गायक सेवा सँ आत्मनिर्भरता, एक विलक्षण संस्मरण
विचार – प्रवीण नारायण चौधरी गोसेवा आ पशुपालन – कृषि सँ आत्मनिर्भरतः मानव जीवनक सब सँ पैघ काज आइ कनेक एम्हर-ओम्हर मे व्यस्त भऽ गेल रही ताहि सँ समय पर किछु शब्द-संस्मरण-वार्ता आगू नहि आनि सकलहुँ….! तथापि, भोर जखन होएत छैक त ओ दिन केहेन होयत तेकर संकेत प्रकृति केर किछु पदचाप सँ कय दैत … गायक सेवा सँ आत्मनिर्भरता, एक विलक्षण संस्मरण









