प्रेमकथाः जबानी दीवानी
कथा – प्रवीण नारायण चौधरी जबानी दीवानी सही छय जे जबानी सब दिन एक रंगक नहि रहय छय आ मन कहियो बूढ़ नहि होइ छय। मन आत्माक हाथ बुझू! बुद्धि सेहो आत्माक हाथे समान होइछ। लेकिन ई साधना सँ बदलैत रहैछ आ अन्य मित्र यथा प्राण, ज्ञान व कर्म केँ तदनुकूल प्रभावित करैत जीवन जियैत … प्रेमकथाः जबानी दीवानी



