सोगारथ रचित दुइ कविताः फगुआक याद, दहेजक चाप
“फाल्गुन महिना” बस्न्त्क फाल्गुन, रङ्ग अबिरा । पुवा पुरी भाग्ङ खाँ, गैबै कबिरा ।। कोयलीक कुहुकुहु, मधुर स्वर । लगन उताहुल देखबै, स्वैमवर।। प्रेमक जोरि बाट तकै, साल सलिना। हाइ रे ! हाइ, फाल्गुन महिना …२।। बदाम,राहरकऽ बिज भरल, मन ललयल । आम, बर्हर फुललै, देख पन्छी कलायल ।। फुर्स्द्कऽ घुर तापी, ओयर उन्क चादर … सोगारथ रचित दुइ कविताः फगुआक याद, दहेजक चाप









