कल्याणेश्वरी दुर्गाक प्रतिमा स्थापना आ महायज्ञक तैयारी
– आइ २९ जनवरी २०२६ केँ भेल बँसकट्टी (उद्योग उद्यापन), १५ अप्रैल २०२६ केँ होयत समापन
– ५ कुण्डीय सहस्रचण्डी महायज्ञ – कुल ५१ पंडितक सहभागिता
– कलना बाबा द्वारा स्थापित भगवती मन्दिरक अपन विशेष इतिहास
नेपालक महोत्तरी जिलान्तर्गत सहोड़वा गाम – जे कि जनकपुर-जलेश्वर मुख्य मार्ग (हाईवे) पर जनकपुर सँ मात्र छः किलोमीटर तथा जलेश्वर सँ ८ किलोमीटर अवस्थित गाम अछि, ताहि ठाम ‘कलना बाबा’ द्वारा स्थापित मन्दिर ‘कल्याणेश्वरी दुर्गा मन्दिर’ मे दुर्गाजीक स्थायी प्रतिमाक स्थापना, मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा लेल पुरी पीठक शंकराचार्य श्री निश्चलानन्द सरस्वतीक आगमन, संगहि सम्पूर्ण मिथिलाक्षेत्रक सनातन धर्म-ध्वजावाहक लोकनिक विशेष सान्निध्य एवं सहस्र चण्डी महायज्ञक आयोजन, नवाह कीर्तनक आयोजन सहित अनेकों धार्मिक-आध्यात्मिक प्रवचन आदिक कार्यक्रम कयल जा रहल अछि । मैथिली जिन्दाबाद सँ आयोजक समिति एवं संरक्षक परिवारक सदस्य अवधेश कुमार झा ई जनतब देलनि अछि ।
श्री कल्याणेश्वरी दुर्गा मन्दिर, दुर्गा टोल, सहोड़वा, महोत्तरी, नेपाल मे जगत अधिष्ठात्री कल्याणेश्वरी दुर्गा माताक मूर्ति स्थापना तथा प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम
– सहस्रचण्डी महायज्ञ वास्ते उद्योग (बँसकट्टी), धर्मध्वज यात्रा तथा स्थापना, कलशयात्रा, नवाह कीर्तन (मूलमंत्रः काली-दुर्गे-राधेश्याम-गौरीशंकर-सीताराम), पुरी पीठाधीश्वर स्वागत तथा अभिनन्दन कार्यक्रम, मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा, भागवत कथा सप्ताह, सहस्रचण्डी महायज्ञ (५ कुण्ड, ५१ पंडित) केर योजना अछि । मूर्ति अनावरणकर्त्ता प्रमुख आचार्य – पूरी पीठाधीश्वर श्रीमद् जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती, गोवर्धन पीठ, पुरी, उड़ीसा केर आगमन होयत ।
मुख्य आचार्य (संकल्पकर्ता एवं मूर्ति स्थापनाकर्ता) – ज्योतिषाचार्य दीपेन्द्र झा तथा संरक्षक – मार्गदर्शकः प्रा. डा. गोविन्द चौधरी, नैय्यायिक विद्वान्, बनौली, महोत्तरी, नेपाल रहता । तहिना विशिष्ट उपस्थिति लेल नेपाल आ भारत दुनू दिशक विभिन्न धार्मिक अगुआ जाहि मे श्री बौआ भगवान्, लगमा, दरभंगा केँ सेहो आमंत्रित कयल गेल अछि ।
कार्यक्रम आरम्भ तिथिः उद्योग (बँसकट्टी) २९ जनवरी २०२६ सँ समापन १५ अप्रैल २०२६ । मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा दिनांकः २७ मार्च २०२६ केँ पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्यजी करता ।
विशेष सान्निध्य रूप मे सम्पूर्ण मिथिलाक्षेत्रक प्रमुख मठाधीश – महन्थ एवं धर्माचार्य लोकनिक संग एहि कल्याणेश्वरी दुर्गा मन्दिरक शिलान्यास करनिहार कलना बाबा सँ आबद्ध “कलना बाबा मठ”, तहिना जानकी मन्दिर, राम मन्दिर जनकपुरक संग अन्यान्य धार्मिक न्यास व अखाड़ा, मटिहानी महन्थ व वेदाध्यायी अध्यापक व छात्रक सङ्गोर, सखड़ा, सर्लाही, आदिक विभिन्न धार्मिक न्यास व गुठी सभक सहभागिता मे उपरोक्त महायज्ञ पूरा करबाक योजना अछि ।
