रामचरितमानस मोतीः विश्वमोहिनीक स्वयंवर, भगवान आ शिवगण केँ श्राप, नारद मोहभंग
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती विश्वमोहिनीक स्वयंवर, शिवगण तथा भगवान् केँ श्राप और नारदक मोहभंग नारद भगवानक माया सँ निर्मित नगरीक राजमहल मे छथि, राजा हुनका खूब स्वागत-सत्कार कय केँ आसन दय बैसौलनि आ आगू राजा राजकुमारी केँ आनिकय नारदजी केँ देखेलनि आ पुछलनि – हे नाथ! अपने अपन हृदय मे विचारिकय एकर … रामचरितमानस मोतीः विश्वमोहिनीक स्वयंवर, भगवान आ शिवगण केँ श्राप, नारद मोहभंग



