समाज मे बदलाव सँ पहिने स्वयं मे बदलाव आवश्यक
स्वयंसंकल्प आ स्वयंसेवा यदि हम चाहि टा लेबय, परिवर्तन आबिये टा जेतय! यदि दुविधे फँसल रहबय, समय ब्यर्थे टा बिति जेतय!! स्वयंसंकल्प आ स्वयंसेवा सँ समाज बदलैत छैक। हम स्वयं कि सब सिद्धान्त बनेने छी, हमरा स्वयं मे समाज प्रति सेवाक केहेन भावना अछि, एहि तरहें परिवर्तन स्वयं सँ समाज व समुदाय धरि … समाज मे बदलाव सँ पहिने स्वयं मे बदलाव आवश्यक







