आइयो जिबैत छथि मैथिल जनकक असल प्रजा – मैथिलक स्वधर्म निर्वहनक अद्भुत उदाहरण
विचार – प्रवीण नारायण चौधरी एखनहुँ छथि बाँचल विदेहराज मैथिल जनकक असल ‘मैथिल’ प्रजा हम मिथिलावासी केँ संस्कृत (शास्त्र, पुराण, उपनिषद् आदि मे) ‘तीरभुक्ति’ जेकर अपभ्रंश थिक ‘तिरहुत’ ताहि ठामक निवासी सेहो कहल गेल अछि। एकर अर्थ भेलैक जे हम सब अदौकाल सँ जलस्रोतक कछेर (पोखरि या नदीक महाड़ आदि) पर भोग आ मोक्ष मे … आइयो जिबैत छथि मैथिल जनकक असल प्रजा – मैथिलक स्वधर्म निर्वहनक अद्भुत उदाहरण









