भारतीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा मैथिली पर देल गेल बयानक सच्चाई

प्रकाश जावड़ेकर केर बयान मैथिली मौखिक भाषा सँ बवाल

विशेष सम्पादकीय

सोशल मीडिया पर एखन भारतीय जनता पार्टीक वरिष्ठ नेता – मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर जी द्वारा भाजपा सँ निलम्बित दरभंगा संसदीय क्षेत्रक सांसद कीर्ति आजाद केर पूछल प्रश्न केर उत्तर मे मैथिली पूर्वकाल मे बेसीकाल ‘मौखिक भाषा’ रहबाक बात पर एकटा घोर असन्तोष देखल जा रहल अछि।

माननीय संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकरजीक बयान बिना पूरा पढने-बुझने मैथिल समुदायक किछु विशिष्ट विद्वान् हुनकर निन्दा करय मे अपन सर्वस्व निछाबड़ कय केँ दिन-राति हदमदा रहल छथि…. एक बेर फेर आह्वान जे भाइ पहिने प्रश्न आ उत्तर पूरा पढू आ बुझू। मौखिक भाषा केकरा कहल जाएत छैक से बुझियौक। एक बाइगे मौखिक भाषाक अर्थ ‘बोलचालक भाषा’ या ‘बोली’ आदि कहनाय अहाँ केँ शोभा नहि दैत अछि। मौखिक भाषा सिर्फ ओकरा कहल जाएछ जेकर लिखित साहित्य यानि लिखित भाषा होयबाक प्रमाणक अभाव रहैत छैक। मैथिली एहि दुर्भाग्य सँ गुजरल अछि। चन्दा झा आ बहुत रास अद्यतन् विद्वान् लोकनि एहि भाषा लेल दिन-राति एक कयलनि, बहुत रास पुरनको पाण्डुलिपि सब तकलनि। प्रकाशित लिखित साहित्यक अभाव रहलैक मैथिली मे। अतः मंत्रीजीक बयान छैक जे ई बहुत समय धरि मौखिक भाषा रहल अछि। दोसर बात, जे एकर लिपि एक सँ बेसी रहल अछि। दोसर बात जे हिन्दी जेकाँ आरो बहुत रास भाषा मैथिली सहित देवनागरी केर प्रयोग बेसी करैत अछि। किताब वगैरह सेहो देवनागरी मे छपाओल जाइत अछि। विभिन्न कार्य देवनागरी मे कयल गेल अछि। कैथी सेहो किछु कालखण्ड मे मैथिलीक लिपि रहल। यैह सब कारण सँ लिपिक प्रचार-प्रसार लेल अलग सँ कोनो योजना नहि अछि। कीर्ति आजादजीक प्रश्न छलन्हि जे मैथिलीक लिपि केर प्रचार-प्रसार लेल कि सब कयल जा रहल अछि वा करय लेल प्रस्तावित अछि…. ताहि सन्दर्भ मे ओ कहलनि जे एकर लिपि केर प्रचार-प्रसार लेल अलग सँ कोनो योजना नहि अछि।

एहि सन्दर्भ मे शुरुहे सँ हुनक पूरा बयान देखबाक लेल आह्वान करैत रहल छी। बिना पूरा बात बुझने कोनो गलत आ भ्रामक समाचार सँ गलत बुझि असन्तोष धारण करब कम सँ कम मिथिलाक विद्वत् समाज केँ शोभा नहि दैछ। एहि विन्दु पर पूर्व मे सूचित कयल बात एक बेर फेर राखय चाहब।

अर्थक अनर्थ आ दुष्प्रचार – सन्दर्भ मैथिली मौखिक भाषा
 
कहले टा नहि जाएत छैक जे मिथिला आइयो विद्वानक भूमि अछि बल्कि ई बहुत हद तक सहियो छैक। तखन विद्वान् समाजक कर्णधार सपुत सब यदि एना बिना पूरा बात बुझने केकरो नीति आ नियति पर शंका करब, केकरो विषय मे अधूरा जानकारी या गलत समाचारक सन्दर्भ जोड़िकय बदनाम करब त एहि सँ ओहि व्यक्ति या नीतिकारक छवि भले कनेकाल लेल बिगड़ि जाय मुदा अहाँक अपन बहुत रास अहित होयब तय अछि।
 
