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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः घोर युद्ध आ रावणक मुर्च्छा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती घोरयुद्ध आ रावणक मूर्च्छा प्रसंग रावणक माया सँ प्रकट अनेकों रावण केँ देखि देवता सभक डरेनाय आ श्री राम द्वारा एक्कहि बाण सँ ओहि माया केँ खंडित कयनाय, ताहि समय देवता सब श्री रामजीक स्तुति कय रहल छलथि – ताहि पर ओ एक्के गोट रावण देवता लेल बड रामचरितमानस मोतीः घोर युद्ध आ रावणक मुर्च्छा

रामचरितमानस मोतीः रावण-हनुमान्‌ युद्ध, रावण केर माया रचब, रामजी द्वारा माया नाश

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती रावण-हनुमान्‌ युद्ध, रावण केर माया रचब, रामजी द्वारा माया नाश रावण-विभीषण युद्ध केर प्रसंग निरन्तरता मे…. १. विभीषण रावण सँ लड़ैत रहलाह। हुनका बहुते थाकल देखि हनुमान्‌जी पर्वत धारण कय रावण पर टूटि पड़लाह। ओहि पर्वत सँ रावणक रथ, घोड़ा आर सारथीक संहार कय देलनि। रावणक सीना पर रामचरितमानस मोतीः रावण-हनुमान्‌ युद्ध, रावण केर माया रचब, रामजी द्वारा माया नाश

उद्देश्य सर्वकल्याण आ व्यवहार मे अहंताक प्रदर्शन – पूजापाठ व शक्ति आराधना मे आबि रहल विकृति

पूजापाठ मे हकार के महत्व पूजा-अर्चना करनिहार समूचा गाम केँ हकार देल करैत अछि। “आइ सत्यनारायण भगवानक पूजा अछि, स्त्रीगणे-पुरखे हकार अछि” – यैह वाक्य बच्चा सँ सुनैत आयल छी। आर बेसी पूजापाठ केर आयोजन कम्मे देखलियैक, लेकिन सत्यनारायण भगवानक पूजा नियमित रूप सँ हरेक पूर्णिमा, संक्राति व कतहु-कतहु विशेष अवसर यथा घरबास, मुड़न, उपनयन, उद्देश्य सर्वकल्याण आ व्यवहार मे अहंताक प्रदर्शन – पूजापाठ व शक्ति आराधना मे आबि रहल विकृति

रामचरितमानस मोतीः रावण द्वारा विभीषण पर शक्ति छोड़ब, रामजी द्वारा ताहि शक्ति केँ अपना उपर लेब, विभीषण-रावण युद्ध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती रावण द्वारा विभीषण पर शक्ति छोड़ब, रामजी द्वारा ताहि शक्ति केँ अपना उपर लेब, विभीषण-रावण युद्ध श्री राम-रावण युद्ध निरन्तरता मे – १. रावण क्रोधित भ’ कय प्रचण्ड शक्ति छोड़ल। ओ विभीषणक सामने एना चलल जेना काल (यमराज) केर दण्ड हो। अत्यन्त भयानक शक्ति केँ अबैत देखि आर रामचरितमानस मोतीः रावण द्वारा विभीषण पर शक्ति छोड़ब, रामजी द्वारा ताहि शक्ति केँ अपना उपर लेब, विभीषण-रावण युद्ध

रामचरितमानस मोतीः इंद्र केर श्री रामजीक वास्ते रथ पठायब, राम-रावण युद्ध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती इंद्र केर श्री रामजीक वास्ते रथ पठायब, राम-रावण युद्ध पैछला अध्याय मे राम-रावण युद्ध निरन्तरता मे आगू…. १. देवता लोकनि प्रभु श्री रामजी केँ पैदले (बिना सवारीक युद्ध करैत) देखलनि त हुनका सभक हृदय मे भारी क्षोभ (दुःख) भेलनि। फेर कि छल! इंद्र तुरन्त अपन रथ पठा देलथि। रामचरितमानस मोतीः इंद्र केर श्री रामजीक वास्ते रथ पठायब, राम-रावण युद्ध

