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प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड आठम अध्यायः कुम्भकर्णक वध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – आठम अध्याय कुम्भकर्णक वध ।सोरठा। शुनल वचन लङ्केश, कुम्भकर्ण समुचित कहल ॥१॥ मानल हृदय कलेश, क्रोधातुर चहलनि उठय ॥२॥ शिखइक नहि अछि ज्ञान, बजबाओल से काज करु ॥३॥ जाउ जौँ मन किछु आन, करु सुषुप्ति निद्रा-विकल ॥४॥ भावार्थः कुम्भकर्णक कहल उचित वचन रावण सुनलक मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड आठम अध्यायः कुम्भकर्णक वध

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड सातम अध्यायः रूपमालीक कथा, हनुमानद्वारा कालनेमि राक्षसक संहार

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – सातम अध्याय रूपमालीक कथा, हनुमानद्वारा कालनेमि राक्षसक संहार ।चौपाइ। ललकि उठल रावण खिसिआय । कालनेमि-मुह गेल सुखाय ॥१॥ रामचन्द्र मे तोहरा प्रीति । के न कहत थिक बहुत अनीति ॥२॥ अभिप्राय हमरा किछु आन । ई शिखबय लगला अछि ज्ञान ॥३॥ करह करह गय मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड सातम अध्यायः रूपमालीक कथा, हनुमानद्वारा कालनेमि राक्षसक संहार

हिन्दीक महत्व आ मैथिलीक कमजोरी

आदरणीय श्रेष्ठजन दिलीप भाइसाहब ! अपनेक चिन्तनयुक्त पोस्ट जाहि मे मैथिली लेल चिन्ता छल आ हिन्दी प्रयोगक आधिक्यक प्रतिकार, हमर ध्यानाकर्षण कयलक । किछु लिखबाक इच्छा जागि गेल जे निम्न अछि । संसार मे सभक अपन गति छैक । सब अपना हिसाब सँ एकटा मार्ग सुनिश्चित करैत अछि आ तदनुसार जीवन मे अग्रसर भेल करैत हिन्दीक महत्व आ मैथिलीक कमजोरी

मान इन्टरनेशनल अवार्ड लेल नोमिनेशन कार्य शुरू

विज्ञापन किछु अलग आ नव प्रयास   बन्धुगण!   मैथिली एसोसिएशन नेपाल विराटनगर द्वारा आगामी ३० नवम्बर २०२४ एकटा महत्वपूर्ण आयोजन राखल गेल अछि । प्रयास ई अछि जे मैथिलीभाषी संग सहयात्रा मे रहल अन्य भाषाभाषी केँ अवार्ड प्रदान करैत मैथिली संग जोड़ल जाय । संलग्न पोस्टर मे विस्तृत जानकारी देल गेल अछि । अहाँ मान इन्टरनेशनल अवार्ड लेल नोमिनेशन कार्य शुरू

शास्त्रीय भाषाक दर्जा सं कियै चूकि गेल मैथिली

लेखः शास्त्रीय भाषाक दर्जा सं कियै चूकि गेल मैथिली – रमण कुमार सिंह हालहि में केंद्र सरकार मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया आ बंगाली कें ‘शास्त्रीय भाषा’ केर दर्जा देलकै, जाहि सं भारत मे शास्त्रीय भाषाक संख्या बढ़िकें 11 भ गेल अछि । शास्त्रीय भाषाक दर्जा पाबै के दौड़ मे मैथिली सेहो छल, जेकरा तकनीकी कारणवश शास्त्रीय शास्त्रीय भाषाक दर्जा सं कियै चूकि गेल मैथिली

प्रतिस्पर्धा हमेशा स्वस्थ आ सार्थक होयबाक जरूरत

ई बात एना बुझियौक प्रतिस्पर्धा स्वस्थ आ सार्थक होयब परम जरूरी होइत छैक । याद करू त ! बच्चा उम्र सँ विद्यालय-महाविद्यालय धरिक पढ़ाइ व खेल मे कि सिखायल गेल अहाँ केँ ? ध्यान देबय त देखबय जे मात्र प्रतिस्पर्धा करब सिखायल जाइछ हमरा – अहाँ केँ । जी, प्रतिस्पर्धाक अर्थ भेल जे केकर माथ-मन-बुद्धि-ज्ञान-कर्म-प्राण प्रतिस्पर्धा हमेशा स्वस्थ आ सार्थक होयबाक जरूरत

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – छठम् अध्यायः रावण केर राम संग युद्ध करब, लक्ष्मण केँ शक्तिबाण लागब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – छठम् अध्याय रावण केर राम संग युद्ध करब, लक्ष्मण केँ शक्तिबाण लागब ।सोरठा। जखन शुनल बिस-कान, समर शयित अतिकाय-गण ॥१॥ दशमुख शोक-मलान, कोप-विवश हलचल पड़ल ॥२॥ भावार्थः रावण ई समाचार सुनल जे अतिकाय आदि सेनापति मारल गेल । ई सुनिकय ओ शोक सँ मलिन मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – छठम् अध्यायः रावण केर राम संग युद्ध करब, लक्ष्मण केँ शक्तिबाण लागब

मनन करय योग्य – आचरणभ्रष्टता सँ पतन

स्वाध्याय – अनुवादित लेख आचरणभ्रष्टता सँ पतन (मूल लेखकः अज्ञात स्रोतः कल्याण वर्ष ९२ संख्या ११ अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) ब्रह्मवैवर्तपुराण मे एकटा कथा छैक जे एक बेर देवराज इन्द्र निर्जन वन मे एक गोट पुष्पोद्यान (फुलबारी) मे गेल छलाह । ओहिठाम हुनका रम्भा नामक अप्सरा भेटलखिन्ह । तदनन्तर ओ दुनू गोटे जलविहार करय लगलाह मनन करय योग्य – आचरणभ्रष्टता सँ पतन

चिनियाबदामी (टाइमपास) युगसँ आगू बढ़ैत साहित्य अकादेमीमे मैथिली

किसलय कृष्ण, मधेपुरा । ३० सितम्बर २०२४, मैथिली जिन्दाबाद!! चिनियाबदामी (टाइमपास) युगसँ आगू बढ़ैत साहित्य अकादेमीमे मैथिली संदर्भ : फणीश्वरनाथ रेणु आ मैथिली – परिसंवाद साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली आ मधेपुरा कॉलेज मधेपुराक संयुक्त तत्वावधानमे काल्हि सम्पन्न परिसंवादक परिप्रेक्ष्यमे विगत पन्द्रहियासँ बिहारक भाषायी राजनीतिमे हिलकोर उठल छल आ तें काल्हि आयोजन स्थल पर मिथिले नहि चिनियाबदामी (टाइमपास) युगसँ आगू बढ़ैत साहित्य अकादेमीमे मैथिली

दर्शन-चिन्तनः पक्षपातक आघात सुनिश्चित

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी पक्षपातक आघात – न्यायी व अन्यायी सभक लेल (दर्शन-चिन्तन) गीताक ज्ञान समग्र मे यैह छैक जे अपन कर्त्तव्य व कर्म प्रति साकांक्ष रहैत कर्म करैत रहू । अर्जुन द्वारा सारथि स्वयं श्री कृष्ण रहितो आखिरकार अपन मन मे उठल क्षोभ जे युद्धक मैदान मे अपनहि लोक सँ केना लड़ब, कथी दर्शन-चिन्तनः पक्षपातक आघात सुनिश्चित