केकरा लेल पूसक जाड़! – टिल्लू भाइ केर मर्मस्पर्शी कविता
ककरा लेल पूसक जाड़ ! – शिव कुमार झा टिल्लू कांपि रहल हाड़ दरिद्रक … वाह रौ पूसक जाड़ ? मुदा ककरा लेल कोनो परवाहि नहि समर्थ लोक केँ दांत पर दांत गड़ौने .. मजूर गरीब अवलाक नेना सीमा चौकी पड़ तकैत सेना संग संग तथाकथित अवारा जीव बपहारि काटि रहल नेँगड़ा कुकुर ओकर … केकरा लेल पूसक जाड़! – टिल्लू भाइ केर मर्मस्पर्शी कविता









