नेपाल केर प्रदेश २ यानि मिथिला मे स्थानीय निकायक चुनावक सन्दर्भ

विचार

– प्रवीण नारायण चौधरी

नेपालक राजनीतिः ‘५२ पत्ती बीचक १ जोकर’ सँ सावाधानीक जरुरत

तूफानीलाल उर्फ तोफन बच्चे सँ जोशगर आ समाजक सब काज मे रुचि लेनिहार छल। ओकर एकटा आरो खासियत ई रहैक जे अपन संगतुरिया संग उमेर वला खेला-वेला मे सेहो खूब माहिर रहय, मुदा जहाँ समाजक बात अबैक त ओ दोसर संगतुरिया सँ बहुत आगू निकैल जाय। तोफन बाद मे राजनीतिक क्रान्ति मे भागक आजमाईश केलक। रोलिंग स्टोन जेकाँ ओ एक दल सँ दोसर दल गुरकैय मे सेहो ओ खूब माहिर छल, आखिर बचपने स ओकर अपन द्वैत चरित्रक अभ्यास जे एहि मे सहायक होएक – बड मोस्किल सँ कियो बुझय, कियो नहि बुझय। बुझनिहारो लेल ओकरा पास बड सटीक जबाब होएक, ओ चट् कहि दएक जे बहुतो केँ देख लेलियैक, चिन्ह गेलियैक, अपन समय पूर्व मे नोक्सान कएलहुँ जे ओकरा पार्टी मे समय खर्च कएलहुँ। जखन कि तोफन केर तूफानी क्रान्ति सँ सब दल ओकरा ‘जोकर’ जेकाँ प्रयोग करैक आ बेर पर गिनती मे ५२ पत्तीक अस्तित्व मात्र रहि जाएक।
 
मनुष्यक स्वभाव ओकर भविष्य निर्माण मे बड पैघ भूमिका खेलाएत छैक। भीतर किछु, बाहर किछु – ई द्वैत चरित्र थिक। कृष्ण गीता मे कतहु कहने छथि जे एक दिस मनुष्य ई देखाबय जे ओकरा विषयरस मे कोनो आसक्ति नहि छैक, मुदा दोसर दिस भीतरे-भीतर ओकर इन्द्रिय अपन-अपन विषय केर ताक मे लागल रहय त बुझि जाउ ओ मिथ्याचार कय रहल अछि, ओ मिथ्याचारी थिक। हाइपोक्राइसी यानि मिथ्याचारिता मनुष्यक चरित्र लेल एक भयावह रोग समान देखल जाएछ। तोफन जखन कि बड पैघ क्रान्तिकारी देखाएत छल लोकक दृष्टि मे, एतबा नहि… ओ अपन कलात्मक प्रस्तुति सब सँ कोनो पार्टीक स्टार प्रचारक पर्यन्त बनि जाएत छल…. मुदा ओकर स्टारडम केवल मूढ जनमानस केँ एकटा सोच प्रवेश करेबाक लेल दोसर द्वारा उपयोग कएल जाएत रहलैक।
 
आखिर वर्तमान प्रजातंत्रक मूल्य कि? संख्या! वोटक संख्या! कोनो दल सत्ताक गद्दी पर तखन पहुँचत जखन बहुमत – बेसी मत – संख्याबल ओकरा पक्ष मे रहतैक। आब ई संख्या अनबाक लेल ५२ पत्तीक १ जोकर जेकाँ तोफन केर प्रयोग हो आ कि भारत मे धर्महु केँ कलंकित करयवला कतेको संप्रदाय-मत आदिक प्रवर्तक धर्मगुरुक। राजनीतिक दल केँ सत्तारोहण लक्ष्य छैक आर जोकर केर प्रयोग जहिना तासक जुआखेल मे बड़ अजीबोगरीब होएत रहैत छैक, तहिना संख्याबल जुटेनिहार दलाल, भरुआ, ठीकेदार आदिक। तोफन केर संख्या वर्तमान राजनीतिक परिवेश मे कम नहि छैक। लगभग सब दल एहेन तोफन रखैत आबि रहल अछि। कल्पना करू – जँ ५-१० गो तोफन एक संग चुनावी दौड़ा मे अपना-अपना तरहें पशुवत् मूढ मतदाता केँ अपना-अपना तरफ खींचैत रहैत अछि त दृश्य केहेन लागत।
 