सन्दर्भ छैक जे माननीय दरभंगा सांसद द्वारा मैथिलीक पढौनी हेतु विषय-वस्तु तैयार करबाक लेल राज्य केँ निर्देश देलक अछि वा नहि आ मैथिली भाषाक अपन लिपि विशेष प्रचार-प्रसार हेतु सेहो सरकार द्वारा कोनो योजना बनायल गेल अछि या नहि – ताहि पर मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा देल गेल लिखित जबाब मे मैथिली केँ ‘मौखिक भाषा’ कहि एकर प्रचार-प्रसार नहि कयल जेबाक बात एक नरेन्द्र नाथ नाम्ना पत्रकार नवभारत टाइम्स मे छापल गेल, आर फेर हमरा लोकनिक किछु मित्र, भाइ, बंधु लोकनि आमिल पीबि लेलनि। सरकारक नीति केर आलोचना मे लागि गेलाह। आर त आर, गोटेक संचारकर्मी संपादक आ मिथिला राज्य या विभिन्न आन्दोलन मे अग्र भूमिका निभेनिहार गोटेक व्यक्तित्व पर्यन्त एहि समाचारक सत्य-तथ्य बिना जँचने-बुझने सरकार आ मंत्री जावड़ेकरक थूक्कम-फझीता मे लागि गेला।
 
कनी गौर करूः
GOVERNMENT OF INDIA
MINISTRY OF HUMAN RESOURCE DEVELOPMENT
LOK SABHA
 
STARRED QUESTION NO: 139
ANSWERED ON: 05.03.2018
 
Languages included in Eighth Schedule
 
KIRTI (JHA) AZAD
 
Will the Minister of HUMAN RESOURCE DEVELOPMENT be pleased to state:-
 
(a) the languages included in the Eighth Schedule in which curriculum is
available along with the details thereof;
(b) whether the Government has issued any directions/suggestions to the Government of Bihar/concerned Department for making curriculum available in Maithili language and if so, the details thereof along with the response received from the State Government;
(c) the scripts of the languages included in the Eighth Schedule which have been protected along with the details thereof;
(d) the antiquity of the script of Maithili language and its historical importance; and
(e) the measures taken or proposed to be taken by the Government for the propagation of the script of Maithili language?
 
ANSWER
MINISTER OF HUMAN RESOURCE DEVELOPMENT
(SHRI PRAKASH JAVADEKAR)
 
(a) to (e): A statement is laid on the table of the House.
 
STATEMENT REFERRED TO IN REPLY TO PARTS (a) TO (e) OF LOK
SABHA STARRED QUESTION NO. 139 ASKED BY SHRI KIRTI AZAD FOR 05.03.2018 REGARDING LANGUAGES INCLUDED IN EIGHTH SCHEDULE
 
(a) to (e) : There are 22 languages in the Eighth Schedule of the Constitution of India. The curriculum is available in all 22 languages of the Eighth Schedule. The curriculum for teaching in any language of the Eighth Schedule is prepared by the respective State Government where the language is spoken and has official recognition. Further, Higher Educational Institutions are autonomous institutions and they decide the medium of instruction, academic content, syllabi and curricula at their own level. Hindi is one of the languages included in the Eighth Schedule and it is the Official Language of the Union in Devanagari script. Devanagari is used for writing several languages like Hindi, Sanskrit, Sindhi, Dogri, Maithili, Konkani, Bodo, etc. Some languages like Konkani, Sindhi, Santhali, Maithili are written in more than one scripts. Maithili language remained largely an oral language during the earlier periods. When Hindi was made Official Language, the script of Maithili language started to be written in Devanagari. Maithili was also written in Kaithi script for some time. The official communications and textbooks for Maithili are written in the Devanagari script. There is no separate scheme for propagation of script of Maithili language.
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स्पष्ट छैक जे सांसद आजाद कुल ५ गोट जिज्ञासा लोकसभा मे प्रश्न संख्या १३९ मार्फत रखलनि। गौर करूः
 
