Search

प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिली फिल्म ‘लेबर’ के तैयारी जोर पर

मैथिली फिल्म ‘लेबर’ – जबरदस्त तैयारी संग टीम निर्माण भ’ रहल अछि मैथिली फिल्म जगत सँ एकटा आर बड पैघ खुशखबरी अछि। कौलीवुड (काठमांडू) सँ फिल्म निर्देशक पूर्णेन्दु के. झा द्वारा ‘लेबर’ सिनेमाक आधारभूत तैयारी लगभग पूरा कय लेल जेबाक जनतब भेटल अछि। बहुत जल्द पात्र चयन लेल अडिसन आ सूटिंग सब आरम्भ होयत। तदनुसार मैथिली फिल्म ‘लेबर’ के तैयारी जोर पर

प्रिया मल्लिक – चर्चित मैथिली गायिका

पोस्ट साभार फेसबुकः श्री अनूप नारायण सिंह जीक वाल सँ (हिन्दी सँ मैथिली मे रूपान्तरित – प्रवीण नारायण चौधरी) #मिलिए_पटना_की_फुलझड़ी_प्रिया_मल्लिक_से – मूल शीर्षक मे प्रकाशित ई लेख अत्यन्त आकर्षक आ गर्वबोध करबयवला लागल, तेँ साभार फेसबुक एकर मैथिली रूपान्तरण एतय राखि रहल छी। खनक आ मखमली आवाज केर मल्लिका प्रिया मल्लिक आइ के तारीख मे प्रिया मल्लिक – चर्चित मैथिली गायिका

किछु गूढ़ चिन्तन (कर्मयोग – गीताक तेसर अध्याय)

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी किछु गूढ़ चिन्तन (कर्मयोग – गीताक तेसर अध्याय)   गीताक तेसर अध्याय मे भगवान् कृष्ण मनुष्य द्वारा कर्म केना-केना कयल जाइछ, ताहि पर विशद चर्चा कएने छथि। आइ हम बड़ा संछेप मे एहि अध्यायक समग्रता पर चर्चा करैत किछु बात राखय चाहैत छी –   अध्याय २ मे भगवान् कृष्ण किछु गूढ़ चिन्तन (कर्मयोग – गीताक तेसर अध्याय)

मैथिली फिल्म केर सफलताक नव सूत्रः लोकसाहित्य

मैथिली फिल्म – सफलताक नया सूत्र भेटि गेल? (तीरभूक्ति पत्रिका मे प्रकाशनार्थ) – प्रवीण नारायण चौधरी बहुल्यजन मे भाषिक चेतनाक प्रसार संगहि मैथिली फिल्म केर सफलताक नव इतिहास लिखाय लागत। ‘राजा सलहेश’ लोकदेवताक रूप मे पूज्य छथि। लगभग-लगभग प्रत्येक गाम मे राजा सलहेश प्रति आस्था रखनिहार बहुजन समाज भेटिये टा जायत। वोटबैंक केर राजनीति भले मैथिली फिल्म केर सफलताक नव सूत्रः लोकसाहित्य

राजा सलहेश फिल्मक किछु मसाला गीत पर उपदेश देबाक पोंगापन्थ

देख रहल छी सबटा….. सन्दर्भ मैथिली फिल्म “राजा सलहेश” जेकरा मैथिली भाषा-साहित्य, संचार, फिल्म आदि सँ सब दिन घृणे रहल, जेकर फेसबुक के पोस्ट पर्यन्त अपन मातृभाषा मैथिली मे कहियो नहि भेल, सेहो आइ ‘राजा सलहेश’ फिल्म रिलीज भेलाक बाद अपन मातृभाषा मैथिली, ताहि मे रिलीज भेल सिनेमा, मिथिलाक लोकदेव राजा सलहेश, हुनक पवित्र श्रुति राजा सलहेश फिल्मक किछु मसाला गीत पर उपदेश देबाक पोंगापन्थ

दहेज प्रथा या कुप्रथा?

