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प्रवीण नारायण चौधरी

गीताः ज्ञानरूपी अग्नि समस्त कर्म केँ भस्म करैछ

गीताक तेसर बेरुक स्वाध्याय   (निरन्तरता मे….. भगवान् द्वारा यज्ञरूपी कर्मकेर विभिन्न विभाग पर प्रकाश – आत्मसंतुष्ट लेल कर्मबन्धन नहि बनबाक बात… ई संसार केवल यज्ञ कएनिहार लेल होयबाक स्पष्टोक्ति… यज्ञ नहि कएनिहार लेल सांसारिक यात्रा अत्यन्त कठिन… आगाँ…)   एवं बहुविधा यज्ञा वितता ब्रह्मणो मुखे। कर्मजान्विद्धि तान्सर्वानेवं ज्ञात्वा विमोक्ष्यसे॥४-३२॥   एहि तरहें आरो कतेको गीताः ज्ञानरूपी अग्नि समस्त कर्म केँ भस्म करैछ

मिथिलाक अनुपम डेग देवडीहा द्वारा पं. भागवत झा स्मृति समारोह

देवडीहा, जनकपुर। फरबरी २, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! धनुषा जिलाक देवडिहा गाम – मुख्यालय जनकपुर सँ १० किलोमीटर दक्षिण अवस्थित ओ प्रसिद्ध गाम जतय मान्यता अनुसार अयोध्या सँ आयल राम भगवान् केर बरियातीगण मे रहल देवता लोकनिक जनमासा लगाओल गेल छल, ताहि ठाम हालहि सँ संचालन मे आयल ‘मिथिलाक अनुपम डेग’ केर शाखा द्वारा सरस्वती पूजाक संग-संग मिथिलाक अनुपम डेग देवडीहा द्वारा पं. भागवत झा स्मृति समारोह

गीताः आत्मसंतुष्ट व्यक्ति लेल कर्म सँ बन्धन नहि बनैछ

गीताक तेसर बेरुक स्वाध्याय (निरन्तरता मे…. चारिम अध्याय, भगवान् कृष्ण द्वारा कर्म-अकर्म आदि पर अर्जुन केँ बुझेबाक क्रम जारी) यदृच्छालाभसन्तुष्टौ द्वन्द्वातीतो विमत्सरः। समः सिद्धावसिद्धौ च कृत्वापि न निबध्यते॥४-२२॥   बिना कोनो खास प्रयासो सँ जतेक आबि गेल ततबे मे प्रसन्न (आत्मसंतुष्ट), द्वंद्व सँ अतीत (दूर, अप्रभावित), मत्सर (डाह, ईर्ष्या) सँ मुक्त, सफलता-असफलता दुनू मे समानरूप गीताः आत्मसंतुष्ट व्यक्ति लेल कर्म सँ बन्धन नहि बनैछ

खण्डी बुद्धिक मैथिल आ ओकर संस्थाक हालत पर कथा

गामक होरी उत्सव दुइ ठाम होयत (भाग १) – प्रवीण नारायण चौधरी   “सुने रे मंगना, सुन रे ढोलना… सुनय जो – सुनय जो!!” नगबा हल्ला करैत – जोर-जोर सँ चिचियैत मुशहरी मे सब केँ जगबैत कहय लागल। लोक सब ओकर आवाज सुनि-सुनि एहि कनकनीवला जाड़मे सुजनी तर सँ निकैल गाँती बन्हने, कियो-कियो सुजनी-केथरी देहे खण्डी बुद्धिक मैथिल आ ओकर संस्थाक हालत पर कथा

मैथिली कविताः ई शहर हमरे छी

मैथिली कविता – कर्ण संजय ई शहर हमरे छी अइ शहर मे किछु काते कात छिरियाएल लोकके बिच ठाढ भय आ घृणाके सङ्ग जीबऽके प्रयत्न करै छी हम । रस्ताचलैत अपनामे बतियाति दहिना वामा ताकि लए छी कहिं कतौ किओ सुनैत अछि किनहि देखाएल कोनो अपरिचित तऽ बात आ बोलीके प्रसंग बदलऽ के प्रयत्न करै मैथिली कविताः ई शहर हमरे छी