रामचरितमानस मोतीः षष्ठ सोपान- रावण मूर्च्छा, रावण यज्ञ विध्वंस, राम-रावण युद्ध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती षष्ठ सोपान- रावण मूर्च्छा, रावण यज्ञ विध्वंस, राम-रावण युद्ध १. रावण द्वारा सन्धान कयल शक्तिबाण सँ लक्ष्मणजी मूर्च्छित भ’ गेल छथि। ई देखि पवनपुत्र हनुमान्‌जी कठोर वचन कहैत दौड़लाह। हनुमान्‌जी केँ अबिते रावण हुनका पर भयंकर मुक्काक प्रहार कयलक। हनुमान्‌जी ठेहुने बले बैसि गेलाह, पृथ्वी पर खसलाह धरि रामचरितमानस मोतीः षष्ठ सोपान- रावण मूर्च्छा, रावण यज्ञ विध्वंस, राम-रावण युद्ध

उग्रतारा महोत्सव मे नेपालक मिथिला सँ विद्वान् व्याख्याता लोकनिक सहभागिता

२१ अक्टूबर २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! प्रत्येक वर्ष होयबला उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव मे विद्वत् विमर्श कार्यक्रम अनिवार्य रूप सँ राखल जाइछ। एहि मे पूरे भारत सँ विद्वान् सब अबैत छथि आ विभिन्न महत्वपूर्ण विषय पर विचार रखैत छथि। एहि वर्ष नेपालक मिथिला सँ सेहो विद्वान् लोकनि केँ आमंत्रित कयल गेलन्हि। एहि मादे सहभागी विद्वान् परमेश्वर उग्रतारा महोत्सव मे नेपालक मिथिला सँ विद्वान् व्याख्याता लोकनिक सहभागिता

रामचरितमानस मोतीः लक्ष्मण-रावण युद्ध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती लक्ष्मण-रावण युद्ध १. अपन सेना केँ व्याकुल देखि डाँर्ह मे तरकस कसि आ हाथ मे धनुष लयकय श्री रघुनाथजीक चरण पर मस्तक नमाकय लक्ष्मणजी क्रोधित भ’ कय चलि पड़लाह। लक्ष्मणजी लग जाकय कहलखिन – अरे दुष्ट! बानर भालु केँ कियैक मारि रहल छँ? हमरा देख, हम तोहर काल रामचरितमानस मोतीः लक्ष्मण-रावण युद्ध

रामचरितमानस मोतीः युद्ध लेल रावणक प्रस्थान आ श्री रामजीक विजयरथ एवं बानर-राक्षस केर युद्ध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती युद्ध लेल रावणक प्रस्थान आ श्री रामजीक विजयरथ एवं बानर-राक्षस केर युद्ध पैछला अध्याय मे पुत्र मेघनादक वध आ शोक केर स्थितिक वर्णन छल आ अन्त मे रावण स्वयं युद्ध लेल प्रस्थान करबाक निर्णय कयलक, रथ सजौलक, हजारों अपशकुन भ’ रहल छैक लेकिन ताहि सब बातक ओकरा कोनो रामचरितमानस मोतीः युद्ध लेल रावणक प्रस्थान आ श्री रामजीक विजयरथ एवं बानर-राक्षस केर युद्ध

नवरात्रक सुअवसर मिथिलाक समस्त पत्नी लोकनि केँ समर्पित

सत्संग टा फल बाकी सबटा फूल   राति एकटा कथा पढ़लहुँ ‘कल्याण’ मे। भक्त जलारामजीक कथा। (अहाँ सब सेहो पढ़ि सकैत छीः https://maithilijindabaad.com/?p=21132) एहि कथा मे भक्तक भक्तिक बात पढ़बाक संग-संग किछु महत्वपूर्ण सिद्धान्तक बात सेहो पढ़य लेल भेटल। आध्यात्मिक तथ्य-तत्त्व स्वाभाविके गूढ़ भेल करैत छैक, ओ किछु लोक बुझत बेसी नहिये बुझत। मुदा एकटा नवरात्रक सुअवसर मिथिलाक समस्त पत्नी लोकनि केँ समर्पित