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प्रवीण नारायण चौधरी

डा. काञ्चीनाथ झा किरण केँ शब्द-श्रद्धाञ्जलि दैत ‘केके’ एवं ‘ईशनाथ’ – किरण पुण्यतिथि विशेष

अप्रैल १०, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हि ९ अप्रैल डा. काञ्चीनाथ झा किरण केर पुण्यतिथि पर किरणक डीह धर्मपुर (उजान) मे “किरण मैथिली साहित्य शोध संस्थान”क तत्वावधानमे ‘किरण स्मृति समारोह’ केर आयोजन कयल गेल । ‘किरण पुरस्कार’ सँ सम्मानित कएल गेलाह मैथिलीक चर्चित साहित्यकार सुभाष चंद्र यादव तथा एहि मे गणमान्य मातृभाषासेवी जे अपन गरिमामय उपस्थितिसँ अभिभूत केलथि 1. डॉ. डा. काञ्चीनाथ झा किरण केँ शब्द-श्रद्धाञ्जलि दैत ‘केके’ एवं ‘ईशनाथ’ – किरण पुण्यतिथि विशेष

मैथिल समाज रहिकाक मिथिला विभूति समारोह, साहित्यकार-समाजसेवीकेँ विभिन्न सम्मान

रहिका, मधुबनी। अप्रैल १०, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! विश्व भरिक मैथिल समाज मे अपन भाषा, साहित्य, संस्कृतिक संग-संग ऐतिहासिकता तथा मूल्यवान् परंपरा केँ जियाकय रखबाक युयुक्षा सर्वविदिते अछि, एहि क्रम मे पिछला कतेको वर्ष सँ मधुबनी जिलाक प्रसिद्ध गाम रहिका मे मैथिल समाज रहिका द्वारा हरेक वर्ष भव्यताक संग मिथिला विभूति पर्व समारोह मनबैत विभिन्न साहित्यिक-सांस्कृतिक मैथिल समाज रहिकाक मिथिला विभूति समारोह, साहित्यकार-समाजसेवीकेँ विभिन्न सम्मान

दिव्यांग लड़का सँ सुन्दरी लड़की केलक प्रेम विवाह, समुचा इलाका मे चर्चाक विषय बनल

साभारः ब्रहम साह, सिरहा, नेपाल केर फेसबुक रिपोर्ट – हम सब मैथिल छी ग्रुप सँ चयनित समाचार हीर राँझा, लैला मजनुक बाद याद राखू ई प्रेमी जोड़ी केँ जे मिति २०७४ साल चैत २५ गतेक दिन मोहनपुर निवासी साह परिवार सँ ई सुन्दर लड़की और भगवानपुर २ नहरा रिगौल निवासी पासवान परिवार सँ ई अपांग दिव्यांग लड़का सँ सुन्दरी लड़की केलक प्रेम विवाह, समुचा इलाका मे चर्चाक विषय बनल

कोशी परिसर मे साहित्यक समकाल – सहरसा मे भेल राग-रंगक एक दिवसीय आयोजन

सुभाषचन्द्र झा, सहरसा। 8 अप्रैल, 2018। मैथिली जिन्दाबाद!!   आइ ‘राग-रंग’ (सहरसा) द्वारा ‘साहित्य-चर्चा सह कविता-पाठ’ कार्यक्रम आयोजित कयल गेल। पछिला एक वर्ष सँ सहरसाक मैथिलीक साहित्यिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय ‘राग-रंग’क ई आयोजन मैथिलीक नव रचनाकार लोकनिक सम्मान मे राखल गेल छल। साहित्य-चर्चाक विषय छल – ‘सहरसा (कोसी) परिसर मे साहित्यक समकाल’। डॉ रामचैतन्य धीरज कोशी परिसर मे साहित्यक समकाल – सहरसा मे भेल राग-रंगक एक दिवसीय आयोजन

मैथिल कथा – हमहुँ आब दिल्लिये रहब….

हमहुँ आब दिल्लिये रहब….   “अरे! तूँ ततेक बिजी छँ अरविन्दा?”   “कि कहियौ दोस! दिल्ली छियैक न। प्राइवेट नौकरी मे समय पर औफिस, फेर ओतय सँ घर – भोरे उठू त औफिस के तैयारी, औफिस जाय मे घर सँ मेट्रो धरिक लिंक बस मे आधा घंटा…. जाम भेल त १ घंटा…. फेर मेट्रो केर मैथिल कथा – हमहुँ आब दिल्लिये रहब….

