गप मारबाक प्रवृत्ति पर प्रवीण गीत
स्वरचित गीत – प्रवीण नारायण चौधरी १. गीत गप मारू मुरारी सब मिल-मिल के भले मिथिला मरय देखू तिल-तिल के गप मारू मुरारी….. गाम छूटल घर छूटल, छूटल भजार भटकै छी नगर-डगर, हाटो बजार तैयो न बुझी दु:ख खिल-खिल के-२ गप मारू मुरारी….. कोढिया जे चाहे ह, चाहय उद्धार के पूछय खिच्चैर म, पापड अँचार … गप मारबाक प्रवृत्ति पर प्रवीण गीत






