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प्रवीण नारायण चौधरी

जेकरे नाम गुलाबछड़ी सैह चलि आबय – से आबि गेल जनकपुर साहित्य कला तथा नाट्य महोत्सव

जनकपुरधाम, ४ जनवरी २०२४ । मैथिली जिन्दाबाद!! जनकपुर लिटरेचर आर्ट एन्ड ड्रामा फेस्टिवल – मचत धमगिज्जर पाँच दिन धरि मैथिली विकास कोष जनकपुर द्वारा प्रत्येक दुइ वर्ष मे कयल जायवला मैथिली भाषा, साहित्य, संस्कृति, रंगकर्म व समग्र मिथिला सभ्यताक संरक्षण-संवर्धन-प्रवर्धन निमित्त मेगा इवेन्ट “जनकपुर साहित्य कला तथा नाट्य महोत्सव’ १ फरवरी २०२४ सँ ५ फरवरी जेकरे नाम गुलाबछड़ी सैह चलि आबय – से आबि गेल जनकपुर साहित्य कला तथा नाट्य महोत्सव

एना अहुँ सब दिश भ’ रहल अछि की

लेख – प्रवीण नारायण चौधरी विराटनगर टा मे एना आ कि आरो ठाम शिक्षक आ शिक्षालय कमजोर विद्यार्थी प्रति गैरजिम्मेवार अछि त? आइ सँ ३० वर्ष पहिने अंग्रेजी माध्यमक बोर्डिंग स्कूल सब मे शिक्षण पेशा मे काज कएने छी आ ताहि समय सँ छात्र मनोविज्ञान नीक सँ बुझबाक अनुभव अछि। एहि निजी अनुभव सँ हमरा एना अहुँ सब दिश भ’ रहल अछि की

मिथिला (एक विशेष रचना – नववर्ष २०२४ पर नवतुरिया केँ समर्पित) – तीन भाषा मे

विशेष सन्देशमूलक रचना ‍- प्रवीण नारायण चौधरी मिथिला भारतवर्षक अति पुराना सुन्दर भौगोलिक देश तीरभुक्ति तिरहुत कहाबय कहाबय मिथिलादेश! हिमशिखर सँ निर्मित मस्तक निःसृत पंचदश धार स्वयं पखारय जेकर चरण केँ देवनदी गंगाक धार! जेकर माटि सिद्धभूमि छल प्रकट भेली स्वयं लक्ष्मी ‘सीता’ नारायण केर रूप राम छथि सीता सदा हुनक मीता! गढ़लनि रामचरित जे मिथिला (एक विशेष रचना – नववर्ष २०२४ पर नवतुरिया केँ समर्पित) – तीन भाषा मे

मिथिलाभाषा रामायण – बालकाण्ड – तेसर अध्यायः दशरथक पुत्रेष्टि यज्ञ और चारि पुत्रधनक प्राप्ति

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण  बालकाण्डः तेसर अध्याय  दशरथ केर पुत्रेष्टि-यज्ञ आर चारि पुत्रधनक प्राप्ति  ।चौपाइ। राजा दशरथ बड़ श्रीमान । सत्य-पराक्रम एहन न आन ॥१॥ पुरी-अयोध्याधिप अति वीर । सकल-लोक-विश्रुत रणधीर ॥२॥ पुत्र-हीन चिन्तातुर चित्त । गुरु-समीप-गत तकर निमित्त ॥३॥ कयल सविधि गुरु-चरण प्रणाम । कहलनि पुत्र-हीन धिक मिथिलाभाषा रामायण – बालकाण्ड – तेसर अध्यायः दशरथक पुत्रेष्टि यज्ञ और चारि पुत्रधनक प्राप्ति

गीता ध्यान – Gita Meditation

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी गीता ध्यान स्वामी स्वरूपानन्द द्वारा संस्कृत सँ अंग्रेजी मे अनुवादित श्रीमद्भागवद्गीता जे अद्वैत आश्रम सँ प्रकाशित अछि, जाहि पुस्तक केँ १९९९ सँ हम निरन्तर कइएको बेर पढ़ि रहल छी, बेर-बेर गीता आ ओकर महत्वपूर्ण सन्देश केँ जीवन मे ग्रहण करबाक प्रयत्न कय रहल छी, तेकर एकटा अति महत्वपूर्ण अध्याय ‘गीता गीता ध्यान – Gita Meditation