कि आइ धरि हम मिथिलावासी चाकरी-चापलूसी रवैया सँ ऊपर उठि सकल छी?

बहस   १९५५ ई. मे अपन पोथी ‘द नार्दर्न बोर्डर’ मे महान् विद्वान् तथा राष्ट्रसेवक – भारतीय स्वतंत्रताक अगाध सेनानी डा. लक्ष्मण झा लिखने छथिः   हम सब मिथिला मे सड़ल-गलल लोक थिकहुँ। ई सड़न हमरा सभक अभावक जीवनस्तर तथा दुनू ब्रिटिश या काँग्रेस द्वारा अपनायल गेल शासन नीति (शासक) प्रति हमरा सभक रवैया सँ कि आइ धरि हम मिथिलावासी चाकरी-चापलूसी रवैया सँ ऊपर उठि सकल छी?

नेपालक राजधानी काठमांडू तक पहुँचत रेल सम्पर्क – भारतीय समुद्र धरि जलमार्ग सम्पर्क सेहो

नई दिल्ली, ७ अप्रैल, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! नेपालक प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद ओलीक औपचारिक भारत भ्रमण मे आइ समकक्षी भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संग संयुक्त प्रेस ब्रिफिंग संपन्न भेल अछि । नेपाली प्रधानमंत्री जतय भारत केँ सबसँ महत्वपूर्ण मित्रराष्ट्र मानैत नेपालक वर्तमान केँ ‘समृद्ध नेपाल, सुखी नेपाली’ नारा मे चिर सहयोगीक भूमिका निभेबाक अपेक्षा जतेलनि, ताहि नेपालक राजधानी काठमांडू तक पहुँचत रेल सम्पर्क – भारतीय समुद्र धरि जलमार्ग सम्पर्क सेहो

नारी शक्ति मे मूल आ मौलिकता सँ वितृष्णा मिथिलाक लेल खतरनाक संकेत

जागू मैथिली जागू! मिथिलाक नारी नहि छथि बेचारी!!   मिथिलाक कथित शिक्षित आ सम्भ्रान्त नारी-शक्ति मे आत्मविश्वास कतहु न कतहु एकदम बदतर ढंग सँ प्रभावित भेल देखाएत अछि। पहिने अशिक्षा आ परंपरावादिता हावी भेलाक कारण अलग स्थिति छलैक। घोघ प्रथा छलैक, चौखटिक बाहर ओ सब पैरो नहि राखि सकैत छलीह। धीरे-धीरे शिक्षा आ संस्कृति मे नारी शक्ति मे मूल आ मौलिकता सँ वितृष्णा मिथिलाक लेल खतरनाक संकेत

तनुजाक ‘रोचक संस्मरण’ मे काज कयनिहाइर पिंकी संग मधुबनीक भेंट

कथा-संस्मरण – तनुजा दत्ता साल भरिक बाद सासुर जेबाक मौका भेटल । गेला पर सब किछ बदलल-बदलल बुझाइत रहय । कमेनहाइर सेहो बदलि गेल छलीह । ‎….. ‘भाभी! अहाँ सब बच्चा केँ ल क छत पर जाउ, हम बर्तन माँजि दय छी’ ई हमर ननदि के स्वर छलैन्ह । हम कहलियन्हि ‘कियैक से किरण नहिं तनुजाक ‘रोचक संस्मरण’ मे काज कयनिहाइर पिंकी संग मधुबनीक भेंट

द्वादश ज्योतिर्लिंगः मल्लिकार्जुन – दक्षिणक कैलाश केर पौराणिक आ लौकिक स्वरूप

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग – पौराणिक आ लौकिक स्वरूप आन्ध्र प्रदेश केर कृष्णा ज़िला मे कृष्णा नदी केर तट पर श्रीशैल पर्वत पर श्रीमल्लिकार्जुन विराजमान छथि। एकरा लोक दक्षिणक कैलाश कहैत छैक। अनेकों धर्मग्रन्थ सभमे एहि स्थानक महिमा कहल गेल अछि। महाभारतक अनुसार श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव केर पूजन कयला सँ अश्वमेध यज्ञ करबाक फल प्राप्त द्वादश ज्योतिर्लिंगः मल्लिकार्जुन – दक्षिणक कैलाश केर पौराणिक आ लौकिक स्वरूप