भारतक संविधान केर आठम अनुसूची मे सूचीकृत ओ भाषा जाहि मे पाठ्यक्रमक विकास कयल गेल अछि, सरकार द्वारा कोनो निर्देशन/सुझाव बिहार सरकार अथवा सम्बन्धित विभाग केँ मैथिलीक पाठ्यक्रम तैयार करबाक लेल देल गेल अछि आर ताहि सम्बन्ध मे राज्य सरकारक जबाबक विवरण, आठम अनुसूचीक ओ भाषा जेकर अपन लिपि हो आर तेकरा संरक्षण देबाक सरकार द्वारा कयल गेल कार्यक विवरण, मैथिली भाषाक लिपि केर प्राचीनता ओ ऐतिहासिकताक महत्व; तथा, सरकार द्वारा उठायल गेल वा उठेबाक लेल प्रस्तावित ओ डेग जाहि सँ मैथिली भाषाक लिपि केर प्रचार-प्रसार हो – यैह कुल ५ गोट जिज्ञासा माननीय सांसद आजाद द्वारा राखल गेल अछि। जेकर समग्र जबाब दैत मंत्री जावड़ेकर कहने छथि जे “भारतीय संविधानक ८म अनुसूची मे कुल २२ गोट भाषा अछि। सम्पूर्ण २२ भाषा मे पाठ्यक्रम मौजूद अछि। ८म अनुसूची मे सूचीकृत कोनो भाषा जाहि राज्य मे बाजल जाएछ आर जे राजकाजक भाषाक रूप मे सेहो मान्यता पेने अछि तेकर पाठ्यक्रम सम्बन्धित राज्य सरकार द्वारा तैयार कयल जाएछ। बाकी, उच्च शिक्षाक संस्थान स्वतंत्र अधिकार रखैत अछि, ओ सब पठन-पाठनक माध्यम भाषा, शैक्षणिक सामग्री, पठन सामग्री आ पाठ्यक्रम आदिक बारे मे स्वयं अपना तरहें निर्णय करैछ। हिन्दी सेहो ८ सूचीकृत भाषा मध्यक एक भाषा थिक जेकर प्रयोग देवनागरी लिपि मे होएछ तेकरा संघक राजकाजक भाषा होयबाक मान्यता भेटल अछि। विभिन्न भाषा जेना हिन्दी, संस्कृत, सिन्धी, डोगरी, मैथिली, कोंकणी, बोडो आदि देवनागरी प्रयोग करैत अछि। किछु भाषा यथा कोंकणी, सिन्धी, संथाली, मैथिली एक सँ बेसी लिपि मे लिखल जाएत अछि। मैथिली भाषा अधिकतर मौखिक भाषाक रूप मे पूर्वकाल मे प्रचलन मे रहल। जखन हिन्दी केँ कामकाजक भाषा बनाओल गेल, मैथिलीक लिपि सेहो देवनागरी मे लिखल जाय लागल। मैथिली किछु समय धरि कैथी लिपि सेहो लिखल जाएत रहल। मैथिली लेल प्रशासनिक पत्राचार तथा पाठ्य-पुस्तक देवनागरी मे लिखल गेल अछि। मैथिली भाषाक लिपि केर प्रचार-प्रसारक कोनो पृथक् योजना नहि अछि।
 

एहेन अवस्था मे केकरो ऊपर कोन बातक लेल अहाँ दोषारोपण करब? कनी बुझाउ। 

आब ओ युग कहाँ छैक जे हम सब दोसराक सनकेला पर सनैक जायब…. आब अहाँ स्वयं जाँचि-परैख सकैत छी जे प्रकाश जावड़ेकर – भारतीय मानव संसाधन विकास मंत्री मैथिलीक बारे मे केहेन बयान देलनि। माननीय कीर्ति आजाद जी कि सब पूछलनि। एतबा नहि, एक-एक बात केर दस्तावेजीकरण हरेक सरकारी वेब पोर्टल द्वारा कयल जाइत छैक। अहाँ स्वयं विज्ञ बनिकय देखूः नवभारत टाइम्स केर कोनो पत्रकार जँ झगड़ा लगेबाक कूचेष्टा करत त सावधान होउ।

http://164.100.47.194/Loksabha/Questions/QResult15.aspx…

पढू जे कि प्रश्न छैक आ तेकर कि जबाब छैक।

दिनांक ४ अगस्त २०१४ – मैथिली केँ अधिकारसम्पन्न बनेबाक अभियान मे लागल गोटेक गणमान्य अभियन्ता तत्कालीन सूचना तथा प्रसारण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) – माननीय प्रकाश जावड़ेकर जी सँ भेट कयलनि – ओ सब ‘डीडी मैथिली’ केर स्थापनाक मांग सहितक ज्ञापन पत्र सेहो देलखिन। मंत्रीजी बड़ीकाल धरि हिनका सभक सोझें मे अपन सचिव सँ एहि मादे जानकारी ग्रहण करैत सब बात बुझाकय कहलखिन… एक राज्य मे एक्के टा प्रसारण जेना बिहार मे ‘डीडी बिहार’ केर स्थापना संभव अछि। मिथिला राज्य त छल नहि जे डीडी मैथिली होइतैक… त मंत्रीजी एकटा भरोस देलखिन जे वैह डीडी बिहार पर आ संगहि प्रसार भारतीक सब चैनल पर मैथिली पर फोकस बढेबाक ओ निर्देशन जरूर देता। से देबो केलाह। बहुत रास धारावाहिक आ टाक-शो सब मैथिली मे शुरू भेल। आब, केकर ध्यान कतेक अछि एहि सब दिशा मे से लोक सब स्वयं बुझथि।

