Search

नेपालक आसन्न प्रतिनिधिसभा सदस्यक चुनाव तथा मैथिली भाषा

155 भ्यूज

नेपालक चुनाव आ मैथिली भाषा

– गुलाम मानसिकताक जनप्रतिनिधि (नेता वा निर्वाचन उम्मीदवार) केँ भाषा आधारित पहिचानक ज्ञानक घोर अभाव,

– पहिचानक मूल आधार निजभाषा मे पर्यन्त गैर-शैक्षणिक व अवैज्ञानिक तथ्य सभक आधार पर समाज मे अन्तर्विभाजनक गलत खेलबेल करयवला देश मे ‘समान राष्ट्रियता भावना’ केर विकास असम्भव

श्यामसुन्दर शशि ( Shyamsundar Shashi ) पेशा सँ मैथिली विषयक प्रोफेसर (प्राध्यापक) रहितो पत्रकारिता, लेखन, रेडियो उद्घोषक, सामाजिक विषय-सन्दर्भक प्रखर चिन्तक, मंच उद्घोषक, वक्ता आ विद्वान् अनेकों रूप मे सुपरिचित व्यक्तित्व छथि । यदाकदा जातीय वर्चस्व विरूद्ध कड़ा प्रतिरोध जतेनिहार सेहो छथि, ताहि क्रम मे स्वयं सेहो जातिवादी कट्टरता आ कोना न कोना मन मे एकटा विद्रोह धारण करबाक कारण कमजोर सेहो पड़ैत देखाइत रहला अछि । ओ लिखैत छथि –

“उम्मेदवारलोकनिसँ जिज्ञासा–
अपनेक मतदाता कोन भाषा बजैत आ बुझैत छथि ?
अपने कोन भाषामे मत मंगै छी ?
जे भाषा अपनेक मतदाताक पहिचान छै,
जे भाषा अपनेक मत मांगयके माध्यम अछि,
ओहि मैथिली भाषाके सरकारी कामकाजक भाषा बनेबामे अपनेक योगदान की ?
अपनेक प्रतिवद्धता की ?
मान्यवर, रातिमे सुतैतकाल गुनबै यहि विषयके …. ”

नेपाल मे आसन्न (प्रतिनिधिसभा सदस्य) चुनाव मार्च २०२६ प्रथम सप्ताह मे होयबला अछि । एखन चुनाव प्रचार मे मगन छथि सम्पूर्ण उम्मीदवार लोकनि । हुनका सब केँ लक्षित नेपालक दोसर सर्वाधिक आबादीक भाषा “मैथिली” केर प्रयोग आ मतदाता सँ वार्ताक बेहतरीन माध्यम प्रति सजग-सचेत करयवला चिन्तनक विन्दु सामाजिक संजाल पर रखलनि अछि ।

चुनाव बेर मे लोकक भाषा प्रयोग कयला सँ अपनत्व बढ़बाक आ तदनुसार मतदाता केँ अपना दिश आकर्षित करयवला सिद्ध तथ्य केँ आधार बनाकय नेता सभक निजत्व प्रति सुन्दर बोध केर प्रसार हेतु हुनकर ई फेसबुक स्टेटस सचमुच समय-सान्दर्भिक अछि ।

खास कय नेपालक परिप्रेक्ष्य मे, कतेको मैथिलीभाषी नेता सभक द्रोही भावना जगजाहिर हेबाक खतरनाक उदाहरण सब देखलाक बाद एकटा प्रखर सामाजिक चिन्तक आ राष्ट्र-राष्ट्रियताक मूल जड़ि भाषा आधारित पहिचान प्रति जनप्रतिनिधि लोकनिक उपेक्षा विरूद्ध बिगुल बजौलनि अछि श्री शशि ।

उम्मीद करू जे हुनकर एहि आह्वानों सँ किछु फर्क पड़त, भले किछुके लोक मे ।

मुदा फर्क नहियो पड़बाक जोखिम बनले अछि – कियैक ?

कियैक तँ –

१. जनता केँ भेंड़ा कहल जाइत छैक नेपाल मे । नेपाल मे लोकतंत्र प्रति जेहेन चेतना हेबाक चाही लोक मे आ जाहि चेतना सँ नेपाल सरकारक गठन मे ‘बहुमत’ जुड़ेबाक आवश्यकता अछि से एखन धरि कतेको दशक मे नहि देखल जा सकल छैक । दारू आ माँसु मे बहुल्यजनक मत ठकबाक परम्परा रहल अछि एतय । पढ़ल-लिखल समाज मे सेहो पार्टीगत भावनाक प्रबलता अछि । दोसर, नेपाल देश खसभाषी मात्र केर छी, आन भाषाभाषी सब ‘बहरिया’ मानल जाइछ एतय । आब कहू ? भूगोल आन भाषाभाषी केर आ देश एकलभाषी केर । कहियो राष्ट्रियताक समान स्वामित्व कियो लय सकत ? कदापि नहि ।

