अन्तर्मनक ओ बातः आत्मसंस्मरण
लेख – प्रवीण नारायण चौधरी आत्मसंस्मरण अन्तर्मनक ओ बात हम यदा-कदा बड भावुक भ’ गेल करैत छी… कियैक? कियैक त’ हमरा जखन विवाह करबाक लेल आत्मा मानि लेलक त हम अपन पूज्य पिता सँ कहलियनि जे आब अहाँ जरूर कतहु नीक परिवार देखू आ हमर जीवनसंगिनी तय करू। लेकिन जीवनसंगिनी तकबाक (निर्णय करबाक) बदले … अन्तर्मनक ओ बातः आत्मसंस्मरण