शौर्य मिथिला लोक चित्रकला प्रतियोगिता सम्पन्न: रूबी भेली प्रथम – भेटलनि ७५ हजार टकाक पुरस्कार

जनकपुरधाम, २७ दिसम्बर २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! शौर्य मिथिला लोक चित्रकला प्रतियोगिता सम्पन्न शौर्य सिमेन्टक आयोजन आर विजय लक्ष्मी मिडिया फाउन्डेशनक सहकार्यमे मिथिला लोक चित्रकला प्रतियोगिता भव्यता सँ सम्पन्न भेल । मिथिला चित्रकला मधेशक शान, एहिके उजागर करब शौर्यक अभियान – यैह मूल नाराक संग शुरू कयल गेल एहि प्रतियोगिताक तेसर चरणक कार्यक्रम समापन करैत शौर्य मिथिला लोक चित्रकला प्रतियोगिता सम्पन्न: रूबी भेली प्रथम – भेटलनि ७५ हजार टकाक पुरस्कार

बहुल्य समाज लेल सेहो भाषिक चिन्तन अनिवार्यः से लुटेरा एनजीओ सँ सम्भव नहि

निरीह जनता आ लुटेरा अभियान भाषाक नाम पर सेहो निरीह जनता दुहल जा रहल अछि। मैथिलीभाषाक संरक्षण, संवर्धन आ प्रवर्धनक वास्ते वांछित सृजनधर्मक अलावे आर कोनो विकल्प नहि, लेकिन भ्रष्ट व्यवस्था आ सौदाबाजी सँ आक्रान्त अछि हमरा सभक वर्तमान। वर्तमान वैश्विक गाम (ग्लोबल विलेज) केर नव मानवीय संसार मे कतेको रास भाषाक अस्तित्व समाप्त भेल बहुल्य समाज लेल सेहो भाषिक चिन्तन अनिवार्यः से लुटेरा एनजीओ सँ सम्भव नहि

शहरक भीड़मे एसगर हम – मैथिली साहित्यक अपूर्व प्रस्तुति

पोथी परिचय शहरक भीड़मे एसगर हम (काव्य संग्रह आ काव्य अनुरूप मिथिला चित्रकला) कविता: धर्मेन्द्र विह्वल तथा चित्र: एस सी सुमन एहि बेर हम ‘शहरक भीड़मे एसगर हम’ लऽ कऽ अपनेसभक सोझाँ उपस्थित छी। हमर विगतक कविता कृतिसब रस्ता तकैत जिनगी (२०५१), एक सृष्टि एक कविता (२०५६), एक समयक बात (२०६३), धुवाँएल आकृतिसभ (२०६३) आ शहरक भीड़मे एसगर हम – मैथिली साहित्यक अपूर्व प्रस्तुति

मिथिलाभाषा रामायण – बालकाण्ड – दोसर अध्यायः ब्रह्मा द्वारा विष्णु सँ अवतार लेबाक अनुरोध

स्वाध्याय पाठ – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण बालकाण्ड – दोसर अध्याय ब्रह्मा द्वारा विष्णु सँ अवतार लेबाक अनुरोध ।चौपाइ। शिव शिव कहल शुनल हम कान । रामायण वर अमृत समान ॥१॥ पिबइत पिबइत तृप्ति न भेल । भव सन्ताप सकल चल गेल ॥२॥ धन्य भाग्य थिक मन मे गुणल । रामतत्त्व मिथिलाभाषा रामायण – बालकाण्ड – दोसर अध्यायः ब्रह्मा द्वारा विष्णु सँ अवतार लेबाक अनुरोध

मैथिली फुल नहि फुलबारी छी

मैथिली फुल नहि फुलबारी थिक हमर प्रिय कवि विद्यानन्द बेदर्दी बड नीक कहैत छथि, “मैथिली फुल नहि फुलबारी छी”। एहि फुलबारी मे रंग-बिरंगक फुल फुलाइत अछि। मिथिलाक भूगोल जहिना प्रकृति द्वारा मस्तक पर हिमालय, दाहिना हाथ गण्डक धार, बाम हाथ कोसी धार आ चरण पखारैत स्वयं देवनदी गंगा धार बहि रहल छथि – ई तिरहुतदेश मैथिली फुल नहि फुलबारी छी