दहेज प्रथा कि कुप्रथा   “निश्चित बेटीक माय-बापक हाथ छनि दहेज कै बढ़ावा देबा मे। बेटी केँ दहेजक बलि-वेदी पर चढ़ेबा मे सेहो कतहु न कतहु हमहीं सभ दोषी छी, कियैकि सामर्थ्य सँ बेसी दहेज दऽ कय सरकारी नौकरीबला वर आनि गौरवान्वित महसूस करैत छी। हमरा बूझने जौं ओ सामर्थ्य हम सब अपन बेटी केँ दहेज प्रथा या कुप्रथा?

मिथिलाभाषा रामायणः अयोध्याकाण्ड छठम् अध्याय – गंगा पार करब

स्वाध्याय पाठ कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अयोध्याकाण्ड – छठम् अध्याय गंगा पार करब  ।चौपाइ। ।मिथिलासंगीतानुसारेण नामान्तरेण च योगिया-मालव-छन्दः। लक्ष्मण सौँ गुह कहल निषाद । राम-दशा देखि चित्त विषाद ॥१॥ देखिअ रामचन्द्र गति भाय । सुख-सुषुप्त कुश घास ओछाय ॥२॥ मणिपर्य्यङ्क भवन रमणीय । जेहन इन्द्र-सुखकर कमनीय ॥३॥ शुदिनि मन्थरा की अधलाहि । तकरे कहलेँ रानि मिथिलाभाषा रामायणः अयोध्याकाण्ड छठम् अध्याय – गंगा पार करब

मिथिलानी कनियाँ (काव्य)

काव्य – काजल चौधरी, योग प्रशिक्षिका, नई दिल्ली मिथिलानी कनियाँ (कनियाँ = पुतोहु, daughter-in-law) हम छी मिथिलानी कनियाँ घूँघट लैपटौप संग रखय छी! फायल मे माथा ओझराबी क्लाइंट्स सभक दुःख केँ मेटाबी घर आबि जखनहि पड़य छी सासु ननदि के बोल सुनै छी! हम छी मिथिला के नारी करौछ आ मोबाइल दुनू रखय छी हम मिथिलानी कनियाँ (काव्य)

मिथिलाभाषा रामायण – अयोध्याकाण्डः पाँचम अध्याय – श्री राम, सीता ओ लक्ष्मणजीक वन लेल प्रस्थान

स्वाध्याय पाठ कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण  अयोध्याकाण्ड – पाँचम अध्याय वन के लेल राम, लक्ष्मण आ सीताक प्रस्थान ।चौपाइ। ।राग-तरङ्गिणी-ग्रन्थानुसारेण मंगलराज-विजय छन्दः। केकयि कयल कुठाठ कठोर । गुपचुप रहल न भय गेल सोर ॥१॥ केकयि-कृत शुनि शुनि उतपात । कह पुरजन बड़ कयलक घात ॥२॥ देति राम काँ विपिन पठाय । देखल न एहन कसाइनि मिथिलाभाषा रामायण – अयोध्याकाण्डः पाँचम अध्याय – श्री राम, सीता ओ लक्ष्मणजीक वन लेल प्रस्थान

सामाजिक संजाल आ हमर मिथिला

सामाजिक संजाल आ हमर मिथिला ‘संजाल कि जंजाल?’ – विषय पर गम्भीर विमर्श कयल गेल छल हालहि आयोजित जनकपुर साहित्य कला आ नाट्य महोत्सव मे। संजाल सँ सार्थकता-सकारात्मकताक भान होइत छैक, जंजाल सँ निरर्थकता या नकारात्मकताक। २००७ सँ संजालक सक्रिय उपयोग करैत हमर अनुभव संजालहि केर रहल, जंजाल किन्नहुं नहि बुझायल। अति सर्वत्र वर्जयेत – सामाजिक संजाल आ हमर मिथिला