्त्व स्वाभाविके गूढ़ भेल करैत छैक, ओ किछु लोक बुझत बेसी नहिये बुझत। मुदा एकटा नवरात्रक सुअवसर मिथिलाक समस्त पत्नी लोकनि केँ समर्पित

रामचरितमानस मोतीः मेघनाद यज्ञ विध्वंस, युद्ध आर मेघनाद उद्धार

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती मेघनाद यज्ञ विध्वंस, युद्ध आर मेघनाद उद्धार १. मेघनादक मूर्च्छा हंटल आ पिता (रावण) केँ सोझाँ देखलक त बड़ा लजा गेल। “हम अजय यज्ञ करब”, एना मोन मे निश्चय कय ओ तुरन्त श्रेष्ठ पर्वतक गुफा मे चलि गेल। एम्हर विभीषण ई बुझलनि त सलाह विचारिकय श्री रामचंद्रजी सँ रामचरितमानस मोतीः मेघनाद यज्ञ विध्वंस, युद्ध आर मेघनाद उद्धार

सन्त चरितः भक्त जलारामजीक पठनीय-मननीय-अनुकरणीय कथा

भक्त जलारामजी (शास्त्री श्रीमंगलजी उद्भवजी पुरोहित) संत-चरित – साभारः कल्याण, वर्ष ९२, संख्या ४ गङ्गा पापं शशी तापं दैन्यं कल्पतरुस्तथा। पापं तापं च दैन्यं च घ्‌नन्ति सन्तो महाजनाः॥ ‘गंगा पाप, चन्द्रमा संताप तथा कल्पवृक्ष दरिद्रताक नाश करैत अछि अर्थात् ई सबटा एक-एक विषयक नाशक थिक; मुदा सन्त-महापुरुष पाप, ताप आ दारिद्र्‌य – तीनू केर एक्कहि सन्त चरितः भक्त जलारामजीक पठनीय-मननीय-अनुकरणीय कथा

रामचरितमानस मोतीः मेघनादक युद्ध, रामजीक लीला सँ नागपाश मे बन्हेनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती मेघनादक युद्ध, रामजीक लीला सँ नागपाश मे बन्हेनाय १. मेघनाद पूर्वोक्त मायामय रथ पर चढ़िकय आकाश मे चलि गेल आ अट्टहास करैत तेना गरजल जे बानरक सेना मे भय पसरि गेलैक। ओ शक्ति, शूल, तलबार, कृपाण आदि अस्त्र, शस्त्र व वज्र आदि बहुतो तरहक आयुध चलाबैछ तथा फरसा, परिघ, रामचरितमानस मोतीः मेघनादक युद्ध, रामजीक लीला सँ नागपाश मे बन्हेनाय

रामचरितमानस मोतीः कुंभकर्ण युद्ध आ ओकरा परमगति

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती कुंभकर्ण युद्ध आ ओकरा परमगति कुंभकर्ण द्वारा भाइ विभीषण केँ श्री रामजीक संग अयबाक व हुनकर भजन करैत रहबाक स्वस्ति आ सराहना कय आगू अपन युद्ध संकल्प कहि भाइ सँ सोझाँ सँ हंटि जेबाक अनुरोध नहि त ओ भाइ या केकरो युद्ध मे शत्रु मात्र मानत से भावना रामचरितमानस मोतीः कुंभकर्ण युद्ध आ ओकरा परमगति