तृषित केर द्वंद्वात्मक दोलत्ती – परिप्रेक्ष्य नेपाल प्रदेश २ केर चुनाव मे टिकट बँटवारा
द्वन्दात्मक दोलत्ती – कालीकान्त झा तृषित अत्यन्त आतंकित, अपश्याँत एवम् चिन्तित स्वर मे मुसरी बाबू धारा प्रवाह कहि रहल छलाह, “हौ! कतऽ बेपत्ता भेल छह, बहुत पैघ बाढि आबि गेल छैक। नहि जानि ई कोना सम्हरतै? कनि मनि के बात रहितइ त ने चिन्ता नहि होइतै?” हम कहलिएन, “अहूँ अछछ करैछी, बेसी ठामक बाढि त कहिया … तृषित केर द्वंद्वात्मक दोलत्ती – परिप्रेक्ष्य नेपाल प्रदेश २ केर चुनाव मे टिकट बँटवारा









