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प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड छठम अध्याय – रावणक मारीच लग गेनाय आ मारीचक माया-मृग रूप धारण कयनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड छठम अध्याय रावणक मारीच लग गेनाय आ मारीचक माया-मृग रूप धारण कयनाय ।चौपाइ। रथमे जोड़ घोड़ बड़ जोर । चलल दशानन चिन्तित भोर ॥१॥ जत मारीच समुद्रक पार । पहुँचलाह सत्वर अविचार ॥२॥ छल समाधि-गत ओ मारीच । से न जान जग ऊँच कि नीच ॥३॥ मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड छठम अध्याय – रावणक मारीच लग गेनाय आ मारीचक माया-मृग रूप धारण कयनाय

मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड अध्याय पाँचम – सूर्पनखाक नाक-कान काटल जायब आ खर-दूषणक बध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अरण्यकाण्ड – अध्याय पाँच सूर्पनखाक नाक-कान काटल जायब, खर-दूषण केर बध ।चौपाइ। पञ्चवटी गोदावरि कात । आइलि सूर्पनखा उत्पात ॥१॥ कमल कुलिश अंकुश पद – रेख । अङ्कित अवनि रमनि से देख ॥२॥ जनु जगतीपति कयल निवास । सूर्पनखा मन काम विलास ॥३॥ गौलि कुटीतट गमयित मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड अध्याय पाँचम – सूर्पनखाक नाक-कान काटल जायब आ खर-दूषणक बध

मिथिला सौन्दर्य प्रतियोगिताक आयोजक द्वारा सामुहिक रक्तदान जनकपुर मे सम्पन्न भेल

अनुज मिश्र, जनकपुर। २ जून २०२४ । मैथिली जिन्दाबाद। ‘मिथिला सौन्दर्य प्रतियोगिता’ केर आयोजक संस्था पीआरजेड ग्रुप द्वारा रक्तदान कार्यक्रम सम्पन्न भेल । ३१ मई, शुक्र दिन पि आर जेड र इभेन्ट कम्पनी प्रा. लि. द्वारा आयोजित रक्तदान कार्यक्रम जनकपुरक सेभलाइफ हस्पिटल एण्ड रिसर्च सेन्टर मे सम्पन्न भेल अछि । कार्यक्रम मे ३६ गोटे सहभागी मिथिला सौन्दर्य प्रतियोगिताक आयोजक द्वारा सामुहिक रक्तदान जनकपुर मे सम्पन्न भेल

सीताजीक कलियुगी वकील सभक लेल प्रवीण विचार

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी सीताजीक कलियुगी वकील   अक्सर देखय मे अबैत अछि जे सीताजीक अग्नि-परीक्षा, सीताजी पर अनावश्यक शंका आ लोकनिन्दा, राजा रामचन्द्र द्वारा पत्नीरूपी सीताक गर्भवती अवस्था मे परित्याग, पुनः धर्म-कर्म मे सीताजीक स्थान पर मूर्तिरूपी सीताक प्रयोग कय कर्मकाण्ड पूरा करबाक उद्धरण, लव-कुश द्वारा स्वयं केँ श्री रामचन्द्र केर पुत्र रूप सीताजीक कलियुगी वकील सभक लेल प्रवीण विचार

मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड चारिम अध्याय – रामजीक जटायु सँ भेंट तथा लक्ष्मणजी केँ ज्ञानोपदेश

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अरण्यकाण्ड – चारिम अध्याय रामजीक जटायु सँ भेंट तथा लक्ष्मणजी केँ ज्ञानोपदेश  ।चौपाइ। शैलशृङ्ग सम सन एकटा गृद्ध । देखलनि राम बाट पर वृद्ध ॥१॥ मुनि – भक्षक राक्षस सन लाग । असुआयल अछि तैँ नहि जाग ॥२॥ लक्ष्मण धनुष हाथ कय देब । चटपट प्राण मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड चारिम अध्याय – रामजीक जटायु सँ भेंट तथा लक्ष्मणजी केँ ज्ञानोपदेश