मीमांसा, न्याय, सांख्य, वैशेषिक, योग तथा वेदान्त – एहि छः शास्त्र मे चारि गोट पहिल उल्लेखित मिथिलाक मानस सँ विश्व केँ प्राप्त भेल। मुदा ताहि मिथिलाक किछु लोक जे इच्छा त विद्वान् कहेबाक रखैत छथि, मुदा हुनका नवभारत टाइम्स केर एक गोट संचारकर्मी कहि दैत छन्हि जे यौ विद्वान् महोदय, अहाँ ठाढ भऽ मुंह तकैत छी, ओम्हर कौआ कान लय केँ उड़ि गेल। बस…. आब कि छैक…. लगलाह विद्वान् महोदय कौआ केँ खेहारय…. ओम्हर दोसर दिने ट्रक आबि रहल छलैक राष्ट्रीय अभिलेखागारक समान लदने… बेचारे मुंहें भरे ट्रक सँ धक्का खेलनि आ संयोग सँ उछैटकय गेन्द जेकाँ सड़कक कात मे खसलाह। कौआ-कौआ… कान-कान… ओह बौआइत रहि गेलाह आ शोणित वमन होइत रहलन्हि। ओतय कियो छौंड़ा आयल… कहलकनि कक्का-कक्का… ओ तखनहु बजैत रहलाह ‘कौआ… कान’… धीरे-धीरे बेहोश होइतथि ताहि सँ पूर्वहि छौंड़ा पानि आनिकय देलकनि जे पिबू, होश करू, कान ठामहि पर अछि। बेचारे पानि पिलाह, कान छूलाह, देखलाह जे सही मे कान जगहे पर अछि।

मैथिली मौखिक भाषा थिक… प्रकाश जावड़ेकर लिखित जबाब देलखिन सांसद कीर्ति आजाद केर जबाब मे। सन्दर्भ रहैक जे प्रश्न पूछल गेल छलन्हि मैथिलीक लिपिक प्रचार-प्रसार वास्ते किछु कयल जा रहल अछि वा नहि। मन्त्रीजी क्लियर कहलखिन जे हिन्दी सहित बहुत रास भाषा जे देवनागरी प्रयोग करैत अछि आ मैथिली सेहो अपन विभिन्न कार्य आधुनिक समय मे देवनागरिये मे करैत अछि… पूर्वकाल मे ई मौखिक भाषा रहल… एकर एक सँ बेसी लिपि रहलैक…. कैथी सेहो किछु समयावधि लेल मैथिलीक लिपि रहलैक…. मैथिलीक लिपिकेर उन्नयन हेतु पृथक् सँ कोनो योजना नहि अछि। आब कि… नरेन्द्र नाथ अपना तरहें लिखलनि आ लालबुझक्कर एकरा अपनहि तरहें बुझलनि। भाइ, कौआ केँ खेहारनिहार जेकाँ केकरो एना नहि खेहारू। राजनीति करक अछि त करू, मुदा एना …. नो!

प्रकाश जावड़ेकर जी जखन सूचना तथा प्रसारण मंत्रालय सम्हारैत छलाह ताहि समय मैथिलीक किछु वीर सपुत सब हुनका सँ भेंट करैत एकटा महत्वपूर्ण ज्ञापन पत्र सौंपलक। ताहि पर ओ तुरन्त अनुशंसा सेहो कयलनि। प्रसार भारतीक सब चैनल सँ मैथिली मे प्रसारण बढेबाक निर्देश देलनि। हम सब कृतज्ञता प्रकट करबाक बदला हुनकर एकदम सटीक जबाब केँ तोड़ि-फाड़िकय बुझि रहल छी आ सौंसे सोशल मीडिया केँ घिनेने जा रहल छी। धू जी!

हरिः हरः!!