बसंत – दीपिका झा केर एक सुमधुर नव रचना
साहित्य – दीपिका झा “बसंत” बसल बसंत अहि नैन…….. मधुमासक मधु छलकल चंहुदिश, भीजल अछि दिन-रैन…….। बसल बसंत अहि नैन……..।। वन-उपवन नवकल्प सं साजल, कोयली लय में कुहकय लागल, हलसल अछि दिन-रैन…….। बसल बसंत अहि नैन……..।। आमक मज्जर सं तरु पाटल, मधुर बयार देखि पोह फाटल, शीतल भेल दिन-रैन………। बसल बसंत अहि नैन……..।। … बसंत – दीपिका झा केर एक सुमधुर नव रचना








