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प्रवीण नारायण चौधरी

वेदक उपांग ‘पुराण’ – वेदक आवर्धक काँच

The Upaangas: Puraanas – Veda’s Magnifying Glass The Puraanas can be called the ‘magnifying glass’ of the Vedas, as they magnify small images into big images. The Vedic injunctions which are contained in the form of pity statements are magnified or elaborated in the form of stories or anecdotes in the Puraanas. A brief exposition वेदक उपांग ‘पुराण’ – वेदक आवर्धक काँच

विद्यापति गीत – श्रीकृष्ण नायिका राधाक रूप-वर्णन (भक्तिभावक व्याख्या सहित)

विद्यापति गीत – महाकवि विद्यापति आजु देखल जति के पतिआएत अपुरुब बिहि निरमान रे । जुगल सैल-सिम हिमकर देखल एक कमल दुइ जोति रे । फुललि मधुरि फुल सिंदुर लोटाएल पाँति बइसलि गज-मोति रे ॥ बिपरित कनक कदलि-तर सोभित थल-पंकज के रूप रे ॥ तथहु मनोहर बाजन बाजए जनिजागे मनसिज भूप रे । भनइ विद्यापति विद्यापति गीत – श्रीकृष्ण नायिका राधाक रूप-वर्णन (भक्तिभावक व्याख्या सहित)

लेख-विचारः फिल्म, समाज आ हम

फिल्म, समाज आ हम प्रवीण नारायण चौधरी फिल्मी फैशन आ पोज केर बहुत पैघ प्रभाव समाज पर पड़ल अछि । एहेन कियो नहि जे ‘सिल्वर स्क्रीन’ पर प्रस्तुत काटल-छाँटल ‘रिल्स’ द्वारा गोटेक घन्टा मे ‘मानव जीवन’ सँ जुड़ल अनेकों ‘कथा-गाथा’ प्रस्तुति सँ स्वयं केँ बचा सकल हो । एकर सर्वाधिक प्रभाव छौंड़ा माँरड़ि पर पड़ैत लेख-विचारः फिल्म, समाज आ हम

महाकवि विद्यापतिक दर्शन – स्मरण – सुमिरन आ मनन सँ मानव जीवन सफल होइछः प्रवीण संस्मरण

चमत्कार सँ साक्षात्कार महाकवि विद्यापतिक यैह तस्वीर उमेश भाइसाहब (बीरगंज सँ विराटनगर यात्रा आ संकल्पानुसार विद्यापति स्मृति समारोहक आयोजन मे) सहयोगीक भूमिका निभेनिहार प्रवीण केँ देने रहथि । प्रेम नारायण झा – हमर जेठसारक लाट मे ‘बहिनोइ’ केर सम्मान दैत कहने रहथि – “चौधरीजी, हिनकर नित्य स्मरण सँ मानव जीवन सफल जाइत अछि । हिनका महाकवि विद्यापतिक दर्शन – स्मरण – सुमिरन आ मनन सँ मानव जीवन सफल होइछः प्रवीण संस्मरण

विद्यापति गीतः राधाकृष्णक प्रेम केँ सुन्दर भाव मे वर्णन ‘माधव, कि कहब सुन्दरि रूपे’

साहित्य – महाकवि विद्यापति विद्यापति गीत (राधाकृष्ण प्रेम आ राधाक रूप केर अति-विलक्षण वर्णन । भाव सँ भरल – महान् भक्त कविक रचना, जे पढ़िते-सुनिते आ मनन करिते हम-अहाँ पवित्र भ’ सकैत छी । सम्पूर्ण पाप सँ छुटकारा भेटि सकैत अछि ।) माधव, की कहब सुन्दरि रूपे कतेक जतन बिहि आनि समारल देखल नयन सरूपे विद्यापति गीतः राधाकृष्णक प्रेम केँ सुन्दर भाव मे वर्णन ‘माधव, कि कहब सुन्दरि रूपे’

