सत्चिन्तनः दुर्गा पाठक तत्क्षण लाभ केना भेटैछ
सत्चिन्तनः दुर्गापाठ केर लोक-प्रासंगिकता (सन्दर्भ उत्तर चरित्र – महासरस्वतीक प्रीति-प्रसन्नता लेल सत्चिन्तन) असुर सभक उत्पात बढ़ि गेला पर देवलोक मे हड़कम्प मचि जाइछ । एहिना भेल छल जखन शुम्भ आ निशुम्भ नाम्ना दुइ असुर केर प्रकोप बढ़ि गेल । इन्द्रक गद्दी छिना गेलनि । इन्द्रक हाथ सँ तीनू लोकक राज्य आ यज्ञभाग छिना गेलनि । … सत्चिन्तनः दुर्गा पाठक तत्क्षण लाभ केना भेटैछ









