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प्रवीण नारायण चौधरी

समूह एक गतिविधि अनेकः दहेज मुक्त मिथिला – एहि सप्ताह

सोशल मीडिया आ मैथिली-मिथिला – कीर्ति नारायण झा [फेसबुक समूह दहेज मुक्त मिथिला आ ओकर गतिविधि पर साहित्यकार कीर्ति नारायण झा केर साप्ताहिक समीक्षा काफी गम्भीर व महत्वपूर्ण होइत आबि रहल अछि। मैथिली जिन्दाबाद केर पाठक लेल श्री झा द्वारा कयल जा रहल समीक्षा एतय प्रत्येक शनि केँ राखल जायत। ‍- सम्पादक] १० दिसम्बर २०२२ – समूह एक गतिविधि अनेकः दहेज मुक्त मिथिला – एहि सप्ताह

रामचरितमानस मोतीः श्रीराम-लक्ष्मण संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम-लक्ष्मण संवाद १. जखन लक्ष्मणजी ई समाचार पेलनि जे श्री रामजी वनगमन करता त ओ बहुत व्याकुल भ’ उदास मुँहे उठि दौड़लाह। शरीर काँपि रहल छन्हि, रोमांचित सेहो भ’ रहल छन्हि, आँखि मे नोर भरि गेल छन्हि… प्रेम सँ अत्यन्त अधीर भ’ ओ श्री रामजीक चरण पकड़ि रामचरितमानस मोतीः श्रीराम-लक्ष्मण संवाद

१७ दिसम्बर केँ पटना मे देल जायत वैदेही सम्मान: अनुपम मुहिम के अनुपम डेग

९ दिसम्बर २०२२, मैथिली जिन्दाबाद!! मेन्सट्रुअल हाईजिन टार्गेट (अनुपम मुहिम) सँ प्रसिद्ध अभियानक संचालिका सह सामाजिक-राजनीतिक नेतृ अनुपम झा जनतब दैत कहली जे आगामी १७ दिसम्बर २०२२ केँ पटनाक विद्यापति भवन मे “वैदेही सम्मान” वितरण करबाक संग मैथिली भाषा ओ मिथिला संस्कृतिक संवर्धनक निमित्त बिहारक राजधानी मे सांस्कृतिक आयोजन कयल जायत। एहि कार्यक्रमक भूमिका एकर १७ दिसम्बर केँ पटना मे देल जायत वैदेही सम्मान: अनुपम मुहिम के अनुपम डेग

पिताक सीखः अपना सँ उपर देखब त घेंट नमड़ि जायत

पिताक सीख – प्रवीण नारायण चौधरी पिता प्रति समर्पित ई एक लेख…. हे पिता, हम अपन बौद्धिक सामर्थ्य सँ कखनहुँ अहाँक आदर्श पथ सँ विचलित नहि होइ एतबा चाहैत छी। हमर अपन जीवन मे अहाँक सिखायल मार्ग मात्र काज आबि रहल अछि। ओना त सम्पूर्ण मानव संसार सामाजिक प्राणीक रूप मे हमेशा एक-दोसर सँ जुड़ियेकय पिताक सीखः अपना सँ उपर देखब त घेंट नमड़ि जायत

सन्देशमूलक कथाः जबानी मे कुतिया सेहो हसीन होइछ

कथा – प्रवीण नारायण चौधरी जबानी मे कुतिया भी हसीन वला कथा हमर एकटा काकी खौंझाकय कहल करथि, “जबानी मे कुतिया भी हसीन लगती है रे बेटा…. कर जे मोन होइत छौक, बाद मे अपने बुझबिहिन।” ई बात ओ तखन कहथिन जखन हम किछु बेसिये अपना केँ एडवान्स देखेबाक चक्कर मे कहियनि जे हमरा अपन सन्देशमूलक कथाः जबानी मे कुतिया सेहो हसीन होइछ

महत्वपूर्ण पोथीः गीता-दर्पण

पोथी परिचय गीताप्रेस सँ प्रकाशित अछि – गीता-दर्पण। एकर लेखक छथि सुप्रसिद्ध स्वामी रामसुखदास। एखन धरि अनेकों संस्करण प्रकाशित भ’ चुकल अछि। लाखों प्रति आ करोड़ों पाठक द्वारा पढ़ल जा चुकल अछि ई पोथी। एहि मे गीताक व्यावहारिक उपयोगिता पर हम मानव समुदाय लेल समुचित सन्देश लिखल गेल अछि। मैथिली जिन्दाबाद पर सम्पादक प्रवीण नारायण महत्वपूर्ण पोथीः गीता-दर्पण

बिहारक सब जिलाक सदर अस्पताल मे खुजत आईसीयू तथा एकीकृत जाँच केन्द्र

पटना, ९ दिसम्बर २०२२ । मैथिली जिन्दाबाद!! बिहारक प्रत्येक जिलान्तर्गत रहल सदर अस्पताल मे बनत ५० बेडक आईसीयू तथा लैबरेटरी आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन अन्तर्गत बिहार के प्रत्येक जिला मे स्थित सदर अस्पताल मे ५० बेड के सघन उपचार केन्द्र तथा एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला के निर्माण करायल जायत। ई काज पटना एम्स तथा बिहारक सब जिलाक सदर अस्पताल मे खुजत आईसीयू तथा एकीकृत जाँच केन्द्र

रामचरितमानस मोतीः श्री सीता एवं श्री राम के बीच वनगमन पूर्व के अद्भुत संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्रीसीता-राम संवाद श्री सीता-राम संवाद १. माताक सामने सीताजी सँ किछु कहय मे लजाइत छथि श्री रामजी। मुदा मनहि-मन ई बुझि जे ई समइये एहेन अछि… ओ बजलाह – “हे राजकुमारी! हमर सिखावन सुनू। मन मे किछु दोसर तरहें नहि बुझि लेब। जँ अपन आ हमर भलाई चाहैत रामचरितमानस मोतीः श्री सीता एवं श्री राम के बीच वनगमन पूर्व के अद्भुत संवाद

रामचरितमानस मोतीः श्रीराम द्वारा माता कौसल्या सँ वनगमन लेल आशीर्वाद मांगब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम-कौसल्या संवाद १. अयोध्याक समस्त नारी-पुरुष श्रीराम प्रति वनगमनक आदेश सँ अत्यन्त विषाद मे पड़ि गेल अछि। स्वामी श्री रामचंद्रजी माता कौसल्या लग पहुँचलथि। एहि समय हुनकर मुखमंडल पर प्रसन्नताक आभा स्पष्ट छन्हि। चित्त मे उत्साह चौगुना बढ़ि गेल छन्हि। ईहो चिन्ता मेटा गेल छन्हि जे कहुँ रामचरितमानस मोतीः श्रीराम द्वारा माता कौसल्या सँ वनगमन लेल आशीर्वाद मांगब

रामचरितमानस मोतीः श्री राम दशरथ संवाद प्रसंग वनवास

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम-दशरथ संवाद, अवधवासी केँ विषाद, कैकेइ केँ बुझेनाय १. राम-कैकेइ संवादक बीच राजाक मूर्छा दूर भेलनि। ओ ‘राम-राम’ स्मरण करैत करोट फेरलनि। मंत्री हुनका श्री रामचन्द्रजीक अयबाक बात कहि समयानुकूल विनती कयलनि। जखन राजा सुनलनि जे श्री रामचन्द्र अयलाह अछि त ओ धीरज धय आँखि खोललनि। मंत्री रामचरितमानस मोतीः श्री राम दशरथ संवाद प्रसंग वनवास