मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड नवम अध्याय – कबन्ध बध
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित ‘मिथिलाभाषा रामायण’ अरण्यकाण्डः नवम अध्याय कबन्ध बध ।दोबय छन्द। रामचन्द्र वैदेही-विरही प्राप्त वनान्तर जखना ॥१॥ घोर कबन्ध बाहु योजन भरि राक्षस देखल तखना ॥२॥ पड़ला तकरा बाहुपाशमे सानुज देखल आँखी ॥३॥ की कर्त्तव्य कहू कहु लक्ष्मण प्रभु उठला ई भाखी ॥४॥ चरण-मौलि सौँ रहित लोथ अछि, वक्ष-स्थलमे आनन ॥५॥ … मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड नवम अध्याय – कबन्ध बध