नेपालदेशक सर्वोच्च धार्मिक संस्था बाबा पशुपतिनाथ तथा पशुपति क्षेत्र विकास कोष, काठमांडूक अतिरिक्त जानकी मन्दिर, जनकपुर, नेपाल व भारतक विभिन्न संस्कृत विश्वविद्यालय एवं प्रमुख विद्याध्ययन केन्द्र, धार्मिक न्यास एवं संस्था आदि, विभिन्न जातीय एवं सामुदायिक संस्था – सम्पूर्ण नेपाल आ विशेष जोर विराटनगर, बिर्तामोड़, इनरुवा, धरान, इटहरी, भारदह, राजविराज, सलहेश स्थान लहान, बीरगंज, गौर, मत्सरी, तिलाठी, देवडीहा, बनौली, आदिक सहभागिता सुनिश्चित कयल जा रहल अछि ।
उपरोक्त वृहत् कार्यक्रम तथा यज्ञ आदिक सफलतापूर्वक व्यवस्थापन लेल विभिन्न उपसमिति यथा पूजापाठ सामग्री व्यवस्थापन, पंडित व यजमान चयन व आमंत्रण, सहभागी अतिथिक स्वागत एवं आवास व्यवस्थापन, यज्ञस्थल निर्माण एवं विभिन्न सामग्री रखरखाव, यात्रा सवारी-साधन पड़ाव, भोजन भंडारा व्यवस्थापन, मेला आयोजन एवं व्यवस्थापन, अतिथि आमंत्रण एवं विशेष सहभागिता सम्बन्धी तथा आर्थिक कोष व्यवस्थापन संगहि मंचीय प्रस्तुति संयोजन समिति सभक गठन कयल गेल अछि ।
कल्याणेश्वरी दुर्गा मन्दिरक इतिहासः
स्थानीय सहोड़वा (महोत्तरी) गामक ब्राह्मण समुदाय मे भगवती पूजा करबाक सोच आयल । सर्वप्रथम २०४६ साल मे स्व. कुञ्जबिहारी झाक निजी दलान सँ महामाया दुर्गा भगवतीक पूजा शारदीय नवरात्र सँ आरम्भ कयल गेल । २०४८ साल मे कलना बाबाक हाथ सँ मन्दिरक शिलान्यास कयल गेल । कलना बाबाक सँ प्रेरणा पाबि गिरिजास्थान (फुलहर, मधुबनी) सँ संकल्प आ तदनुसार २०४८-२०५४ केर कालक्रम मे मन्दिर निर्माण कार्यसम्पन्न कयल गेल ।
२०४८ सँ भगवती मन्दिर प्रांगण मे नवमूर्ति निर्माण आ नवरात्रि अवधि भरि सम्पूर्ण ग्रामीण आ क्षेत्रक लोक द्वारा खूब उत्साह सँ सनातन विधि-विधानक संग भगवतीक पूजा-अर्चना कयल जाइत अछि । अगुवाई दक्षिणबाड़ि टोल (हाल दुर्गा टोल) केर ब्राह्मण समुदाय द्वारा भेल परञ्च आब ई आयोजन सम्पूर्ण गामवासी समाजक तरफ सँ – सभक योगदान सँ – एतेक तक कि स्थानीय मुस्लिम समुदायक सार्थक सहयोग पर्यन्त सँ आयोजित होइत अछि ।
एहि पवित्र स्थान आ परम्परा मे कतेको रास सहयोग सेहो प्राप्त होइत आबि रहल अछि । यथा जनकपुर वृहत्तर विकास कोष केर अनुदान सहयोग, वरिष्ठ राजनेता व आधुनिक नेपालक राजनीतिक क्षेत्रक चर्चित नाम माननीय महन्थ ठाकुरक संसदीय कोष केर योगदान तथा पिपरा गाउंपालिका तथा वार्ड नम्बर ५ केर विशेष योगदान, स्थानीय व्यक्ति आ समाजक विशेष योगदान – आइ ई स्थान एकटा भव्य पर्यटन स्थल रूप मे प्रसिद्धि प्राप्त कएने अछि ।
सहोड़वा सँ सड़क सम्पर्क (कनेक्टिविटी)
ई स्थान जनकपुर-जलेश्वर हाईवे पर स्थित अछि । जनकपुर सँ ६ किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम, जलेश्वर सँ ८ किलोमीटर उत्तर-पूर्व, भिठ्ठामोड़ सँ १३ किलोमीटर उत्तर-पूर्व स्थित अछि ।
मिथिला परिक्रमा क्षेत्र भीतर पड़ैत अछि । परिक्रमा पथ पर स्थित मटिहानी सँ ८ किलोमीटर उत्तर पड़ैत अछि ।
बनौली (मैथिली कविकोकिल विद्यापतिक गुप्त वासस्थल बनौली) सँ १ किलोमीटर पश्चिम पड़ैत अछि ।
भारतीय सीमानाका मटिहानी, भिठ्ठामोड़ तथा जटही, मधवापुर, आदि सँ जुड़ल स्थान ।
पर्टयन दृष्टि सँ रामायण सर्किट अन्तर्रगत – सर्किट मार्ग जनकपुर-अयोध्या हाईवे पर अवस्थित गाम ।
एहि मन्दिरक स्थापना आ इतिहास संग आबद्ध मूल उद्देश्य सनातन धर्मक संरक्षण, संवर्धन तथा प्रवर्धन – पर्यटन विकास – सामुदायिक एवं साम्प्रदायिक सौहार्द्रता एवं समन्वय, हिन्दू-मुस्लिम एकता आ भाईचारा, विश्व सनातन समाज संग सहकार्य अछि ।
स्थानीय आयोजक एवं ग्रामीणक तरफ सँ सब कियो आमंत्रित छी ।
