राष्ट्रीय महिला रंग उत्सव सँ भेटत नया उर्जा आ नव सन्देशः रंगकर्मसँ मनोरंजन-जनजागरण दुनू

मिथिलाक लोकव्यवहार मे जहिना गीत-संगीत केर प्रयोग जीवनक प्रत्येक क्षण मे होएत अछि, तहिना नाट्यकर्म (रंगकर्म) सेहो मनोरंजन आ जनजागरण लेल उपयोग होइत रहबाक कतेको रास दृष्टान्त भेटैत अछि। मानव जीवन सँ जुड़ल विभिन्न परिप्रेक्ष्य केँ नाटकीय अन्दाज मे प्रस्तुत कयला सँ दर्शक केर मन-मस्तिष्क पर एकर तुरन्त प्रभाव पड़ैत अछि, विषय वर्णन संग नैतिकताक शिक्षा आ मानवीय व्यवहार मे भूल-सुधार करबाक अन्तर्ज्ञान सेहो नाटकक माध्यम सँ सहजे भेटैत अछि। शास्त्र-पुराण मे वर्णित अनेकों गाथाक प्रासंगिकता केँ रंगकर्मी अपन वेश-भुषा आ बाहरी आवरण तैयार कय केँ गूढ मर्मक बात केँ हँसैत-खेलाइत दर्शकक मन-मस्तिष्क मे स्थापित करैत छथि। समाजक विभिन्न कूरीति आ आडंबरपूर्ण व्यवहारपर सेहो नाटकीय अन्दाज मे प्रहार कय लोकसमाज केँ आइना देखेबाक काज नाटक विधा नीक जेकाँ करैत अछि। कहल जाएत छैक जे सभ्यताक विकास मे नाटकक भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण होएत छैक। सहिये बात! तखन न आइ राष्ट्रक कला-संस्कृति संग रंगकर्म विधा लेल विशेष प्रयास कयल जाएत छैक।

नाटकक पात्र मे पुरुष आ महिला संग बाल कलाकार आ विभिन्न उमेरक कलासम्पन्न अभिनेता-अभिनेत्रीक जरुरत होइत छैक। जाहि चरित्रक भूमिका केँ नाटक मे देखेबाक छैक ताहि अनुकूल कलाकार भेटब अपना आप मे पैघ चुनौती होइत छैक। पुरुष कलाकार केर उपलब्धता हमरा सभक समाज मे प्रचूर मात्रा मे भेटैत अछि, लेकिन महिला कलाकारक उपस्थिति पूर्व मे काफी दयनीय देखाइत रहल अछि। एखनहुँ धरि महिला कलाकारक संख्या तेहेन उल्लेख्य नहि छैक। हलाँकि कला प्रदर्शन सँ रोजगार भेटबाक अवसर बढैत गेला सँ आब स्त्री समाज मे सेहो रंगकर्म मे सहभागिता बढैत जा रहलैक अछि, संगहि पुरान रूढिवादी विचारधारा आ अनावश्यक लाज प्रथाक औचित्य घटला सँ सेहो नारी लोकनि अपन भितर रहल कलाकार केँ अभिनय करय मे आगू बढा रहली अछि। एहि मे फिल्म आ धारावाहिक केर लोकप्रियता आ विशाल दर्शक समूहक सेहो भूमिका काफी छैक। घर-घर मे टेलिविजन आ इन्टरनेट केर प्रवेश सँ मानव समाज लेल वांछित मनोरंजनक विभिन्न स्वरूप आ ताहि मे नारी-पुरुष दुनूक सहभागिता एक रंग होयब जरूरी बुझि मैथिल समाज मे सेहो कला-रंगकर्म दिस नीक झुकाव देखल जा रहल अछि। तथापि अन्य भाषाभाषीक तुलना मे मैथिलीभाषी समाजक महिला कलाकार लोकनिक संख्या बहुत कम हेबाक चलते एखनहुँ रंगकर्म, सिनेमा, धारावाहिक, म्युजिक एल्बम आदि मे मौलिक मैथिल महिला अभिनेत्रीक भरपाई नेपाली या अन्य भाषाभाषी द्वारा कयल जाएछ।

नेपाल संगीत तथा नाट्य प्रज्ञा प्रतिष्ठान तथा सांस्कृतिक संस्थान केर अगुवाई मे महिला रंगकर्मी केर प्रोत्साहन संग आम समाज मे सेहो एहि क्षेत्र मे बेसी सँ बेसी लोकक सहभागिता वास्ते नेपालक औद्योगिक नगरी विराटनगर मे राष्ट्रीय महिला रंग उत्सव केर त्रि-दिवसीय आयोजन कयल गेल अछि। देशक विभिन्न भाग सँ ९ गोट नाटक समूहक महिला कलाकार एखन एतय आयल छथि। ओ सब एकल प्रस्तुति देखेती। विभिन्न भाषाभाषीक कथा-गाथाक माध्यम सँ समाजक वर्तमान स्वरूप केँ देखाओल जायत। राष्ट्र भरिक मीडियाक नजरि एहि महोत्सव मे बनल रहत। हरेक नाटकक कथा-गाथा आ प्रदर्शित कलाकारिताक चर्चा पसरत। एहि सँ नव उर्जाक संचरण होयत आर महिला रंगकर्मी एहि महत्वपूर्ण विधा सँ एकटा नीक कैरियर निर्माण प्रति साकांक्ष हेती। आइ जेना विद्यालयक बच्चा मे सेहो लैंगिक विभेद समाप्त कय कला-प्रदर्शन लेल एक रंग शिक्षा देल जा रहल अछि, तेकर सही उपयोग आगू जा कय मनोरंजन आ जनजागरणक एहि विधा मे सेहो हुनका सबकेँ भेटतनि। एहि सँ समाज प्रगतिशील बनत से सुनिश्चित अछि।