हरेक स्त्रीक जीवनक एक कविताः विकल्प
कविता – डा. प्रतिभा झा ‘उन्मेषा’, मुम्बई (मूलग्रामः विरसाइर, मधुबनी) विकल्प हम जन्मसँ एखन धरि जे सहलहुँ ओ नारी जातिक अपमान थिक। लोक कहिया धरि करत ई गुमान जे नारी सृष्टि उत्पत्तिक प्राण थिक।। जन्म लेलहुँ बेटी बनि जहिया मायक छल घोर अपमान भेल। कुलदीपक के आशा सबहक घरबैयो कहलनि फेर बेटिये भेल।। शिक्षाके अवसर … हरेक स्त्रीक जीवनक एक कविताः विकल्प