२. नेपालक शिक्षातंत्र मे ‘एकल खसभाषा’ केर माध्यम सँ शिक्षा देल जेबाक घोर विभेदकारी नीति सँ ९५% जनता त्राहिमाम्-त्राहिमाम् करैत ‘खसभाषाक गुलाम’ बनि गेल छैक । झूठहि कहय लेल नेपाल ‘बहुभाषिक, बहुधार्मिक, बहुराष्ट्रिय’ शब्दालंकारक महिमामंडन करैत तथाकथित विश्वक सर्वश्रेष्ठ ‘संविधान’ लिखने अछि, मुदा अधिकार सम्पन्न बनेबाक समय जनता सँ फेर एकल खसभाषा मे सरकारी कामकाज, न्यायालय, शिक्षा, रोजगार, मान-सम्मान आदिक अम्बार लगेबाक यथास्थिति छैक । संविधानक गछलो बात व्यवहार मे लागू नहि हेबाक स्थिति केकरो सँ छूपल नहि छैक ।

३. एहेन राष्ट्रक राष्ट्रियता किन्नहुं एकल खसभाषी समुदायक अतिरिक्त आर लोक मे समान भाव सँ विकसित भइये नहि सकैत छैक । तखन ओ राष्ट्रभक्त कम आ राष्ट्रक भक्तिक नाम पर गुलाम मानसिकता सँ चमचागिरी आ खसभाषी समुदायक पिछलग्गू टा बनिकय अपन अभीष्ट (राजनीतिक तौर पर ) सिद्ध करबाक अलावे राष्ट्र, राष्ट्रियता व राष्ट्रप्रेमक विकास एहि जीवन मे कहियो नहि कय सकैछ, से सिद्धतथ्य बुझू ।

४. ई एकल खसभाषाक गुलाम नेता, एतय धरि जे ‘मधेश’ केर उपेक्ष-उत्पीड़न विरूद्ध राजनीति केर बिगुल फूकनिहार तथाकथित मसीहा आ बड़का कहबैका नेता सब सेहो खसभाषी नेताक गुलामी कय केँ मात्र अपन स्वार्थक पूर्ति करय लगलैक जे आइ एहि कथित मधेशवादी नेताक धोती मे पैखाना भेल जेहेन दुर्गति देखल जा रहल अछि । कतबो करय गठबन्धन आ कतबो करय प्रचार – एकरा सभक अबस्था एकटा नंगाफरोश जेकाँ मात्र छैक ।

५. नेपाल एकटा संघीय गणतंत्र रहितो एतय एकल वर्चस्वक खतरनाक अबस्था मे कथित मुक्तिगामी राजनीतिक शक्ति सेहो केवल पिछलग्गू आ गुलामी राजनीति करयवला जत्था हेबाक कारण एखन धरि प्रदेश व स्थानीय निकाय (संघीय गणतांत्रिक नेपालक शासकीय संरचनाक दुइ महत्वपूर्ण तह) मे पर्यन्त एकल भाषाक वर्चस्व समाप्त नहि भेल छैक ।

६. उपर सँ ई मधेशवादी मसीहा सब ‘मैथिली’ भाषाक ‘भ’ तक केर ज्ञान या शिक्षा नहि रखनिहार नित्य नया-नया ‘बाँटू आ शासन करू’ पद्धति सँ अपनहि मधेशी समाज केँ लहूलुहान कएने अछि । अपन घरहि मे २५ फाँक भेल अछि । जातिक नाम पर, धर्मक नाम पर, क्षेत्रक नाम पर, भाषाक नाम पर, वर्गक नाम पर, रंग आ वर्ण हरेक स्तर पर विभाजित अछि । ई समाज ‘एकल भाषा’ सँ कि संघर्ष करत ? केना मुक्त होयत ? जे मैथिली भाषाक शक्ति केँ अपन दू नया नव शिक्षाक आधार पर भग-भग्न (भंग) करय लेल आतुर अछि ? जे मैथिलीक नाम ‘मधेशी भाषा’ कहि दुष्प्रचार करैत अछि ? ई सब करत सफल राजनीति ? एहि जीवन मे सम्भव नहि छैक । ई हमर दावी टा नहि चुनौती सेहो छैक एहि कथित मसीहा सब केँ । एहि बेटा सँ एहि जीवन मे पोता नहि होयत । याद राखू ।

७. मनसा, वाचा व कर्मणा सँ निजत्व केर पृष्ठपोषण लेल जाबत सिस्टम विकसित नहि होयत, एहि नेपालक कल्याण सम्भव नहि अछि । अपन पीठ अपनहि सँ कतेको ठोकि लियह, कतबो नया-नया क्रान्ति आ विकल्प राखि दियह, अहाँ सँ ई देशक अस्तित्व कायम राखब सम्भव नहि होयत । तेँ मनसा-वाचा-कर्मणा अनुरूप राष्ट्रियताक विकास करू । संविधान केँ शब्दसः लागू करू । शिक्षा व सरकारी कामकाज मे मान्यता प्राप्त बहुभाषा केँ मान्यता प्रदान करू । अन्यथा नौटंकी चालू राख्दा हुन्छ – राख्नुस् ।

८. जनचेतना सेहो कमजोर अछि । शिक्षा मे मैथिली नगण्य रहि गेल अछि । आर अशिक्षित समाज सँ भाषिक चेतना आ तदनुरूपक विकास व निर्वाचन मे जनप्रतिनिधि चयनक सपना केवल खोखला आ दिवास्वप्न मात्र होयत ।

शेष कोनो आर लेख मे …. एखन चारूकात निराशा टा देखा रहल अछि । शशिजीक बात तैयो किछुओ नेता धरि पहुँचय से हमहुँ कामना करैत छी । बम बम महादेव !

हरिः हरः!!

Related Articles