रामचरितमानस मोतीः पृथ्वी आ देवता लोकनिक करुण पुकार
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती पृथ्वी और देवतादिक करुण पुकार १. पराया धन और पराया स्त्री पर मोन चलबयवला, दुष्ट, चोर और जुआरी बहुते बढ़ि गेल। लोक माय-बाप आ देवता सब केँ नहि मानैत छल आ साधु लोकनिक सेवा करब त दूर उल्टा हुनके सब सँ सेवा करबावैत छल। श्री शिवजी कहैत छथि … रामचरितमानस मोतीः पृथ्वी आ देवता लोकनिक करुण पुकार





