Search

प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड आठम अध्याय – जटायुक मृत्यु

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड आठम अध्याय जटायुक मृत्यु ।रूपमाला। कपट – मृग मारीच मारल, घुरल घर रघुराय ॥१॥ देखल अबइत दूरसौँ, मन-विकल लक्ष्मण भाय ॥२॥ कयल लीला सकल अपनहिँ, करथि अपनहिँ शोच ॥३॥ ई मनुष्य – चरित्र विस्तृत, करथि लोकक रोच ॥४॥ त्यागि कैँ प्राणेशि अयलहुँ, वत्स कहु की काज मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड आठम अध्याय – जटायुक मृत्यु

किशोर अनुवादक विमर्श झा द्वारा ‘नहि सीता नहि’ केर अंग्रेजी अनुवाद ‘क्राई नो मोर सीता’पर अन्तर्क्रिया

विजेता कर्ण, काठमांडू। ८ जून २०२४, मैथिली जिन्दाबाद!! समाचार स्रोतः राष्ट्रीय समाचार समिति (रासस) काठमांडू – जेठ २४ । मैथिली साहित्यक किशोर अनुवादक विमर्श झाक कृतिपर अन्र्तक्रिया मैथिली साहित्यक सबसँ कम उमेरक अनुवादक विमर्श झाद्वारा अंग्रेजीमे अनुदित ‘क्राइ नो मोर सीता’ कविता संग्रहपर अन्तर्क्रिया कयल गेल । काठमांडूमे आयोजित एक कार्यक्रममध्य मूल मैथिलीमे रहल कवयित्री किशोर अनुवादक विमर्श झा द्वारा ‘नहि सीता नहि’ केर अंग्रेजी अनुवाद ‘क्राई नो मोर सीता’पर अन्तर्क्रिया

मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड सातम अध्याय – रावण द्वारा सीताक हरण

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड सातम अध्याय रावण द्वारा सीताक हरण ।चौपाइ। राम बुझल दशवदन – प्रपञ्च । वैदेहीकेँ कहलनि शञ्च ॥१॥ अहँ एक माया – देह बनाउ । कुटी – मध्य कल कौशल जाउ ॥२॥ एक वर्ष रहु अग्नि समाय । पुन आयब लेब सङ्ग लगाय ॥३॥ रावण मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड सातम अध्याय – रावण द्वारा सीताक हरण

मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड छठम अध्याय – रावणक मारीच लग गेनाय आ मारीचक माया-मृग रूप धारण कयनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड छठम अध्याय रावणक मारीच लग गेनाय आ मारीचक माया-मृग रूप धारण कयनाय ।चौपाइ। रथमे जोड़ घोड़ बड़ जोर । चलल दशानन चिन्तित भोर ॥१॥ जत मारीच समुद्रक पार । पहुँचलाह सत्वर अविचार ॥२॥ छल समाधि-गत ओ मारीच । से न जान जग ऊँच कि नीच ॥३॥ मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड छठम अध्याय – रावणक मारीच लग गेनाय आ मारीचक माया-मृग रूप धारण कयनाय

मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड अध्याय पाँचम – सूर्पनखाक नाक-कान काटल जायब आ खर-दूषणक बध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अरण्यकाण्ड – अध्याय पाँच सूर्पनखाक नाक-कान काटल जायब, खर-दूषण केर बध ।चौपाइ। पञ्चवटी गोदावरि कात । आइलि सूर्पनखा उत्पात ॥१॥ कमल कुलिश अंकुश पद – रेख । अङ्कित अवनि रमनि से देख ॥२॥ जनु जगतीपति कयल निवास । सूर्पनखा मन काम विलास ॥३॥ गौलि कुटीतट गमयित मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड अध्याय पाँचम – सूर्पनखाक नाक-कान काटल जायब आ खर-दूषणक बध