अन्दर हृदय आ बाहर भगवान् – सदिखन सकारात्मक बनल रहू, सफलता सुनिश्चित अछि

लेख स्वामी चिदानन्द Always Be Positive – Swami Chidananda One of the favourite sayings of Gurudev, which he wrote in his writings as well as quoted in his divine talks was, “Never despair. Never despair. Nil desperandum”. A poet once said, “Hope springs in the human breast. Heart within, God overhead.” Another poet said, “Tell अन्दर हृदय आ बाहर भगवान् – सदिखन सकारात्मक बनल रहू, सफलता सुनिश्चित अछि

किछु खिस्सा – किछु तर्कः न्यायशास्त्र (वेदक उपांग) पर शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक लेख

पूज्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती (शंकराचार्य, कांचीपुरम पीठ) केर लिखल ‘द वेदाज’ पुस्तक सँ उद्धृत् – ‘द उपांगास – न्याय’ शीर्षक अन्तर्गत गंगेश मिश्रोपाध्याय केँ ईस्ट बंगाल यानि मिथिलाक पंडित आ हुनका सँ जुड़ल अत्यन्त रोचक कथाक वर्णण करैत वाद एवं प्रमाण पर विश्लेषणात्मक चर्चा कयल गेल अछि । पढ़ू – Some anecdotes and arguments Gangesha Mishropaadhyaaya, किछु खिस्सा – किछु तर्कः न्यायशास्त्र (वेदक उपांग) पर शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक लेख

महाकवि विद्यापतिक एकटा अत्यन्त भावपूर्ण रचना – राधाकृष्णक अलौकिक प्रेमक वर्णन – गीत

विद्यापति गीत सुन्दरि, अबहु बचन सुन सबे परिहरि तोहि इछ हरि आपु सराहहि पुन । लाखे तरुअर कोटिहि लता जुबति कत न लेख । सब फूल मधु मधुर नहि फूलहु फूल बिसेख ॥ सुन्दरि, अबहु बचन सुन… जे फुल भमर निन्दहु सुमर बासि न बिसरए पार । जाहि मधुकर उड़ि उड़ि पड़, सेहे संसार क महाकवि विद्यापतिक एकटा अत्यन्त भावपूर्ण रचना – राधाकृष्णक अलौकिक प्रेमक वर्णन – गीत

ग्लोबल मैथिल – भविष्यक ५ वर्ष लेल की योजना बना रहल अछि

विराटनगर, ९ जून २०२५ । मैथिली जिन्दाबाद !! काल्हि ८ जून २०२५  ग्लोबल मैथिल समूह केर एक महत्वपूर्ण बैठक (ऑनलाइन) “गलोबल मैथिल मीट 2025(1) शानदार ढ़ंग सँ आयोजित कयल गेल । एहि मे राजकिशोर झा, मणिकांत झा अमारूपी, प्रेमकान्त चौधरी, संजोग ठाकुर, माला झा, निशा मदन झा, अनूप झा, जेएन झा, पालन झा, कार्तिकेय मैथिल ग्लोबल मैथिल – भविष्यक ५ वर्ष लेल की योजना बना रहल अछि

मैथिल प्रबुद्धजन समूहक सपना पूरा करत ‘ग्लोबल मैथिल’

प्रबुद्ध मैथिल समूह – ग्लोबल मैथिल ‘ग्लोबल मैथिल’ – मैथिलीभाषी समुदाय लेल एकटा प्रबुद्ध मैथिल समूहक रूप मे अग्रसर होइत देखा रहल अछि । प्राचीन संस्कृति-सभ्यता तथा पौराणिक इतिहास मे वर्णित मिथिला भले आइ धरि अपन पान्डित्य परम्परा एवं वेदानुसारक जीवन पद्धति लेल ओतबे जिबन्त देखा रहल हो, परन्तु सामयिक राजनीति आ स्थिति-परिस्थिति मे मिथिलाक मैथिल प्रबुद्धजन समूहक सपना पूरा करत ‘ग्लोबल मैथिल’