भारती झा केर दुइ गोट रचना – दहेज प्रथा आ कतय गेल मिथिलाक दलान
कविता – भारती झा दहेज प्रथा बिका गेल माय बापक घर तेँ बेटी के घर बसल, केहन अभागल प्रथा अछि ई, दहेजप्रथा जे कतेको घर केँ निगलि चुकल। यदि बेटी किछु नै कय पायल तेँ बेटा घर बचा लितय जखन ओकर बोली लगैत रहै तखन अपन शिक्षा के महत्व देखा दितय। ख़ालिये हाथ … भारती झा केर दुइ गोट रचना – दहेज प्रथा आ कतय गेल मिथिलाक दलान









