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प्रवीण नारायण चौधरी

सन्त चरितः भक्त जलारामजीक पठनीय-मननीय-अनुकरणीय कथा

भक्त जलारामजी (शास्त्री श्रीमंगलजी उद्भवजी पुरोहित) संत-चरित – साभारः कल्याण, वर्ष ९२, संख्या ४ गङ्गा पापं शशी तापं दैन्यं कल्पतरुस्तथा। पापं तापं च दैन्यं च घ्‌नन्ति सन्तो महाजनाः॥ ‘गंगा पाप, चन्द्रमा संताप तथा कल्पवृक्ष दरिद्रताक नाश करैत अछि अर्थात् ई सबटा एक-एक विषयक नाशक थिक; मुदा सन्त-महापुरुष पाप, ताप आ दारिद्र्‌य – तीनू केर एक्कहि सन्त चरितः भक्त जलारामजीक पठनीय-मननीय-अनुकरणीय कथा

रामचरितमानस मोतीः मेघनादक युद्ध, रामजीक लीला सँ नागपाश मे बन्हेनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती मेघनादक युद्ध, रामजीक लीला सँ नागपाश मे बन्हेनाय १. मेघनाद पूर्वोक्त मायामय रथ पर चढ़िकय आकाश मे चलि गेल आ अट्टहास करैत तेना गरजल जे बानरक सेना मे भय पसरि गेलैक। ओ शक्ति, शूल, तलबार, कृपाण आदि अस्त्र, शस्त्र व वज्र आदि बहुतो तरहक आयुध चलाबैछ तथा फरसा, परिघ, रामचरितमानस मोतीः मेघनादक युद्ध, रामजीक लीला सँ नागपाश मे बन्हेनाय

रामचरितमानस मोतीः कुंभकर्ण युद्ध आ ओकरा परमगति

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती कुंभकर्ण युद्ध आ ओकरा परमगति कुंभकर्ण द्वारा भाइ विभीषण केँ श्री रामजीक संग अयबाक व हुनकर भजन करैत रहबाक स्वस्ति आ सराहना कय आगू अपन युद्ध संकल्प कहि भाइ सँ सोझाँ सँ हंटि जेबाक अनुरोध नहि त ओ भाइ या केकरो युद्ध मे शत्रु मात्र मानत से भावना रामचरितमानस मोतीः कुंभकर्ण युद्ध आ ओकरा परमगति

झिझिया के पूछे नहि दांडिया के भरमार – मिथिला मे परदेशिया नाच के बोखार

मिथिला मे परदेशिया नाच के बयार लेल जिम्मेदार केकरा कहल जाय? क. सम्भ्रान्त समाजक गुम होयब आ समाजक विकृति प्रति कतहु कोनो प्रतिकार वा सामाजिक प्रतिकार तक नहि करब ख. मिथिलाक समरस समाजरूपी शुद्ध दूध मे जातिवादिताक खटाई सँ फाटल दूध वला नौबत, फट्टन पर्यन्त काज नहि लागयवला स्थिति ग. बाजारवाद के वीभत्स रूप मे झिझिया के पूछे नहि दांडिया के भरमार – मिथिला मे परदेशिया नाच के बोखार

रामचरितमानस मोतीः रावण द्वारा कुम्भकर्ण केँ जगेनाय, कुम्भकर्ण द्वारा रावण केँ उपदेश आर विभीषण-कुम्भकर्ण संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती रावण द्वारा कुम्भकर्ण केँ जगेनाय, कुम्भकर्ण द्वारा रावण केँ उपदेश आर विभीषण-कुम्भकर्ण संवाद लक्ष्मणजी केँ होश आबि गेलनि, आ एम्हर…. १. ई समाचार जखन रावण सुनलक त ओ बहुते विषाद करैत बेर-बेर माथ नोचलक, बहुत व्याकुल भ’ कुंभकर्ण लग गेल आ बहुतो तरहक उपाय कयकेँ ओ कुंभकर्ण केँ रामचरितमानस मोतीः रावण द्वारा कुम्भकर्ण केँ जगेनाय, कुम्भकर्ण द्वारा रावण केँ उपदेश आर विभीषण-कुम्भकर्ण संवाद

