सन्त चरितः भक्त जलारामजीक पठनीय-मननीय-अनुकरणीय कथा
भक्त जलारामजी (शास्त्री श्रीमंगलजी उद्भवजी पुरोहित) संत-चरित – साभारः कल्याण, वर्ष ९२, संख्या ४ गङ्गा पापं शशी तापं दैन्यं कल्पतरुस्तथा। पापं तापं च दैन्यं च घ्नन्ति सन्तो महाजनाः॥ ‘गंगा पाप, चन्द्रमा संताप तथा कल्पवृक्ष दरिद्रताक नाश करैत अछि अर्थात् ई सबटा एक-एक विषयक नाशक थिक; मुदा सन्त-महापुरुष पाप, ताप आ दारिद्र्य – तीनू केर एक्कहि … सन्त चरितः भक्त जलारामजीक पठनीय-मननीय-अनुकरणीय कथा



