सामाजिक संजाल आ रतिचर मनुक्ख केर कथा
कथा – प्रवीण नारायण चौधरी रतिचर सामाजिक संजाल मे राति भरि जागि-जागि उचकपनी-बतहपनी कयनिहार केँ रतिचर कहि रहल छी। मनुष्य केँ सुतबाक समय मे जागिकय मोबाइल पर लागल रहय के अवगुणक कारण ‘रतिचर’ कहब कोनो अतिश्योक्ति नहि होयत से आशा करैत छी। दिन मे जेना रतिचर केँ चोन्हरी लागि जाइछ आ राति मे घुमि-घुमिकय … सामाजिक संजाल आ रतिचर मनुक्ख केर कथा








