रामचरितमानस मोतीः पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीक प्रथम दर्शन, श्री सीता-रामजीक परस्पर दर्शन
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीक प्रथम दर्शन, श्री सीता-रामजीक परस्पर दर्शन १. राति बीतल, मुर्गाक शब्द कान सँ सुनिकय लक्ष्मणजी उठलाह। जगत केर स्वामी सुजान श्री रामचन्द्रजी सेहो गुरु सँ पहिने जागि गेलाह। सब शौचक्रिया कय नहा लेलाह। फेर संध्या-अग्निहोत्रादि नित्यकर्म समाप्त कय केँ ओ मुनि केँ मस्तक नमाकय प्रणाम कयलनि। … रामचरितमानस मोतीः पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीक प्रथम दर्शन, श्री सीता-रामजीक परस्पर दर्शन




