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प्रवीण नारायण चौधरी

कवि सम्मेलन मे कविजीक वाहवाही

कविजी वाहवाह (आलोचना – प्रवीण नारायण चौधरी) पूरा पंडाल लोक सँ भरल छल । तखनहि मंच पर घोषणा भेल जे गीतनादक बाद ‘कवि-गोष्ठी’क सत्र चलत । मैथिली भाषा मे कवि सभक दशा एहने छन्हि जे आधा पंडाल ‘कवि-गोष्ठी’क नाम सुनिते चलि देलक । मैदानक बाहर कियो झाल-मुरही खा कय समय बिता रहल छल, कियो चाह कवि सम्मेलन मे कविजीक वाहवाही

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – तेरहम अध्यायः देवता लोकनिक राम-स्तुति – अयोध्या प्रस्थान

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – तेरहम अध्याय सब देवता लोकनिक राम केर स्तुति करब, अग्निदेव द्वारा वास्तविक सीताक लौटायब, राम केर सदल-बल अयोध्या लेल प्रस्थान ।चौपाइ। ऐरावत पर चढ़ि सुरराज । समीचीन श्री-शची समाज ॥१॥ सहस्राक्ष अयला तहिठाम । सुरगण सहित गबैत गुणग्राम ॥२॥ यम ओ वरुण कुबेर समेत मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – तेरहम अध्यायः देवता लोकनिक राम-स्तुति – अयोध्या प्रस्थान

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – बारहम अध्याय: विजयोपरान्त राम द्वारा विभीषण आदिक प्रति कृतज्ञता-ज्ञापन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – बारहम अध्याय विजयोपरान्त राम द्वारा विभीषण आदिक प्रति कृतज्ञता-ज्ञापन देखि विभीषण ओ हनुमान । अङ्गद लक्ष्मण कीश प्रधान ॥१॥ जाम्बवान आदिक रणधीर । सभ काँ तुष्ट कहल रघुवीर ॥२॥ अहँ सभहिक बाहुक बल पाबि । मारल रावण लङ्का आबि ॥३॥ यावत रवि शशि नभ मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – बारहम अध्याय: विजयोपरान्त राम द्वारा विभीषण आदिक प्रति कृतज्ञता-ज्ञापन

महादेव – केना प्रसन्न होइत छथि (भाग १)

महादेव – प्रवीण नारायण चौधरी देवहु केर देव ‘महादेव’ अपन भोलेनाथ रूप मे अर्थात दया आ कृपादृष्टि सँ भक्त केँ नेहाल करयवला मानल जाइत छथि । तहिना महाकाल रूप मे कोप करैत असुरक विनाश करनिहार सेहो मानल जाइत छथि । महादेवक रूप-स्वरूप आ परिवेश सेहो बहुत गहींर दर्शन प्रस्तुत करैत अछि । जतेक मन्थन करब महादेव – केना प्रसन्न होइत छथि (भाग १)

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड एगारहम अध्यायः राम आ रावण केर प्रचण्ड युद्ध तथा रावणक वध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – एगारहम अध्याय राम आ रावण केर प्रचण्ड युद्ध तथा रावणक वध ।चौपाइ। एहि चिन्ता मे भय गेल भोर । वानर भालु द्वार कर शोर ॥१॥ रे दशकण्ठ लण्ठ बहराह । राम-शरानल शलभ समाह ॥२॥ चारू द्वार नगर घर घेर । रावण काँ तृणवत नहि मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड एगारहम अध्यायः राम आ रावण केर प्रचण्ड युद्ध तथा रावणक वध

पं. त्रिलोकनाथ स्मृति समारोह सह ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ पोथीक लोकार्पण – प्रवीण संस्मरण

१२ नवम्बर २०२४, विराटनगर । मैथिली जिन्दाबाद !! पंडित त्रिलोकनाथ स्मृति समारोह सँ विराटनगर आबिकय….. अपन कौलिक मर्यादा केँ अपन कर्म, आचरण व निष्ठा सँ आगू बढ़ेनिहार व्यक्तित्व आचार्य धर्मेन्द्र नाथ मिश्र द्वारा रचित पोथी “धर्मो रक्षति रक्षितः” केर लोकार्पण ‘पंडित त्रिलोकनाथ स्मृति समारोह’ मे कयल गेल । एहि समारोहक मुख्य अतिथि झारखण्ड उच्च न्यायालय पं. त्रिलोकनाथ स्मृति समारोह सह ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ पोथीक लोकार्पण – प्रवीण संस्मरण

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड दसम अध्यायः रावणक शुक्राचार्य सँ मंत्र लय साधना करब तथा राम द्वारा विघ्न

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड दसम अध्याय रावणक शुक्राचार्य सँ मंत्र लय साधना करब तथा राम द्वारा विघ्न ।चौपाइ। रावण मन मन मानल हारि । महि नहि रहल शूर शक्रारि ॥१॥ मारुत-सुत-बल हृदय विचारि । जनिक मुष्टि शत-अशनि प्रहारि ॥२॥ शुक्रक निकट गेला अति दीन । बद्धाञ्जलि राजस-रस-हीन ॥३॥ शुक्र पुछल मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड दसम अध्यायः रावणक शुक्राचार्य सँ मंत्र लय साधना करब तथा राम द्वारा विघ्न

विराटनगर मे काली पूजनोत्सवक सफलतम् ६ वर्ष पूर्ण

विराटनगर मे काली पूजाक छठम् वर्ष अप्पन ब्राह्मण समाज विराटनगर अपन स्थापना वर्ष २०१९ ई. सँ निरन्तर विराटनगर मे काली पूजा मनेबाक पुनीत काज करैत आबि रहल अछि । सर्वसमाज आ सर्वहित-सर्वमानव कल्याण निमित्त सुन्दर संकल्प संग ई आयोजन कयल जाइछ । एहि वर्ष २०२४ मे आचार्य धर्मेन्द्रनाथ मिश्र द्वारा एहि भावक संकल्प पूजा संकल्पकर्त्ता विराटनगर मे काली पूजनोत्सवक सफलतम् ६ वर्ष पूर्ण

विद्यापतिक पदावली आ ओकर सहज भावार्थ

१. ३१ अक्टूबर २०२४, विराटनगर (दीपावली पाबनि दिन सँ शुभारम्भ) वन्दना – महाकवि विद्यापति नन्दक नन्दन कदम्बक तरु-तर धिरे धिरे मुरलि बजाव ।१। समय सँकेत-निकेतन बइसल बेरि बेरि बोलि पठाव ॥२॥ सामरि, तोरा लागि अनुखन विकल मुरारि ।३। जमुनाक तिर उपवन उदबेगल फिरि फिरि ततहि निहारि ॥४॥ गोरस बेचए अबइत जाइत जनि जनि पुछ बनमारि विद्यापतिक पदावली आ ओकर सहज भावार्थ

मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – नवम अध्याय: मेघनादक तान्त्रिक साधना मे बाधा तथा ओकर वध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – नवम अध्याय मेघनादक तान्त्रिक साधना मे बाधा तथा ओकर वध ।जयकरी छन्द। कहल विभीषण समय-विचार । प्रभु सर्व्वज्ञ कयल स्वीकार ॥१॥ लक्ष्मण काँ कहलनि अहँ जाउ । खल बधि समर अमर बनि आउ ॥२॥ हनुमदादि यूथप सङ्ग रहथि । सन्मुख तनिक प्रहार जे मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – नवम अध्याय: मेघनादक तान्त्रिक साधना मे बाधा तथा ओकर वध