मई महिना मानसिक स्वास्थ्य प्रति जागरुकताक महिना मानल जाइछः मनोपरामर्शदात्री ज्योति झा

स्वास्थ्य सचेतना – ज्योति झा, मनोपरामर्शदात्री, काठमांडू मई महीना मानसिक स्वास्थ्य जागरुकताक महीना सन् १९४९ सँ अंग्रेजी महीना मई केँ मानसिक स्वास्थ्य जागरुकताक महीना मानल जाइत अछि। एकर शुरुआत मेन्टल हेल्थ अमेरिका द्वारा कयल गेल। एकर मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्यक बारे उपयोगी जानकारीक प्रसार, समाज मे व्याप्त मानसिक समस्या प्रति विभिन्न नकारात्मक सोच सब न्यून मई महिना मानसिक स्वास्थ्य प्रति जागरुकताक महिना मानल जाइछः मनोपरामर्शदात्री ज्योति झा

मूल भाषा सँ कहियो नहि भटकू

सम्पादकीय मूल भाषा सँ कहियो नहि भटकू अपन मूल पहिचान सँ दूर होयब आजुक फैशन बनि गेल अछि। स्वयं अपन भाषाक प्रयोग करय मे लज्जाबोध अथवा हीनताबोध अपूर्ण ज्ञान आ जीवन मे भटकल लक्ष्य रखबाक एक तरहक बीमारीक लक्षण होइछ। परञ्च बेसी लोक एहि तरहक नकारात्मकताक शिकार परिवेश आ परिस्थितिक कारण भ’ गेल करैत अछि। मूल भाषा सँ कहियो नहि भटकू

मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड तेसर अध्याय – रामजीक अगस्त्य मुनिक आश्रम पर पहुँचब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड तेसर अध्याय  रामजीक अगस्त्य मुनिक आश्रम पर पहुँचब ।चौपाइ। मुनि सभकाँ जानल व्यवहार । सत – स्वागत फलमूलाहार ॥१॥ प्रभु एक दिन तहि थल रहलाह । प्रात भेल कहि कहि चललाह ॥२॥ मुनि अगस्ति – मण्डली प्रवेश । सभ ऋतु फल फुल लागल बेश ॥३॥ मृग मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड तेसर अध्याय – रामजीक अगस्त्य मुनिक आश्रम पर पहुँचब

मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड दोसर अध्याय – शरभंग ऋषिक मुक्ति एवं सुतीक्ष्ण मुनिक आश्रम पहुँचब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड अध्याय दोसर – शरभंग ऋषिक मुक्ति तथा सुतीक्ष्ण मुनिक आश्रम पहुँचब ।चौपाइ। स्वगत भेला जखन विराध । तखन गगन सुरजन सम्बाध ॥१॥ प्रभु सानुज वैदेही सङ्ग । गेला ततय जतय शरभङ्ग ॥२॥ आयल छथि वन श्रीभगवान । मुनि जानल साधन विज्ञान ॥३॥ सत्वर विधि विष्टर देल मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड दोसर अध्याय – शरभंग ऋषिक मुक्ति एवं सुतीक्ष्ण मुनिक आश्रम पहुँचब

पारसमणि

कथा – प्रवीण नारायण चौधरी पारसमणि   एहि संसार मे एकटा चमत्कारी पाथर होइत छैक जेकरा पारसमणि कहल जाइछ। पारसमणि एकटा परिकल्पना सेहो भ’ सकैत छैक, कारण ई वास्तविकता मे मनुष्य केँ कतहु प्राप्त नहि भेल आ अधिकांशतः पौराणिक कथा-गाथा धरि मात्र सीमित रहल। कहबी त ईहो छैक जे टिटही जेहेन चिड़ै अपन अण्डा पारसमणि पारसमणि