विद्यापतिक एहि रचनाक वास्तविक भाव विरले किनको बुझल होयत
साहित्य महाकवि विद्यापति के कतेको रचना के वास्तविक अर्थ बहुत लोक के बुझय नहि अबैत अछि। जय जय भैरवि हो या कतेको लोकप्रिय नचारी आ अन्यान्य रचना, गाबैत सब अछि मुदा भाव स्पष्ट नहि रहैत छैक। एकटा एहने प्रसिद्ध रचना छन्हि पिआ मोर बालक हम तरुणी गे, एकर भाव के सम्बन्ध में बहुत बेसी भ्रम … विद्यापतिक एहि रचनाक वास्तविक भाव विरले किनको बुझल होयत