मिथिला सौन्दर्य प्रतियोगिताक आयोजक द्वारा सामुहिक रक्तदान जनकपुर मे सम्पन्न भेल

अनुज मिश्र, जनकपुर। २ जून २०२४ । मैथिली जिन्दाबाद। ‘मिथिला सौन्दर्य प्रतियोगिता’ केर आयोजक संस्था पीआरजेड ग्रुप द्वारा रक्तदान कार्यक्रम सम्पन्न भेल । ३१ मई, शुक्र दिन पि आर जेड र इभेन्ट कम्पनी प्रा. लि. द्वारा आयोजित रक्तदान कार्यक्रम जनकपुरक सेभलाइफ हस्पिटल एण्ड रिसर्च सेन्टर मे सम्पन्न भेल अछि । कार्यक्रम मे ३६ गोटे सहभागी मिथिला सौन्दर्य प्रतियोगिताक आयोजक द्वारा सामुहिक रक्तदान जनकपुर मे सम्पन्न भेल

सीताजीक कलियुगी वकील सभक लेल प्रवीण विचार

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी सीताजीक कलियुगी वकील   अक्सर देखय मे अबैत अछि जे सीताजीक अग्नि-परीक्षा, सीताजी पर अनावश्यक शंका आ लोकनिन्दा, राजा रामचन्द्र द्वारा पत्नीरूपी सीताक गर्भवती अवस्था मे परित्याग, पुनः धर्म-कर्म मे सीताजीक स्थान पर मूर्तिरूपी सीताक प्रयोग कय कर्मकाण्ड पूरा करबाक उद्धरण, लव-कुश द्वारा स्वयं केँ श्री रामचन्द्र केर पुत्र रूप सीताजीक कलियुगी वकील सभक लेल प्रवीण विचार

मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड चारिम अध्याय – रामजीक जटायु सँ भेंट तथा लक्ष्मणजी केँ ज्ञानोपदेश

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अरण्यकाण्ड – चारिम अध्याय रामजीक जटायु सँ भेंट तथा लक्ष्मणजी केँ ज्ञानोपदेश  ।चौपाइ। शैलशृङ्ग सम सन एकटा गृद्ध । देखलनि राम बाट पर वृद्ध ॥१॥ मुनि – भक्षक राक्षस सन लाग । असुआयल अछि तैँ नहि जाग ॥२॥ लक्ष्मण धनुष हाथ कय देब । चटपट प्राण मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड चारिम अध्याय – रामजीक जटायु सँ भेंट तथा लक्ष्मणजी केँ ज्ञानोपदेश

मई महिना मानसिक स्वास्थ्य प्रति जागरुकताक महिना मानल जाइछः मनोपरामर्शदात्री ज्योति झा

स्वास्थ्य सचेतना – ज्योति झा, मनोपरामर्शदात्री, काठमांडू मई महीना मानसिक स्वास्थ्य जागरुकताक महीना सन् १९४९ सँ अंग्रेजी महीना मई केँ मानसिक स्वास्थ्य जागरुकताक महीना मानल जाइत अछि। एकर शुरुआत मेन्टल हेल्थ अमेरिका द्वारा कयल गेल। एकर मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्यक बारे उपयोगी जानकारीक प्रसार, समाज मे व्याप्त मानसिक समस्या प्रति विभिन्न नकारात्मक सोच सब न्यून मई महिना मानसिक स्वास्थ्य प्रति जागरुकताक महिना मानल जाइछः मनोपरामर्शदात्री ज्योति झा

मूल भाषा सँ कहियो नहि भटकू

सम्पादकीय मूल भाषा सँ कहियो नहि भटकू अपन मूल पहिचान सँ दूर होयब आजुक फैशन बनि गेल अछि। स्वयं अपन भाषाक प्रयोग करय मे लज्जाबोध अथवा हीनताबोध अपूर्ण ज्ञान आ जीवन मे भटकल लक्ष्य रखबाक एक तरहक बीमारीक लक्षण होइछ। परञ्च बेसी लोक एहि तरहक नकारात्मकताक शिकार परिवेश आ परिस्थितिक कारण भ’ गेल करैत अछि। मूल भाषा सँ कहियो नहि भटकू