नेपालक राजनीतिक इतिहास मे परिवर्तनक दौड़ किछु दसक सँ हम सब देखिये रहल छी। ५२ पत्तीक बीच १ जोकर केर भूमिका एहि ठाम खूब देखय लेल भेटैत अछि। देश छोट छैक, जोकरइ केर नमूना सब जल्दिये स्पष्ट भऽ जाएत छैक। हालक किछु दसक मे राजतंत्र सँ बहुदल प्रजातांत्रिक राजतंत्र आ फेर माओवादी जनविद्रोह-जनयुद्ध, राजा द्वारा अपन राष्ट्राध्यक्षक विशेष शक्तिक प्रयोग सँ विभिन्न राजनीतिक दलक चुनल प्रतिनिधिक सभा केँ भंग कय स्वयं चुनाव करेबाक तानाशाही भूमिका, पुनः जनान्दोलन सँ राजतंत्र केँ उखाड़ि फेकब, नव संविधान सभाक गठन, ओकर फेल्योर, फेर दोसर संविधान सभाक चुनाव, नव संविधानक घोषणा, ताहि सँ बहुल्य जनताक असन्तुष्टि मुदा प्रतिनिधिमंडल केर संख्याबल पर ओहि संविधान केर पूर्णता पर ढोल पीटबाक कार्य, असन्तोषक कारण सैकड़ों जनता शहीद, देश मे एथनिक आइडेन्टिटीक आधार पर स्पष्ट विभाजन आ असन्तोषक बाढि सँ राष्ट्रीयता मे व्याप्त विभाजनक कैन्सर लागब… ई सब बात एहि देशक भविष्य केँ कतय लय जा रहल अछि ई कोनो साधारण समझ रखनिहार द्रष्टा लेल सहजे बुझय योग्य विषय अछि। तखनहुँ एतय ५२ पत्तीक १ जोकर केर प्रयोग सँ तात्कालिक जीत ग्रहण करबाक खेल-वेल खूब देखाएत अछि।
 
आब प्रदेश २ जे कोसी सँ गंडकी धरिक नेपालक तराई भूभाग थिक, प्राचीनकाल सँ वर्तमान कालक्रम धरि एकर पहिचान जनकक मिथिलाक रूप मे होएत रहल अछि, ओतय सेहो चुनाव होमय जा रहल अछि। जल्दिये चुनावी प्रक्रिया आरम्भ होयत। ५२ पत्तीक १ जोकर तोफन-तूफानी सन-सन कतेको जमीनी दलाल सब केँ प्रयोग करैत चुनावक परिणाम केँ लोक सब अपना-अपना पक्ष मे करबाक काज करत। नव नेपालक ६ गोट प्रदेश मे सम्पन्न चुनाव आ ओकर परिणाम मे एहि जोकर सभक किरदानी सँ लोक सब परिचित भेले अछि। ताहि समय मे एकटा मजगूत मधेशवादी राजनीतिक गठबन्धन ‘राजपा’ सोझाँ अभरल अछि। लेकिन एहि राजपा केँ कलंकित करबाक लेल तुरुप केर एक्का सँ लैत बादशाह, बेगम, गुलाम, दहला, नहला, अठ्ठा… दुगी धरिक कार्डक प्रयोग त कएले जायत – मुदा सावधानी राखय पड़त ओहि जोकर सँ जेकर प्रयोग कतहु, कोनो तास संग खेल अपन पक्ष मे करबाक लेल होएत छैक। प्रदेश २ केर जनता केँ अपन भविष्य निर्माण मे एहि जोकर सब सँ सावधान रहबाक आवश्यकता अछि। एक बेर फेर तरह-तरह केर हथकंडा आ दुष्प्रचार आदि कएल जायत। नोट उड़त, दारू उड़त, धूआँ-धाकड़ सब चलत… आर वैह होयत जेकर दंभक कारण नेपाल मे आम सहमति आ समस्त जनता माझ संतोषक घोर कमी देखा रहल अछि, यानि अहंकारी सत्तावादी अपन सोलहो कला सँ राजनीतिक खेल मे लागत। एहेन समय जँ देशक जनता अपन बुद्धि आ विवेक सँ सतर्क नहि रहत त ई अशान्ति आ निराशाजनक परिवर्तनक दौड़ आरो कतेको दसक आगू धरि बरकरार रहत।
 
हरिः हरः!!