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प्रवीण नारायण चौधरी

महिला उत्थान त दूर, रूढिवादी विचार होइछ मूल बाधा

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी नारी केँ आगू बढबय मे रूढिवादी विचारधारा सब सँ पैघ बाधक   (मिथिलानी आ मिथिला समाजक रूढिवादी सोच)   परसू एक वैवाहिक उत्सवपर आयोजित गीत-संगीत कार्यक्रम मे अतिथिक रूप मे भाग लऽ रहल छलहुँ। ओतय एकटा महिला कलाकार संग नमस्कार-पाती भेलाक बाद हम कहलियैन, “अहाँक पति आ परिवार केँ धन्यवाद महिला उत्थान त दूर, रूढिवादी विचार होइछ मूल बाधा

जय राष्ट्रवादक आड़ मे खेलबाड़

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी राष्ट्रवाद केर जयकार करू… मन्त्रीजीक इच्छा पूर करू   मन्त्रीजी जहिया गाम अबैत छथि, एक बेर अपन क्षेत्रक विभिन्न मुख्य गाम सब मे निश्चित घुमैत छथि। एहि बेर एला त एकटा विचित्र युवक भेटलनि, मन्त्रीजी कतबू बुझबथिन जे अवस्था बहुत नीक बनि गेल अछि, मुदा ओ कहैत छन्हिः   “अवस्था जय राष्ट्रवादक आड़ मे खेलबाड़

सुखी दाम्पत्य जीवन आजुक युग मे चुनौतीपूर्ण

पति या पत्नी लेल अपन चरित्रक रक्षा सर्वोच्च धर्म विचार – प्रवीण नारायण चौधरी   “आइ लव यू – आइ लव यू टू” – सिनेमाक नायक-नायिका बीचक ई डायलाग आब पुरान भेल, आब त सरेआम सोशल मीडियाक मंचपर पति आ पत्नी अपन आपसक प्रेम केँ – वैवाहिक वर्षगाँठ केँ – एक-दोसराक जन्मदिन केँ – विभिन्न सुखी दाम्पत्य जीवन आजुक युग मे चुनौतीपूर्ण

भारतीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा मैथिली पर देल गेल बयानक सच्चाई

विशेष सम्पादकीय सोशल मीडिया पर एखन भारतीय जनता पार्टीक वरिष्ठ नेता – मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर जी द्वारा भाजपा सँ निलम्बित दरभंगा संसदीय क्षेत्रक सांसद कीर्ति आजाद केर पूछल प्रश्न केर उत्तर मे मैथिली पूर्वकाल मे बेसीकाल ‘मौखिक भाषा’ रहबाक बात पर एकटा घोर असन्तोष देखल जा रहल अछि। माननीय संसाधन विकास मंत्री प्रकाश भारतीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा मैथिली पर देल गेल बयानक सच्चाई

रामकृष्ण परमहंसः एहेन संत जिनकर विचार समस्त संसार मानय लेल बाध्य भेल

श्रीरामकृष्ण परमहंस   (संत चरित – मूल लेखः स्वामी श्रीअभेदानन्दजी महाराज, स्रोतः कल्याण, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   श्रीरामकृष्ण परमहंस, एक मत सँ आधुनिक भारतक संतशिरोमणि मानल जाइत छथि। १७ फरबरी सन् १८३६ ई. केँ बंगालप्रान्तार्गत हुगली जिलाक ‘कमारपुकुर’ नामक एक अप्रसिद्ध गाम मे जन्म लेने छलाह। हिनक घरक नाम गदाधर चट्टोपाध्याय छल आर हिनक रामकृष्ण परमहंसः एहेन संत जिनकर विचार समस्त संसार मानय लेल बाध्य भेल

राष्ट्रीय महिला नाट्य उत्सव २०७४ केर समापन, मुख्य अतिथि प्रदेश प्रमुख गोविन्द तुम्बाहाङ्ग