मैथिली जिन्दाबादक विंडोज एप्प

“मैथिली जिन्दाबादक विंडोज एप्प ” टेक-मिथिला | झाचंदन | न्यू दिल्ली | 01 फरबरी, 2016 11:55 AM IST नमस्कार मैथिल लोकनि! मैथिली जिंदाबाद आंड्राय्ड एप्प लॉंच होये क बाद आब मैथिली जिन्दबादक टीम विंडोस उपभोक्ता सब के लेल विंडोस ओएस 8.1 औ 10म संस्करण लेल एप्प लौन्च क रहाल अछि | अहि विंडोस ओएस संस्करण मैथिली जिन्दाबादक विंडोज एप्प

मैथिली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समितिक वार्षिकोत्सवक तैयारी

साभार फेसबुकः प्रो. दमन कुमार झा, मधुबनी सँ लिखैत छथि, आर फोटो सहित हुनकर ई अपडेट छन्हि। विदित अछि जे मैथिली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति, मधुबनी अपन आठम स्थापना दिवस समारोह खूब धूमधामसं आगामी 8 फरवरी 2016 केँ मनाब’ जा रहल अछि। एहि कार्यक्रममे बहुत रास नव-नव विधा सभ जोड़ल गेल अछि। ओकरे अंतर्गत स्थानीय मैथिली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समितिक वार्षिकोत्सवक तैयारी

कोलकाता मे एहि वर्षक दोसर ‘अकास तर बैसकी’ आइ संपन्न

कोलकाता, जनबरी ३१, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! धारावाहिक काव्यगोष्ठी ‘अकासतर बैसकी’क वर्ष 2016क दोसर बैसकी आइ 31-1-16 के कोलकाता पुस्तक मेलाक अवसरपर स्थानीय मिलन मेला प्रांगणमे आयोजित भेल। चन्दन कुमार झाक संयोजनमें आयोजित एहि पहिल बैसकीक अध्यक्षता कोलकाताक चर्चित गीतकार, गायक आ संगीतकार विजय इस्सर कयलनि। आजुक बैसकीमे मिथिलेश कुमार झा, भास्कर झा, आमोद झाक अलावे कोलकाता मे एहि वर्षक दोसर ‘अकास तर बैसकी’ आइ संपन्न

मैथिली साहित्य महासभा – नव कार्यकारिणीक पहिल बैसार आइ भेल

दिल्ली, जनबरी ३१, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! आइ मैथिली साहित्य महासभा, दिल्लीक नव गठित कार्यकारिणी केर पहिल बैसार जनपथ स्थित कैफे कॉफी डे मे संपन्न भेल, जाहि मे मैथिली साहित्य संवर्धन आ विभिन्न संगठनात्मक पहलू पर विचार-विमर्श कएल गेल। एहि बैसार मे विशेष रूप सं अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर 21 फरवरी 2016 कें कांस्टिट्यूशन क्लब मे मैथिली साहित्य महासभा – नव कार्यकारिणीक पहिल बैसार आइ भेल

मैथिली कवि डा. चन्द्रमणिक टटका रचनाः “मैथिल जागू-जागू!!”

मैथिल जागू-जागू ! – डा. चन्द्रमणि झा अहाँक सुग्गा शास्त्र पढ़ैये बटुक पढ़ैये वेद तइयो सिर पर बैसिकs कागा सिखबय जाति-विभेद मैथिल जागू-जागू, अपन मिथिला ले’ जागू।। भुसकौलहा बुधियार भेल अछि तेजगरहा भुसकौल मैथिल कोना मंद भेल छथि दुनियाँ करय मखौल ज्ञानभूमि पर ज्ञान सिखाबय ओहि पार के ज्ञानी अपन दुर्दशा दिखि होइये ठोहि पारिकs मैथिली कवि डा. चन्द्रमणिक टटका रचनाः “मैथिल जागू-जागू!!”