गीताः ज्ञानरूपी अग्नि समस्त कर्म केँ भस्म करैछ
गीताक तेसर बेरुक स्वाध्याय (निरन्तरता मे….. भगवान् द्वारा यज्ञरूपी कर्मकेर विभिन्न विभाग पर प्रकाश – आत्मसंतुष्ट लेल कर्मबन्धन नहि बनबाक बात… ई संसार केवल यज्ञ कएनिहार लेल होयबाक स्पष्टोक्ति… यज्ञ नहि कएनिहार लेल सांसारिक यात्रा अत्यन्त कठिन… आगाँ…) एवं बहुविधा यज्ञा वितता ब्रह्मणो मुखे। कर्मजान्विद्धि तान्सर्वानेवं ज्ञात्वा विमोक्ष्यसे॥४-३२॥ एहि तरहें आरो कतेको … गीताः ज्ञानरूपी अग्नि समस्त कर्म केँ भस्म करैछ








