गीता, धृतराष्ट्र आ हम मानव समुदाय
जीतल ओ जे समय पर बुझलक धृतराष्ट्र उवाच। धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय॥१॥ धृतराष्ट्र बजलाह – हे सञ्जय! कुरुक्षेत्र जेहेन धर्मक्षेत्र मे युद्ध लेल एकत्रित हमर लोक आ पाण्डव लोकनि कि सब कयलनि? गीताक एहि प्रथम श्लोक मे राजा धृतराष्ट्र दिव्यदृष्टिसम्पन्न सञ्जय सँ पुछलखिन जे ‘हमर लोक’ आ ‘पाण्डव लोकनि’ युद्धक मैदान … गीता, धृतराष्ट्र आ हम मानव समुदाय









