मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड दोसर अध्यायः रावण केर हितैषी सब संग विचार-विमर्श, विभीषणक चेतावनी
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – दोसर अध्याय रावण केर हितैषी सब संग विचार-विमर्श, विभीषणक चेतावनी ।चौपाइ। रावण मन मन कर अनुमान । लङ्का डाहि गेल हनुमान ॥१॥ बड़ आश्चर्य कहू की आन । अक्षयकुमार लेलक प्राण ॥२॥ सभा कयल निज लोक हकारि । रावण-वचन देथि के टारि ॥३॥ तखन … मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड दोसर अध्यायः रावण केर हितैषी सब संग विचार-विमर्श, विभीषणक चेतावनी