मार्च ९, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! राष्ट्रीय महिला नाट्य उत्सव २०७४ केर तेसर आ आखिरी दिन पुनः ३ अलग-अलग रंगकर्मी समूहक महिला कलाकार द्वारा ३ गोट नाटकक प्रस्तुति देखायल गेल। आइ प्रस्तुत नाटक मे सबसँ पहिने सुशीला थापा, सांस्कृतिक संस्थान केर भव्य अभिनय मे ‘देउकासी’क प्रस्तुति कयल गेल छल जे मगर लोकसंस्कृतिपर आधारित एक अविवाहित महिला राष्ट्रीय महिला नाट्य उत्सव २०७४ केर समापन, मुख्य अतिथि प्रदेश प्रमुख गोविन्द तुम्बाहाङ्ग

राष्ट्रीय महिला नाट्य उत्सवक दोसर भारतीय नोटबन्दीक झलक सहितक ३ गोट नाटकक प्रदर्शन

विराटनगर, मार्च ७, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! राष्ट्रीय महिला नाट्य उत्सवक दोसर दिन विराटनगर केर आरोहण गुरुकुल नाटक घर मे पुनः ३ अलग-अलग रंगकर्मी समूह द्वारा ३ गोट एकल नाट्य प्रस्तुति कयल गेल अछि। आजुक पहिल नाटक ‘म रुपियाँ’ शिल्पी कला समूह काठमांडूक कलाकार बंसरी पाण्डे गाँधी द्वारा भारतीय नोटबन्दी केँ चित्रण केलक। कोना एकटा ५०० राष्ट्रीय महिला नाट्य उत्सवक दोसर भारतीय नोटबन्दीक झलक सहितक ३ गोट नाटकक प्रदर्शन

४ मार्च को मिथिला २ देश में विभाजित हुआ – सुगौली संधि दिवस पर उपवास और विचार गोष्ठी

हैदराबाद, मार्च ७, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! मिथिला सांस्कृतिक परिषद और मिथिला मंथन द्वारा विचार गोष्ठी का आयोजन हैदराबाद की दो संस्थाओं, मिथिला सांस्कृतिक परिषद एवं मिथिला मंथन के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 4 मार्च, 2018 को सोमाजीगुडा स्थित पी.सी.आर.आइ. के प्रशिक्षण हॉल में सायं 4 बजे से एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें 4 ४ मार्च को मिथिला २ देश में विभाजित हुआ – सुगौली संधि दिवस पर उपवास और विचार गोष्ठी

राष्ट्रीय महिला रंग उत्सव २०७४ केर पहिल दिन मैथिली सहित कुल ३ गोट एकल नाट्य प्रस्तुति

विराटनगर, ६ मार्च, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! आइ सँ विराटनगर केर आरोहण गुरुकुल नाटक घर मे नेपालक पहिल राष्ट्रीय महिला नाट्य उत्सव केर शुभारम्भ भेल अछि जे अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस यानि ८ मार्च धरि कुल ९ गोट महत्वपूर्ण विषय पर ९ अलग-अलग कलाकार एवं राष्ट्रक विभिन्न रंगकर्मी समूह द्वारा प्रस्तुत कयल जायत। एहि नाट्य महोत्सव केर राष्ट्रीय महिला रंग उत्सव २०७४ केर पहिल दिन मैथिली सहित कुल ३ गोट एकल नाट्य प्रस्तुति

राष्ट्रीय महिला रंग उत्सव सँ भेटत नया उर्जा आ नव सन्देशः रंगकर्मसँ मनोरंजन-जनजागरण दुनू

मिथिलाक लोकव्यवहार मे जहिना गीत-संगीत केर प्रयोग जीवनक प्रत्येक क्षण मे होएत अछि, तहिना नाट्यकर्म (रंगकर्म) सेहो मनोरंजन आ जनजागरण लेल उपयोग होइत रहबाक कतेको रास दृष्टान्त भेटैत अछि। मानव जीवन सँ जुड़ल विभिन्न परिप्रेक्ष्य केँ नाटकीय अन्दाज मे प्रस्तुत कयला सँ दर्शक केर मन-मस्तिष्क पर एकर तुरन्त प्रभाव पड़ैत अछि, विषय वर्णन संग नैतिकताक राष्ट्रीय महिला रंग उत्सव सँ भेटत नया उर्जा आ नव सन्देशः रंगकर्मसँ मनोरंजन-जनजागरण दुनू