अपन मूल्य-मान्यताक समीक्षा कएने बिना दोसरक देक्शी सुरक्षित नहि
ई मृत्युभोज शब्द आइ-काल्हि मिथिलाक कतेको लोक केँ माथा डिस्टर्ब कएने छन्हि। वास्तव मे ई शब्द मिथिलावासीक विधान मे कतहु नहि छैक। लेकिन मिथिलाक लोक आइ अपन बहुमूल्य परम्परा केँ ‘बारीक पटुआ तीत’ बुझि ‘दूरक ढोल सोहाओन’ वाली तर्ज पर अक्सर आन-आन संस्कृतिक बात केँ अपन मिथिला संस्कृति सँ तुलना करैत फ्रस्ट्रेटेड (हताश) होइत रहैत … अपन मूल्य-मान्यताक समीक्षा कएने बिना दोसरक देक्शी सुरक्षित नहि