३०० वर्ष सँ बेसी के इतिहास आ ‘सत्य’ के जीत के अद्भुत प्रमाण – कुर्सों-नदियामी दुर्गास्थान

अमित मिश्रा, मछैता, दरभंगा। १५ अक्टूबर २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! ठेंगहा पकड़ी महिनाम पीडब्ल्यूडी सड़कक किनार कुर्सों-नदियामी गाम मे अवस्थित दुर्गा मंदिर एहि इलाका मे बहुते प्रसिद्ध आ विख्यात अछि। दुर्गा मन्दिर श्रद्धालु लोकनिक आस्थाक मुख्य केन्द्र थिक। भव्य मन्दिर, अलौकिक कारी पाथर सँ बनल माता दुर्गा भवानी, लक्ष्मीनारायण भगवान् केर संग विभिन्न देवी-देवता सभक ३०० वर्ष सँ बेसी के इतिहास आ ‘सत्य’ के जीत के अद्भुत प्रमाण – कुर्सों-नदियामी दुर्गास्थान

रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक प्रलापलीला, हनुमान्‌जीक लौटब, लक्ष्मणजी केँ होश आयब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री रामजीक प्रलापलीला, हनुमान्‌जीक लौटब, लक्ष्मणजी केँ होश आयब दृश्य ई छैक जे मेघनाद द्वारा शक्तिबाण केर प्रहार सँ लक्ष्मणजी मूर्छित छथि, जाम्बवन्तजीक कहल मुताबिक हनुमान्‌जी द्वारा सुषेण वैद्य केँ आनल गेल, सुषेण वैद्य जे औषधि कहलखिन से अनबाक लेल हनुमान्‌जी गेलथि आ रास्ता मे बाधा उत्पन्न कयनिहार रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक प्रलापलीला, हनुमान्‌जीक लौटब, लक्ष्मणजी केँ होश आयब

रामचरितमानस मोतीः भरतजीक बाण सँ हनुमान्‌ केर मूर्च्छित होयब, भरत-हनुमान्‌ संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरतजीक बाण सँ हनुमान्‌ केर मूर्च्छित होयब, भरत-हनुमान्‌ संवाद पैछला अध्याय मे कालनेमिक वध उपरान्त हनुमान्‌जी द्वारा सुषेण वैद्यक बतायल पर्वत पर औषधिक पहिचान नहि कय सकबाक कारण समूचा पर्वते उठाकय लंका लेल चलि देलनि आ आकाशमार्ग सँ उड़ैत अयोध्या उपरक आकाश मे पहुँचैत छथि – तखनः १. रामचरितमानस मोतीः भरतजीक बाण सँ हनुमान्‌ केर मूर्च्छित होयब, भरत-हनुमान्‌ संवाद

रामचरितमानस मोतीः हनुमानजीक सुषेण वैद्य केँ आनब आ संजीवनी बुटी लेल जायब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती हनुमानजीक सुषेण वैद्य केँ आनब आ संजीवनी बुटी लेल जायब कालनेमि-रावण संवाद, मकरी उद्धार, कालनेमि उद्धार पिछला अध्याय मे लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध आ लक्ष्मणजी पर शक्तिबाण प्रहार सँ हुनका मुर्छा मे देखि श्री रामजी सहित समस्त लोक चिन्तित छथि। तेकर बाद – १. जाम्बवान्‌ कहलखिन – लंका मे सुषेण रामचरितमानस मोतीः हनुमानजीक सुषेण वैद्य केँ आनब आ संजीवनी बुटी लेल जायब

रामचरितमानस मोतीः लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध आ शक्तिबाण लगला सँ लक्ष्मणजीक मूर्च्छित होयब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, लक्ष्मणजी केँ शक्तिबाण लागब प्रसंग छल माल्यवान् (रावणक नाना) द्वारा रावण केँ बुझेनाय जे श्री रामजी संग वैरभाव केर त्याग कय हुनका जानकीजी वापस करू आर सर्वसमर्थ भगवानक भजन करू, एहि पर रावणक तामस आ माल्यवान् केँ दरबार सँ बाहर निकलि जेबाक आ दोबारा मुंह तक रामचरितमानस मोतीः लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध आ शक्तिबाण लगला सँ लक्ष्मणजीक मूर्च्छित होयब