जनकपुरधाम साहित्य-कला-नाट्य महोत्सव २०८२ः प्रवीण भाव
जनकपुर सँ घुरिकय….. जनकपुरधाम साहित्य, कला तथा अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव २०८२ सँ घुरिकय प्रवीण मन अपने सब लेल बहुत किछु लिखबाक लेल प्रेरित अछि । मुदा समय लैत धीरे-धीरे आ टुकड़ा-टुकड़ा टा मे लिखि सकब से बाध्य छी, जीवनक विभिन्न आयाम अलग-अलग समय मांगैत रहैत अछि तेँ । काल्हि अत्यन्त दुःखी मन सँ बिना इच्छा … जनकपुरधाम साहित्य-कला-नाट्य महोत्सव २०८२ः प्रवीण भाव









